Englishफ़ॉलो करें:
A laptop locked with a chain and padlockनिजता

फ़ोटो: Santeri Viinamäki, Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0. सांकेतिक चित्र.

बिना सहमति के शेयर की गई निजी तस्वीरें: क्या करें

न्याय पाठशाला4 मिनटRead in English

अगर आपकी निजी फ़ोटो या वीडियो, असली या मॉर्फ़्ड, शेयर की जाएँ या उन्हें शेयर करने की धमकी मिले, तो पहले कुछ घंटों में क्या करें, उन्हें कैसे हटवाएँ, और कौन-से क़ानून अपराधी को सज़ा देते हैं।

क़ानून: धारा 77, 78 और 308 BNS · धारा 66E, 67 और 67A आईटी अधिनियम, 2000 · नियम 3(2)(b) आईटी नियम, 2021 · धारा 173 BNSS

बहुत कम चीज़ें इतनी डरावनी लगती हैं जितना यह जानना कि आपकी कोई निजी फ़ोटो या वीडियो फैलाई जा रही है, या कोई उसे डालने की धमकी दे रहा है। बहुत से लोग सन्न रह जाते हैं, शर्मिंदा महसूस करते हैं, या ब्लैकमेल करने वाले को पैसे दे देते हैं। इसकी कोई ज़रूरत नहीं है। क़ानून आपके साथ है, और जल्दी क़दम उठाने से सचमुच फ़र्क़ पड़ता है।

यह गाइड उन असली तस्वीरों के बारे में है जो बिना सहमति के ली या शेयर की गईं, और नक़ली या "मॉर्फ़्ड" तस्वीरों के बारे में भी, जिनमें AI से बने डीपफ़ेक शामिल हैं। शर्म उसकी है जो तस्वीर का ग़लत इस्तेमाल करता है, आपकी कभी नहीं।

पहले कुछ घंटों में पहले क़दम

  1. सुरक्षित रहें। अगर आप ख़तरे में हैं या आपको सामने से धमकी दी जा रही है, तो 112 पर कॉल करें।
  2. न पैसे दें, न मोल-भाव करें। ब्लैकमेल करने वाले को पैसे देने से उसकी माँगें शायद ही कभी रुकती हैं।
  3. सबूत सुरक्षित रखें। ऐसे स्क्रीनशॉट लें जिनमें तस्वीर, अकाउंट का नाम, प्रोफ़ाइल का लिंक, तारीख़ और समय, और कोई भी मैसेज या धमकी दिखे। वेब पते नोट करें। चैट डिलीट न करें, भले ही उसे रखना तकलीफ़ दे।
  4. साइबर पुलिस को रिपोर्ट करें। साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें, जिसमें महिलाओं और बच्चों के लिए अलग श्रेणी है जहाँ आप रिपोर्ट कर सकती हैं।
  5. प्लेटफ़ॉर्म से हटाने को कहें। "रिपोर्ट" का विकल्प और प्लेटफ़ॉर्म के शिकायत अधिकारी का इस्तेमाल करें।
याद रखेंतस्वीर को "सबूत" के नाम पर दोस्तों को फ़ॉरवर्ड न करें। सबूत सिर्फ़ पुलिस, अपने वकील या प्लेटफ़ॉर्म की रिपोर्टिंग प्रणाली के साथ साझा करें।

तस्वीर को हटवाना

सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म, मैसेजिंग सेवाएँ और वेबसाइटें बिचौलिए (intermediaries) कहलाती हैं। नियम 3(2)(b) आईटी नियम, 2021 के तहत, जब आप या आपकी ओर से कोई शिकायत करे कि किसी कंटेंट में आपको नग्न या यौन क्रिया में दिखाया गया है, या वह किसी का रूप धरने जैसा है, जैसे मॉर्फ़्ड तस्वीर, तो प्लेटफ़ॉर्म को उसे हटाना होगा या उस तक पहुँच बंद करनी होगी। 20 फ़रवरी 2026 से लागू संशोधनों ने इस समय-सीमा को काफ़ी घटाकर कुछ घंटों तक कर दिया है (अक्टूबर 2026 तक संशोधित नियम में दो घंटे)। जो प्लेटफ़ॉर्म ऐसी शिकायत को अनदेखा करता है, उसे यूज़र कंटेंट पर मिली अपनी क़ानूनी सुरक्षा खोने का जोखिम रहता है।

कुछ टूल दोबारा अपलोड रोकने में भी मदद कर सकते हैं:

  • StopNCII.org वयस्कों को अपने ही डिवाइस पर किसी तस्वीर का डिजिटल फ़िंगरप्रिंट (एक "हैश") बनाने देता है। साझेदार प्लेटफ़ॉर्म इस हैश से अपलोड रोकते हैं, और तस्वीर कहीं भेजी नहीं जाती।
  • Take It Down, जिसे अमेरिका का नेशनल सेंटर फ़ॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन चलाता है, उन तस्वीरों के लिए यही काम करता है जो व्यक्ति के 18 साल से कम उम्र के होने पर ली गई थीं।
  • सर्च इंजनों में बिना सहमति की निजी तस्वीरों को सर्च नतीजों से हटाने की माँग के लिए फ़ॉर्म होते हैं।

