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A laptop locked with a chain and padlockनिजता

फ़ोटो: Santeri Viinamäki, Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0. सांकेतिक चित्र.

बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षित रखना: क़ानून और व्यावहारिक क़दम

न्याय पाठशाला4 मिनटRead in English

बच्चों को ऑनलाइन किन जोखिमों का सामना करना पड़ता है, POCSO और डेटा संरक्षण क़ानून समेत कौन-से क़ानून उनकी रक्षा करते हैं, और माता-पिता व शिक्षक आज कौन-से व्यावहारिक क़दम उठा सकते हैं।

क़ानून: POCSO अधिनियम, 2012 (धारा 11, 13–15, 19) · धारा 67B आईटी अधिनियम, 2000 · धारा 9, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 · धारा 78 BNS

आज के बच्चे ऑनलाइन पढ़ते हैं, खेलते हैं और दोस्त बनाते हैं। जो फ़ोन होमवर्क में मदद करता है, वही किसी अजनबी के मैसेज, क्लास ग्रुप में बदमाशी, या ऐसा गेम भी ला सकता है जो माता-पिता का बैंक खाता ख़ाली कर दे। ज़्यादातर बच्चे कुछ ग़लत होने पर किसी बड़े को नहीं बताते, क्योंकि उन्हें फ़ोन छिन जाने या दोषी ठहराए जाने का डर होता है।

क़ानून बच्चों को मज़बूत सुरक्षा देता है। लेकिन सुरक्षा की शुरुआत घर से होती है, ऐसे बड़ों से जो जोखिम जानते हों, और ऐसे बच्चों से जो जानते हों कि वे खुलकर बोल सकते हैं।

किन जोखिमों पर नज़र रखें

  • ग्रूमिंग (Grooming): कोई वयस्क ऑनलाइन बच्चे का भरोसा जीतता है, अक्सर किसी कम उम्र के व्यक्ति का रूप धरकर, ताकि उसका यौन शोषण कर सके।
  • सेक्सटॉर्शन (Sextortion): बच्चे को बहला-फुसलाकर कोई निजी तस्वीर भिजवा ली जाती है और फिर उसे जारी करने की धमकी दी जाती है।
  • साइबरबुलिंग: चैट, पोस्ट या फ़र्ज़ी प्रोफ़ाइल के ज़रिए बार-बार अपमान, धमकी, बेइज़्ज़ती या किसी को अलग-थलग कर देना।
  • धोखाधड़ी और गेमिंग के जाल: गेम के भीतर ख़रीदारी, नक़ली इनाम, और OTP या माता-पिता के कार्ड की जानकारी की माँग।
  • हानिकारक कंटेंट: हिंसक या यौन सामग्री, और ख़ुद को नुक़सान पहुँचाने या ख़तरनाक चैलेंज को बढ़ावा देने वाला कंटेंट।
  • डेटा इकट्ठा करना: ऐसे ऐप जो बच्चे की लोकेशन, कॉन्टैक्ट और व्यवहार को ट्रैक करते हैं।

क़ानून क्या कहता है

यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO) 18 साल से कम उम्र के हर व्यक्ति पर लागू होता है। यह ऑनलाइन किए गए अपराधों को भी उतनी ही गंभीरता से लेता है जितना ऑफ़लाइन को:

  • किसी बच्चे को पोर्नोग्राफ़ी दिखाना, या यौन इरादे से इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से बार-बार बच्चे का पीछा करना, उसे देखना या उससे संपर्क करना यौन उत्पीड़न है धारा 11 POCSO।
  • किसी बच्चे का पोर्नोग्राफ़ी के लिए इस्तेमाल करना गंभीर अपराध है धारा 13–14 POCSO, और बच्चों के यौन शोषण की सामग्री को रखना या अपने पास संभालकर रखना भी दंडनीय है धारा 15 POCSO।
  • बच्चों से जुड़ी यौन रूप से स्पष्ट सामग्री को छापना, ब्राउज़ करना, डाउनलोड करना या शेयर करना, और बच्चों को यौन कृत्यों के लिए ऑनलाइन रिश्तों में फुसलाना दंडनीय है धारा 67B आईटी अधिनियम।

Just Rights for Children Alliance v. S. Harish (2024) में सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ किया कि ऐसी सामग्री को सिर्फ़ देखना या रखना, बिना उसे डिलीट किए या रिपोर्ट किए, अपराध हो सकता है।

डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 18 साल से कम उम्र के हर व्यक्ति को बच्चा मानता है। इसके मुख्य प्रावधान लागू होने के बाद (मौजूदा समय-सारणी के अनुसार मई 2027 से), ऐप और वेबसाइटों को बच्चे का डेटा प्रोसेस करने के लिए माता-पिता की सत्यापित सहमति लेनी होगी, और वे बच्चों के व्यवहार को ट्रैक नहीं कर सकेंगे या उन्हें निशाना बनाकर विज्ञापन नहीं दिखा सकेंगे धारा 9 DPDP अधिनियम।

