रात में शोर? लाउडस्पीकर के नियम और शिकायत का तरीक़ा
रात 10 से सुबह 6 का नियम, डेसिबल सीमा, त्योहारों की छूट, हॉर्न, निर्माण और पटाख़े, और पुलिस, SDM या प्रदूषण बोर्ड में शिकायत कैसे करें।
संक्षेप में
- रात का समय 10 बजे से सुबह 6 बजे तक है। इस दौरान बाहर लाउडस्पीकर, डीजे, निर्माण मशीनें और आवाज़ वाले पटाख़े नहीं चल सकते, और रिहायशी इलाक़ों में रात को हॉर्न बजाना मना है।
- रात में तेज़ संगीत या लाउडस्पीकर के लिए 112 पर कॉल करें। पुलिस उन अधिकारियों में है जिन्हें ध्वनि नियम लागू कराने हैं।
- रात के नियम टूटें, या शोर इलाक़े की सीमा से 10 डेसिबल या ज़्यादा हो, तो आप लिखित शिकायत कर सकते हैं नियम 7(1) ध्वनि नियम। प्राधिकारी को उस पर कार्रवाई करनी होगी।
- बार-बार होने वाले उपद्रव (जनरेटर, वर्कशॉप, हॉल) के लिए SDM या ज़िलाधिकारी को अर्ज़ी दें धारा 152 BNSS, या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, NGT या हाई कोर्ट जाएँ।
आधी रात को शादी का बैंड। परीक्षा के दिनों में बच्चे की खिड़की के पास लाउडस्पीकर। रात भर चलता जनरेटर। भोर से ड्रिलिंग करता निर्माण-स्थल। बहुत से लोग यह सोचकर शोर सह लेते हैं कि कुछ नहीं हो सकता। असल में क़ानून साफ़ समय और सीमाएँ तय करता है, उन्हें लागू कराने वाले अधिकारी तय करता है, और आपको शिकायत के कई रास्ते देता है।
शांति का आपका अधिकार
In re Noise Pollution (2005) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में अच्छे पर्यावरण में जीने और चैन से सोने-आराम करने का अधिकार शामिल है। कोई भी शोर करने के अधिकार का दावा नहीं कर सकता, अपने परिसर में भी नहीं, अगर वह शोर बाहर जाकर दूसरों को परेशान करे। बोलने की आज़ादी में लाउडस्पीकर से दूसरों को सुनने पर मजबूर करना शामिल नहीं है। कोर्ट ने रात में पटाख़ों और लाउडस्पीकरों पर भी रोक लगाई। ये नियम हर धर्म और हर समुदाय पर बराबर लागू होते हैं।
ध्वनि नियम क्या कहते हैं
मुख्य क़ानून ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 है, जो पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत बना और 2010 में और सख़्त किया गया।
- क्षेत्र और सीमाएँ। इलाक़े औद्योगिक, व्यावसायिक, रिहायशी या शांत क्षेत्र (silence zone) होते हैं। रिहायशी इलाक़े में सीमा दिन में 55 डेसिबल (dB) और रात में 45 dB है; शांत क्षेत्र में 50 और 40। दिन सुबह 6 से रात 10 बजे तक है। अस्पतालों, स्कूल-कॉलेजों और अदालतों के आसपास कम से कम 100 मीटर का इलाक़ा शांत क्षेत्र घोषित हो सकता है।
- लाउडस्पीकर के लिए लिखित अनुमति प्राधिकारी से ज़रूरी है, और रात में इसका इस्तेमाल नहीं हो सकता, सिवाय ऑडिटोरियम, कम्युनिटी हॉल, बैंक्वेट हॉल जैसे बंद परिसरों के, या सार्वजनिक आपात स्थिति के नियम 5 ध्वनि नियम।
- आवाज़ की सीमा। सार्वजनिक जगह की सीमा पर लाउडस्पीकर इलाक़े की सीमा से 10 dB से ज़्यादा या 75 dB, जो भी कम हो, उससे ऊपर नहीं जा सकता। निजी साउंड सिस्टम परिसर की सीमा पर इलाक़े की सीमा से 5 dB से ज़्यादा नहीं हो सकता।
- त्योहारों की छूट। राज्य सरकार सांस्कृतिक या धार्मिक अवसरों पर रात 10 से 12 बजे तक लाउडस्पीकर की अनुमति दे सकती है, साल में कुल 15 दिन तक, और तारीख़ें पहले से अधिसूचित करनी होती हैं। यह सिर्फ़ उन दिनों का समय बढ़ाती है; आवाज़ की सीमा फिर भी लागू रहती है।
