मौलिक कर्तव्य: 11 कर्तव्य और आपके लिए उनका मतलब
अनुच्छेद 51A के ग्यारह मौलिक कर्तव्य, क्या इन्हें लागू करवाया जा सकता है, इनके पीछे के क़ानून, और अधिकार खोए बिना इन पर कैसे अमल करें।
संक्षेप में
- अनुच्छेद 51A हर नागरिक के लिए ग्यारह कर्तव्य (Fundamental Duties) गिनाता है: संविधान, झंडे और राष्ट्रगान का सम्मान; एकता, सद्भाव, पर्यावरण और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा; वैज्ञानिक सोच; और 6 से 14 साल के बच्चे को स्कूल भेजना।
- सिर्फ़ कर्तव्य "न निभाने" पर कोई अदालत सज़ा नहीं दे सकती। अपराध सिर्फ़ कोई विशेष क़ानून बना सकता है, जैसे राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के ख़िलाफ़ क़ानून।
- आपके मौलिक अधिकार आपके कर्तव्यों पर निर्भर नहीं हैं। कोई अधिकारी आपको "बुरा नागरिक" कहकर अधिकार से वंचित नहीं कर सकता।
- कर्तव्यों पर अमल व्यावहारिक है: प्रदूषण की शिकायत करें, किसी बच्चे को स्कूल पहुँचाएँ, अफ़वाह फ़ॉरवर्ड न करें, बिना हिंसा विरोध करें।
हममें से ज़्यादातर जानते हैं कि संविधान हमें अधिकार देता है। कम लोग जानते हैं कि यह कर्तव्य भी गिनाता है। ये सज़ा या बोझ नहीं हैं। ये बताते हैं कि एक स्वतंत्र लोकतंत्र को कैसा नागरिक चाहिए: जो दूसरों का सम्मान करे, साझा संसाधनों की रक्षा करे और अगली पीढ़ी की मदद करे।
कर्तव्य कहाँ से आए
1950 के मूल संविधान में कर्तव्यों की कोई सूची नहीं थी। स्वर्ण सिंह समिति की सिफ़ारिश पर 42वें संशोधन, 1976 से भाग IVA, अनुच्छेद 51A के रूप में दस कर्तव्य जोड़े गए। ग्यारहवाँ 86वें संशोधन, 2002 से जुड़ा, उसी संशोधन से जिसने अनुच्छेद 21A के तहत बच्चों की शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया।
ग्यारह कर्तव्य आसान शब्दों में
अनुच्छेद 51A के तहत भारत के हर नागरिक का कर्तव्य है:
- संविधान का पालन करे और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करे;
- स्वतंत्रता संग्राम को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में सँजोए और उनका पालन करे;
- भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करे;
- देश की रक्षा करे और आह्वान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करे;
- धर्म, भाषा, प्रदेश या वर्ग के भेदभाव से ऊपर उठकर सभी भारतीयों में सद्भाव और भाईचारा बढ़ाए, और महिलाओं की गरिमा के विरुद्ध प्रथाओं का त्याग करे;
- हमारी समन्वित संस्कृति की समृद्ध विरासत का महत्व समझे और उसे बनाए रखे;
- वन, झील, नदी और वन्यजीव सहित प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार करे, और प्राणियों के प्रति दया रखे;
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन व सुधार की भावना विकसित करे;
- सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करे और हिंसा से दूर रहे;
- व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधि के हर क्षेत्र में उत्कृष्टता की ओर बढ़ने का प्रयास करे;
- माता-पिता या संरक्षक के रूप में छह से चौदह साल के अपने बच्चे या प्रतिपाल्य को शिक्षा के अवसर दे।
ये कर्तव्य नागरिकों को संबोधित हैं, राज्य को नहीं। राज्य के कर्तव्य मौलिक अधिकारों और नीति निदेशक तत्वों में हैं।
क्या अदालत इन कर्तव्यों को लागू करवा सकती है?