रिपोर्ट करने का कर्तव्य

POCSO के तहत जिस किसी को पता हो या शक हो कि किसी बच्चे के ख़िलाफ़ यौन अपराध हुआ है, उसे इसकी रिपोर्ट पुलिस या विशेष किशोर पुलिस इकाई को करनी होगी धारा 19 POCSO। रिपोर्ट न करना अपने आप में अपराध है। यह माता-पिता, शिक्षकों, स्कूल प्रबंधन और अस्पतालों पर लागू होता है। बच्चे की पहचान मीडिया में कभी उजागर नहीं की जानी चाहिए।

याद रखेंअगर कोई बच्चा आपको ऑनलाइन हुई किसी बात के बारे में बताए, तो शांत रहें, उस पर यक़ीन करें और बताने के लिए उसका शुक्रिया अदा करें। ग़ुस्से में फ़ोन ज़ब्त न करें; उसी में सबूत है, और ग़ुस्सा बच्चे को सिखा देता है कि अगली बार चुप रहे।

माता-पिता और शिक्षकों के लिए व्यावहारिक क़दम

  1. जल्दी और बार-बार बात करें। समझाएँ कि ऑनलाइन कोई भी फ़ोटो, राज़ या मुलाक़ात नहीं माँग सकता, और बताने पर बच्चे को सज़ा नहीं मिलेगी।
  2. सेटिंग्स का इस्तेमाल करें। पैरेंटल कंट्रोल और चाइल्ड अकाउंट चालू करें, प्रोफ़ाइल प्राइवेट रखें, लोकेशन शेयरिंग बंद करें, और ऐप डाउनलोड और ख़रीदारी के लिए मंज़ूरी ज़रूरी रखें।
  3. छोटे बच्चों के डिवाइस साझा जगहों में रखें और स्क्रीन-टाइम के नियम मिलकर तय करें।
  4. पैसों की हिफ़ाज़त करें। बच्चे के डिवाइस में कार्ड की जानकारी सेव न करें। उन्हें सिखाएँ कि OTP कभी किसी को न बताएँ।
  5. दोस्तों को जानें। पूछें कि वे किन लोगों से चैट करते या खेलते हैं, ठीक वैसे ही जैसे आप स्कूल के दोस्तों के बारे में पूछते हैं।
  6. स्कूल में बदमाशी पर ध्यान दें। स्कूलों में बदमाशी-रोधी उपाय होने चाहिए। विद्यार्थियों के बीच ऑनलाइन बदमाशी की रिपोर्ट स्कूल को लिखित में करें और जो भेजा उसकी कॉपी रखें।
  7. ख़ुद मिसाल बनें। बच्चों की फ़ोटो, स्कूल का नाम या लोकेशन ख़ुद सार्वजनिक रूप से पोस्ट करने से बचें।

अगर कुछ ग़लत हो जाए

  • सबूत संभालें: संदेशों के स्क्रीनशॉट, प्रोफ़ाइल के नाम, लिंक, तारीख़ें और समय।
  • तुरंत मदद और सहारे के लिए राष्ट्रीय चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर कॉल करें।
  • साइबर अपराध की रिपोर्ट 1930 या राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर करें, जिसमें बच्चों के ख़िलाफ़ अपराधों का अलग खंड है।
  • फ़ौरी ख़तरे में 112 पर कॉल करें।
  • प्लेटफ़ॉर्म से कंटेंट हटाने को कहें। Take It Down जैसे टूल उन यौन तस्वीरों को हटाने में मदद करते हैं जो व्यक्ति के 18 साल से कम उम्र के होने पर ली गई थीं।
  • मामले में मुफ़्त क़ानूनी मदद के लिए NALSA से 15100 पर या अपने ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क करें।

यह क्यों मायने रखता है

बचपन सुरक्षित रहकर चीज़ें खोजने का समय है। जब किसी बच्चे का ऑनलाइन शोषण या अपमान होता है, तो उसका नुक़सान सालों तक उसके साथ चल सकता है। संविधान राज्य को निर्देश देता है कि बच्चे आज़ादी और गरिमा के माहौल में बड़े हों और शोषण से सुरक्षित रहें अनुच्छेद 39(f), और POCSO हर क़दम पर बच्चे के सर्वोत्तम हित को केंद्र में रखता है।

अकेले क़ानून बच्चों को सुरक्षित नहीं रख सकते। उन्हें सबसे ज़्यादा बचाता है कोई ऐसा बड़ा जिस पर वे भरोसा करते हों। जब बच्चे जानते हैं कि उन्हें दोष नहीं दिया जाएगा बल्कि सुना जाएगा, तो अपराधियों का सबसे ताक़तवर हथियार, यानी चुप्पी, उनके हाथ से निकल जाता है।

यह लेख जागरूकता के लिए सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। अपनी स्थिति के लिए किसी वकील से सलाह लें या मुफ़्त क़ानूनी सहायता के लिए 15100 पर कॉल करें।

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