- हॉर्न, निर्माण और पटाख़े (2010 में जोड़े गए)। शांत क्षेत्रों में, और रिहायशी इलाक़ों में रात को, हॉर्न नहीं बजाया जा सकता, आपात स्थिति के सिवाय। आवाज़ वाले पटाख़े शांत क्षेत्र में या रात में नहीं फोड़े जा सकते। रात में रिहायशी इलाक़ों या शांत क्षेत्रों में शोर करने वाले निर्माण उपकरण नहीं चलाए जा सकते नियम 5A ध्वनि नियम।
इन नियमों को लागू कराने वाला प्राधिकारी (authority) ज़िलाधिकारी, पुलिस कमिश्नर, या राज्य द्वारा नामित कोई दूसरा अधिकारी है, जिसमें पुलिस उपाधीक्षक (DSP) या उससे ऊपर के पुलिस अधिकारी शामिल हैं। शिकायत मिलने पर प्राधिकारी को उल्लंघन करने वाले पर कार्रवाई करनी होगी, और वह संगीत, आवाज़ या शोर वाले काम को रोकने या नियंत्रित करने के लिखित आदेश दे सकता है नियम 7 और 8 ध्वनि नियम।
दूसरे क़ानूनी उपाय
सार्वजनिक उपद्रव हटाने का आदेश। ज़िलाधिकारी या उपखंड मजिस्ट्रेट (SDM) किसी व्यक्ति को ऐसा काम बंद करने का आदेश दे सकता है जो समुदाय के स्वास्थ्य या आराम को नुक़सान पहुँचाए, जैसे शोर वाली वर्कशॉप या रात भर चलता जनरेटर धारा 152 BNSS (पहले धारा 133 CrPC)।
सार्वजनिक उपद्रव एक अपराध। जो काम जनता को आम तौर पर चोट, ख़तरा या परेशानी पहुँचाए, वह सार्वजनिक उपद्रव (public nuisance) है धारा 270 BNS, जिसकी सज़ा जुर्माना है धारा 292 BNS।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, या केंद्र शासित प्रदेश में प्रदूषण नियंत्रण समिति, ध्वनि मानक तोड़ने वाली फ़ैक्टरियों, DG सेट और निर्माण-स्थलों पर कार्रवाई कर सकती है।
दीवानी मुक़दमा, NGT और हाई कोर्ट। आप निजी उपद्रव के लिए पड़ोसी या कारोबार पर निषेधाज्ञा (injunction, यानी रोकने का अदालती आदेश) और हर्जाने का मुक़दमा कर सकते हैं। अधिकारी लगातार उल्लंघन को अनदेखा करें, तो राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) या हाई कोर्ट जा सकते हैं।
क़दम दर क़दम
- सुरक्षित हो तो पहले विनम्रता से कहें। समय और नियम बताएँ। कई मामले यहीं सुलझ जाते हैं।
- रिकॉर्ड रखें। तारीख़ और समय लिखें। समय दिखाने वाले छोटे वीडियो बनाएँ। फ़ोन का साउंड-मीटर ऐप अंदाज़ा देता है; आधिकारिक माप प्राधिकारी करता है।
- रात में 112 पर कॉल करें या स्थानीय थाने को। सही पता बताएँ और कहें कि यह ध्वनि नियमों के रात वाले प्रावधान का उल्लंघन है। कॉल का समय नोट करें।
- लिखित शिकायत करें। थाना प्रभारी (SHO) और DCP/SP, और ज़िलाधिकारी या SDM को, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कॉपी के साथ। शोर का स्रोत, समय और तारीख़ें लिखें, वीडियो लगाएँ। नियम 7 और 8 के तहत कार्रवाई माँगें। रसीद या ईमेल का रिकॉर्ड रखें।
- बार-बार होने वाले स्रोत के लिए (हॉल, फ़ैक्टरी या जनरेटर) धारा 152 BNSS के तहत उपद्रव हटाने के आदेश के लिए SDM को अर्ज़ी दें।
- आगे बढ़ें अगर कुछ न हो: pgportal.gov.in या राज्य के शिकायत पोर्टल पर शिकायत; फिर NGT या हाई कोर्ट। 15100 पर मुफ़्त क़ानूनी सहायता मिलती है।