सीधे नहीं। अनुच्छेद 51A कोई अपराध या दंड नहीं बनाता। सिर्फ़ "वैज्ञानिक सोच विकसित न करने" या "उत्कृष्टता का प्रयास न करने" पर आप पर मुक़दमा नहीं चल सकता।
फिर भी कर्तव्यों का क़ानूनी असर तीन तरह से है।
- विशेष क़ानूनों के ज़रिए। कई कर्तव्यों के पीछे अलग क़ानून हैं। राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 झंडे, संविधान या राष्ट्रगान के अपमान पर सज़ा देता है, और भारतीय ध्वज संहिता, 2002 बताती है कि झंडा कैसे फहराया जाए। लोक संपत्ति नुक़सान निवारण अधिनियम, 1984 तोड़फोड़ पर सज़ा देता है। पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 प्रकृति की रक्षा करते हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 माता-पिता के कर्तव्य को लागू करता है।
- क़ानूनों की व्याख्या में। अदालतें कर्तव्यों से क़ानून का मक़सद समझती हैं और कभी-कभी ऐसी रोक को सही ठहराती हैं जो किसी कर्तव्य को लागू करती है, जैसे वनों की रक्षा के नियम।
- जनहित के मामलों में। नदियाँ साफ़ करने या अवैध खनन रोकने के निर्देश देते समय अदालतों ने पर्यावरण की रक्षा के कर्तव्य का हवाला दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के दो मामले संतुलन दिखाते हैं। Bijoe Emmanuel v. State of Kerala (1986) में जो स्कूली बच्चे धार्मिक कारणों से राष्ट्रगान के समय सम्मान से खड़े रहे पर गाया नहीं, उन्होंने कोई क़ानून नहीं तोड़ा; उन्हें निकालना उनके अधिकारों का उल्लंघन था। Shyam Narayan Chouksey v. Union of India में कोर्ट ने 2016 में सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने का आदेश दिया और 2018 में इसे वैकल्पिक कर दिया। सम्मान अपेक्षित है; ज़बरदस्ती प्रदर्शन क़ानून नहीं है।
क़दम दर क़दम: कर्तव्यों पर अमल
- शिक्षा (कर्तव्य 11)। अगर आपका या आपकी जानकारी का कोई 6 से 14 साल का बच्चा स्कूल में नहीं है, तो नज़दीकी सरकारी स्कूल जाएँ। जन्म प्रमाणपत्र न होने या सत्र शुरू हो जाने पर दाख़िला मना नहीं किया जा सकता। स्कूल से बाहर या काम करते बच्चे के लिए 1098 पर कॉल करें।
- पर्यावरण (कर्तव्य 7)। अवैध कचरा डालना, पेड़ काटना, कूड़ा जलाना या प्रदूषण फैलाती इकाई की शिकायत नगर निकाय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को लिखित में या pgportal.gov.in से करें। तारीख़ और जगह के साथ तस्वीरें रखें।
- महिलाओं की गरिमा (कर्तव्य 5)। उत्पीड़न देखें तो व्यक्ति की मदद करें और आपातकाल में 112 या महिला हेल्पलाइन 181 पर कॉल करें। कार्यस्थल पर उत्पीड़न की शिकायत shebox.wcd.gov.in पर की जा सकती है।
- वैज्ञानिक सोच (कर्तव्य 8)। संदेश फ़ॉरवर्ड करने से पहले किसी आधिकारिक स्रोत से जाँचें। ऑनलाइन धोखाधड़ी की शिकायत 1930 या cybercrime.gov.in पर करें।
- सार्वजनिक संपत्ति और अहिंसा (कर्तव्य 9)। विरोध क़ानूनी है; बस, ट्रेन या दफ़्तर को नुक़सान पहुँचाना 1984 के अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के तहत अपराध है। तोड़फोड़ की सूचना 100 या 112 पर दें।
- सद्भाव (कर्तव्य 5)। नफ़रत भरे भाषण और उकसावा भारतीय न्याय संहिता के तहत अपराध हैं। पुलिस को सूचना दें; पुलिस कार्रवाई न करे तो पुलिस अधीक्षक और राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत करें।