अगर कंटेंट बार-बार लौट आता है, तो कोर्ट प्लेटफ़ॉर्म और सर्च इंजनों को उसे और उसकी मिलती-जुलती कॉपियों को हटाने का आदेश दे सकते हैं। कोई वकील या क़ानूनी सहायता का वकील हाईकोर्ट से ऐसा आदेश दिलाने में आपकी मदद कर सकता है।

क़ानून किन बातों पर सज़ा देता है

  • ताक-झाँक (Voyeurism): किसी महिला की निजी क्रिया की तस्वीर को उसकी सहमति के बिना देखना, खींचना या शेयर करना धारा 77 BNS (पहले धारा 354C IPC)।
  • पीछा करना (Stalking): किसी महिला का पीछा करना या इंटरनेट अथवा इलेक्ट्रॉनिक संचार के उसके इस्तेमाल पर नज़र रखना धारा 78 BNS।
  • जबरन वसूली (Extortion): पैसे या कुछ और पाने के लिए तस्वीरें छापने की धमकी देना धारा 308 BNS।
  • निजता का उल्लंघन: किसी भी व्यक्ति के निजी अंग की तस्वीर उसकी सहमति के बिना खींचना, छापना या भेजना, जो पीड़ित के लिंग की परवाह किए बिना लागू होता है धारा 66E आईटी अधिनियम।
  • अश्लील और यौन रूप से स्पष्ट सामग्री: उसे इलेक्ट्रॉनिक रूप से छापना या भेजना धारा 67 और 67A आईटी अधिनियम।
  • बच्चे: किसी बच्चे की कोई भी यौन तस्वीर धारा 67B आईटी अधिनियम और POCSO अधिनियम, 2012 के तहत गंभीर अपराध है।

कुछ यौन अपराधों के पीड़ित का नाम या पहचान छापना अपने आप में अपराध है धारा 72 BNS। आपको अपनी पहचान गुप्त रखे जाने का अधिकार है।

पुलिस में शिकायत दर्ज कराना

आप किसी भी पुलिस थाने में जा सकते हैं। संज्ञेय (गंभीर) अपराध के लिए पुलिस को एफ़आईआर (प्रथम सूचना रिपोर्ट) दर्ज करनी ही होगी, भले ही घटना उनके इलाक़े में न हुई हो। इसे "ज़ीरो एफ़आईआर" कहते हैं, और फिर उसे सही थाने को भेज दिया जाता है धारा 173 BNSS। ऐसे अपराधों पर महिला का बयान महिला अधिकारी को दर्ज करना चाहिए। अगर पुलिस मना करे, तो आप अपनी शिकायत लिखित में पुलिस अधीक्षक (Superintendent of Police) को भेज सकते हैं, या मजिस्ट्रेट के पास जा सकते हैं।

किससे संपर्क करें:

  • 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन, या राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल
  • 181 महिला हेल्पलाइन, सहारे और काउंसलिंग के लिए
  • 1098 अगर तस्वीर में मौजूद व्यक्ति बच्चा है
  • 15100 NALSA, मुफ़्त क़ानूनी सहायता और वकील के लिए

अपना ख़याल रखें

यह एक तरह का उत्पीड़न है, और ग़ुस्सा, डर या सुन्न हो जाना सामान्य है। किसी एक भरोसेमंद व्यक्ति को बताएँ ताकि आप इसे अकेले न झेलें। अगर आप विद्यार्थी या कर्मचारी हैं और अपराधी आपका सहकर्मी या सहपाठी है, तो आपकी संस्था की यौन उत्पीड़न पर आंतरिक समिति भी कार्रवाई कर सकती है। मानसिक स्वास्थ्य के लिए सरकार की Tele-MANAS हेल्पलाइन 14416 पर मदद मिल सकती है।

यह क्यों मायने रखता है

फ़ोटो खींचने की सहमति, या उसे किसी एक व्यक्ति को भेजने की सहमति, कभी भी उसे पूरी दुनिया को दिखाने की सहमति नहीं होती। जब निजी तस्वीरें बिना इजाज़त फैलाई जाती हैं, तो नुक़सान व्यक्ति की गरिमा, सुरक्षा और बेख़ौफ़ जीने की आज़ादी का होता है। क़ानून इसे निजता का उल्लंघन मानता है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा कहा है।

बहुत समय तक पीड़ितों को ही दोष दिया गया और चुप करा दिया गया। रिपोर्ट करना शर्म की बात नहीं है। यह उस गरिमा का दावा है जिसका वादा संविधान हर व्यक्ति से करता है, और इससे प्लेटफ़ॉर्म और पुलिस को अगले ज़रूरतमंद के प्रति जवाबदेह बनाने में भी मदद मिलती है।

यह लेख जागरूकता के लिए सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। अपनी स्थिति के लिए किसी वकील से सलाह लें या मुफ़्त क़ानूनी सहायता के लिए 15100 पर कॉल करें।

क्या यह लेख उपयोगी था?कोई ग़लती दिखी? हमें बताएँ

हर हफ़्ते एक सरल क़ानूनी लेख पाएँ

आपके अधिकारों पर नए लेख, सीधे आपके ईमेल पर। कोई स्पैम नहीं।