जयपुर की मीना का बेटा बारहवीं में है। घर के पीछे एक बैंक्वेट लॉन हफ़्ते में तीन-चार रात आधी रात के बाद तक डीजे बजाता था। उन्होंने दो रातों को 11:20 बजे 112 पर कॉल किया और समय नोट किया। फिर छह पड़ोसियों के साथ SDM और DCP को लिखा, तारीख़ वाले वीडियो लगाए, नियम 5 की रात 10 बजे की सीमा का हवाला दिया और नियम 8 के तहत कार्रवाई माँगी। पुलिस के दौरे और SDM की लिखित चेतावनी के बाद लॉन ने रात 10 बजे के बाद संगीत अंदर बजाना शुरू कर दिया।
ये तैयार रखें
- शोर की तारीख़, समय और अवधि का लेखा।
- समय दिखाने वाले वीडियो; हों तो साउंड-मीटर के स्क्रीनशॉट।
- 112 कॉल के समय और रेफ़रेंस नंबर।
- लिखित शिकायतों और पावतियों की कॉपी।
- अगर शोर से किसी बुज़ुर्ग या बीमार सदस्य की सेहत बिगड़ी हो तो डॉक्टर का पर्चा।
किसी समारोह की पुलिस या आयोजक की "अनुमति" से रात 10 बजे के बाद बाहर तेज़ संगीत की छूट नहीं मिलती, सिवाय राज्य द्वारा अधिसूचित गिने-चुने त्योहारी दिनों के, और तब भी सिर्फ़ आधी रात तक। ख़ुद जाकर झगड़ा न करें या उपकरण न तोड़ें; 112 पर कॉल करें और प्राधिकारी को कार्रवाई करने दें।
कहाँ जाएँ
- अभी (रात में): 112 या स्थानीय थाना।
- लिखित शिकायत: SHO और DCP/SP, SDM या ज़िलाधिकारी, और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
- अधिकारी कार्रवाई न करें तो: pgportal.gov.in या राज्य का शिकायत पोर्टल।
- अदालत: धारा 152 BNSS के तहत SDM; राष्ट्रीय हरित अधिकरण; हाई कोर्ट।
- मदद: मुफ़्त क़ानूनी सहायता 15100 (NALSA); वरिष्ठ नागरिक एल्डर लाइन 14567 पर कॉल कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
लाउडस्पीकर कितने बजे तक बजाया जा सकता है?
बाहर रात 10 बजे तक। रात 10 से सुबह 6 बजे तक सिर्फ़ हॉल और ऑडिटोरियम जैसे बंद परिसरों में, या आपात स्थिति में। राज्य साल में अधिकतम 15 अधिसूचित त्योहारी दिनों पर आधी रात तक की अनुमति दे सकता है।
क्या धार्मिक स्थल का लाउडस्पीकर ध्वनि नियमों से बाहर है?
नहीं। ध्वनि नियम और सुप्रीम कोर्ट का 2005 का फ़ैसला सभी धार्मिक स्थलों और सभी समुदायों पर बराबर लागू होते हैं। अनुमति, समय सीमा और आवाज़ की सीमा हर लाउडस्पीकर पर लागू है।
क्या पड़ोसी के घर से आने वाले शोर की शिकायत कर सकते हैं?
हाँ। निजी साउंड सिस्टम परिसर की सीमा पर इलाक़े की सीमा से 5 dB से ज़्यादा नहीं हो सकता, और रात के नियम भी लागू हैं। पहले बात करें, फिर 112 पर कॉल करें या प्राधिकारी को लिखें। उपद्रव के लिए दीवानी मुक़दमा भी हो सकता है।
क्या मेरी कॉलोनी में रात को निर्माण का काम हो सकता है?
शोर वाले उपकरणों से नहीं। 2010 से रिहायशी इलाक़ों या शांत क्षेत्रों में रात (10 बजे से सुबह 6 बजे) में आवाज़ करने वाले निर्माण उपकरण नहीं चलाए जा सकते। पुलिस, SDM या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में शिकायत करें।
अस्पताल के बाहर या रात में लगातार हॉर्न बजे तो क्या करें?
शांत क्षेत्रों में, और रिहायशी इलाक़ों में रात को, हॉर्न बजाना मना है, आपात स्थिति के सिवाय। ट्रैफ़िक पुलिस या 112 को बताएँ, और प्राधिकारी से अस्पताल के आसपास शांत क्षेत्र घोषित करने या लागू कराने की माँग करें।
यह लेख जागरूकता के लिए सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। अपनी स्थिति के लिए किसी वकील से सलाह लें या मुफ़्त क़ानूनी सहायता के लिए 15100 पर कॉल करें।