अनीता राँची के एक निजी स्कूल में पढ़ाती हैं। दस साल का मुन्ना रोज़ सुबह स्कूल के गेट के बाहर चाय बेचता है और कभी किसी स्कूल में दाख़िल नहीं हुआ। अनीता उसकी माँ से बात करती हैं, जो कहती हैं कि जन्म प्रमाणपत्र नहीं है और सत्र शुरू हो चुका है। अनीता उन्हें नज़दीकी सरकारी स्कूल ले जाती हैं और प्रधानाध्यापक को RTE अधिनियम की धारा 14 और 15 दिखाती हैं: उम्र माता-पिता घोषित कर सकते हैं, और देर से दाख़िला मना नहीं किया जा सकता। मुन्ना को उम्र के अनुसार कक्षा में विशेष प्रशिक्षण के साथ दाख़िला मिलता है। अनीता 1098 पर चाइल्डलाइन को भी सूचित करती हैं, जो फ़ॉलो-अप का इंतज़ाम करती है ताकि वह स्कूल आता रहे।
अधिकारी कभी-कभी मनमाने आदेश को सही ठहराने के लिए "मौलिक कर्तव्यों" का हवाला देते हैं, जैसे शांतिपूर्ण सभा पर रोक या फ़ोन ज़ब्त करना। अनुच्छेद 51A राज्य को कोई शक्ति नहीं देता। आपके अधिकारों पर कोई भी रोक किसी विशेष क़ानून से आनी चाहिए, और वह क़ानून ख़ुद उचित और संवैधानिक होना चाहिए।
कहाँ जाएँ
- आपातकाल: 112; पुलिस 100; महिलाएँ 181; बच्चे 1098; साइबर धोखाधड़ी 1930।
- पर्यावरण: नगर निकाय, फिर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड; शिकायत pgportal.gov.in पर।
- शिक्षा: नज़दीकी सरकारी स्कूल और खंड या ज़िला शिक्षा अधिकारी; राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग।
- मुफ़्त क़ानूनी सलाह: 15100, ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण, nalsa.gov.in।
- अगर कर्तव्यों के नाम पर आपके अधिकार छीने जाएँ: NHRC हेल्पलाइन 14433, hrcnet.nic.in; अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट में रिट याचिका।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या मौलिक कर्तव्य न निभाने पर मुझे सज़ा हो सकती है?
ख़ुद अनुच्छेद 51A के तहत नहीं, क्योंकि यह कोई अपराध नहीं बनाता। सज़ा तभी हो सकती है जब कोई विशेष क़ानून उस आचरण को अपराध बनाए, जैसे 1971 के अधिनियम के तहत राष्ट्रीय ध्वज का अपमान, 1984 के अधिनियम के तहत सार्वजनिक संपत्ति को नुक़सान, या संरक्षित वन्यजीव को मारना। "उत्कृष्टता का प्रयास" या "वैज्ञानिक सोच" न रखना अपराध नहीं है।
क्या राष्ट्रगान के समय खड़ा होना या गाना अनिवार्य है?
क़ानून जानबूझकर राष्ट्रगान गाने से रोकने या गाती हुई सभा में बाधा डालने पर सज़ा देता है। Bijoe Emmanuel (1986) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सम्मान से खड़े रहना और न गाना कोई क़ानून नहीं तोड़ता। सिनेमाघरों में राष्ट्रगान का 2016 का आदेश कोर्ट ने 2018 में वैकल्पिक कर दिया। सम्मान अपेक्षित है; क़ानून भागीदारी के लिए मजबूर नहीं करता।
मौलिक कर्तव्य किस संशोधन से जुड़े और कितने हैं?
42वें संशोधन, 1976 ने स्वर्ण सिंह समिति की सिफ़ारिश पर भाग IVA और अनुच्छेद 51A में दस कर्तव्य जोड़े। 86वें संशोधन, 2002 ने ग्यारहवाँ जोड़ा: माता-पिता और संरक्षकों का 6 से 14 साल के बच्चों को शिक्षा देने का कर्तव्य। इसलिए आज ग्यारह हैं।
क्या मौलिक कर्तव्य विदेशियों या सरकार पर लागू होते हैं?
नहीं। अनुच्छेद 51A "भारत के प्रत्येक नागरिक" को संबोधित है। विदेशी भारतीय क़ानूनों से बँधे हैं पर अनुच्छेद 51A से नहीं। सरकार भी इससे बँधी नहीं है; उसके दायित्व मौलिक अधिकारों से आते हैं, जिनका उसे सम्मान करना है, और नीति निदेशक तत्वों से, जिन्हें लागू करने की उसे कोशिश करनी है।
यह लेख जागरूकता के लिए सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। अपनी स्थिति के लिए किसी वकील से सलाह लें या मुफ़्त क़ानूनी सहायता के लिए 15100 पर कॉल करें।