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Traffic on a city road in Bengaluruनिजता

फ़ोटो: Harsha K R, Wikimedia Commons, CC BY-SA 2.0. सांकेतिक चित्र.

सड़क दुर्घटना: मुफ़्त इलाज, गुड सेमेरिटन क़ानून और मुआवज़ा

न्याय पाठशाला8 मिनट✓ समीक्षा और अद्यतन: अक्टूबर 2026Read in English

₹1.5 लाख तक कैशलेस इलाज, मदद करने वालों की सुरक्षा, MACT दावे, बिना ग़लती और हिट-एंड-रन मुआवज़ा, और परिवार क्या करें।

क़ानून: धारा 134A, 159, 161, 162, 164 और 166 मोटर वाहन अधिनियम, 1988 · PM-RAHAT (कैशलेस इलाज) योजना, 2025 · धारा 106(1) BNS

संक्षेप में

  • 112 पर कॉल करें। सड़क दुर्घटना के हर घायल को PM-RAHAT योजना (पहले कैशलेस इलाज योजना, 2025) के तहत नामित अस्पताल में ₹1.5 लाख तक कैशलेस इलाज, 7 दिन तक मिल सकता है।
  • अगर आप घायल की मदद करते हैं तो आप गुड सेमेरिटन हैं: नाम बताना ज़रूरी नहीं, अस्पताल आपको रोक नहीं सकता या पैसे नहीं माँग सकता, और आप दीवानी व आपराधिक ज़िम्मेदारी से सुरक्षित हैं धारा 134A मोटर वाहन अधिनियम।
  • पीड़ित और परिवार मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) में मुआवज़े का दावा कर सकते हैं धारा 166 मोटर वाहन अधिनियम, जो आमतौर पर गाड़ी की बीमा कंपनी देती है।
  • हिट-एंड-रन में गाड़ी का पता न चले, तो दावा जाँच अधिकारी को ₹2 लाख (मृत्यु) या ₹50,000 (गंभीर चोट) के लिए आवेदन करें धारा 161 मोटर वाहन अधिनियम।

भारत की सड़कों पर बहुत से लोग इसलिए मरते हैं कि मदद देर से पहुँचती है। राहगीर पुलिस की पूछताछ और कोर्ट के चक्करों के डर से हिचकते हैं। सदमे में डूबे परिवार यह नहीं जानते कि क़ानून उन्हें मुफ़्त इलाज और मुआवज़ा देता है। यह लेख बताता है कि मौक़े पर क्या करें, इलाज का ख़र्च कैसे चुकता है, और बाद में मुआवज़ा कैसे माँगें।

दुर्घटना की जगह पर

  1. 112 पर कॉल करें, पुलिस और एंबुलेंस के लिए। सही जगह और कितने लोग घायल हैं, बताएँ।
  2. जगह सुरक्षित करें। हैज़र्ड लाइट जलाएँ और ट्रैफ़िक को सावधान करें। सड़क के बीच खड़े न हों।
  3. सिर्फ़ बुनियादी प्राथमिक उपचार। तेज़ ख़ून बहने पर साफ़ कपड़े से कसकर दबाएँ। जिसकी गर्दन या रीढ़ में चोट हो सकती है, उसे न हिलाएँ, जब तक आग या कोई दूसरा ख़तरा न हो।
  4. हो सके तो ब्योरा नोट करें: गाड़ी का नंबर, रंग, समय, और जगह की फ़ोटो।
सुझावगंभीर चोट के बाद का पहला घंटा, "गोल्डन आवर", वह समय है जब इलाज सबसे ज़्यादा जानें बचाता है। घायल को जल्दी अस्पताल पहुँचाना सबसे अहम है।

गुड सेमेरिटन सुरक्षित हैं

गुड सेमेरिटन वह है जो नेक नीयत से, बिना इनाम की उम्मीद के, आपात मदद देता है या घायल को अस्पताल ले जाता है। Savelife Foundation v. Union of India (2016) में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुरक्षा दिशानिर्देशों को मंज़ूरी के बाद संसद ने 2019 में धारा 134A मोटर वाहन अधिनियम जोड़ी, और 2020 में नियम आए। व्यवहार में:

  • नेक नीयत से आपात देखभाल करते हुए लापरवाही से हुई चोट या मौत के लिए आप किसी दीवानी या आपराधिक केस में ज़िम्मेदार नहीं हैं।
  • पुलिस या अस्पताल को अपना नाम, पता या फ़ोन नंबर देना ज़रूरी नहीं। यह आपकी मर्ज़ी है।
  • अस्पताल आपको रोक नहीं सकता या पैसे नहीं माँग सकता। घायल को पहुँचाकर आप जा सकते हैं।
  • अगर आप गवाह बनने को राज़ी हों, तो आपसे सिर्फ़ एक बार, आपकी सुविधा के समय और जगह पर पूछताछ होनी चाहिए, और आप वीडियो से गवाही दे सकते हैं।

सड़क परिवहन मंत्रालय की राह-वीर योजना के तहत, गंभीर घायल को गोल्डन आवर में अस्पताल पहुँचाने वाले को ₹25,000 का इनाम और प्रमाण-पत्र मिल सकता है। यह योजना तय अवधि के लिए बढ़ाई जाती है, इसलिए ज़िला प्रशासन से पता करें कि अभी चल रही है या नहीं।

मुफ़्त इलाज: PM-RAHAT योजना

धारा 162 मोटर वाहन अधिनियम के तहत बनी सड़क दुर्घटना पीड़ितों के कैशलेस इलाज की योजना, 2025 5 मई 2025 से लागू हुई। फ़रवरी 2026 में इसका नाम बदलकर PM-RAHAT (सड़क दुर्घटना पीड़ित अस्पताल भर्ती और सुनिश्चित इलाज) योजना कर दिया गया।

  • किसी भी सड़क पर मोटर वाहन से जुड़ी दुर्घटना में घायल हर व्यक्ति इसमें शामिल है।
  • योजना के तहत नामित अस्पतालों में प्रति व्यक्ति प्रति दुर्घटना ₹1.5 लाख तक कैशलेस इलाज, दुर्घटना से सात दिन तक।
  • जो अस्पताल नामित नहीं हैं, उन्हें मरीज़ की हालत स्थिर (stabilisation) करनी होगी और आगे रेफ़र करना होगा।
  • पुलिस द्वारा दुर्घटना की पुष्टि के बाद अस्पतालों को मोटर वाहन दुर्घटना कोष से भुगतान होता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) राज्य एजेंसियों के साथ यह व्यवस्था चलाता है।

इसके अलावा, Parmanand Katara v. Union of India (1989) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हर डॉक्टर, सरकारी हो या निजी, पुलिस की औपचारिकताओं का इंतज़ार किए बिना घायल की जान बचाने के लिए तुरंत इलाज दे।

पीड़ितों और परिवारों के लिए मुआवज़ा

MACT में दावा। घायल व्यक्ति, या मृतक के क़ानूनी वारिस, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में दावा कर सकते हैं धारा 166 मोटर वाहन अधिनियम। आप वहाँ दावा कर सकते हैं जहाँ दुर्घटना हुई, जहाँ आप रहते या काम करते हैं, या जहाँ ड्राइवर या मालिक रहता है। मुआवज़े में इलाज का ख़र्च, आमदनी का नुक़सान, परिवार के सहारे का नुक़सान, दर्द-तकलीफ़ और आगे का इलाज शामिल है। थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य है, इसलिए आमतौर पर बीमा कंपनी भुगतान करती है।

बिना ग़लती साबित किए मुआवज़ा। अधिनियम किसी की ग़लती साबित किए बिना मृत्यु पर ₹5 लाख और गंभीर चोट पर ₹2.5 लाख का तय मुआवज़ा भी देता है धारा 164 मोटर वाहन अधिनियम। आपके मामले में कौन-सा रास्ता ज़्यादा देगा, यह वकील या विधिक सेवा प्राधिकरण बता सकता है।

पुलिस की रिपोर्ट। पुलिस को तीन महीने में दुर्घटना सूचना रिपोर्ट बनाकर अधिकरण को भेजनी होती है धारा 159 मोटर वाहन अधिनियम। अधिकरण उसे दावे के रूप में ले सकता है, इसलिए जाँच अधिकारी से इसकी स्थिति पूछें।

समय सीमा। 2019 का संशोधन कहता है कि दावा छह महीने में करना होगा। इसकी वैधता को चुनौती दी गई है, और नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि मामला लंबित रहने तक अधिकरण और हाई कोर्ट किसी दावे को समय-सीमा पार बताकर ख़ारिज न करें (Bhagirathi Dash v. Union of India)। फिर भी जितनी जल्दी हो सके दावा करें।

हिट-एंड-रन। अगर गाड़ी का पता न चले, तो हिट एंड रन मोटर दुर्घटना पीड़ित मुआवज़ा योजना, 2022 मोटर वाहन दुर्घटना कोष से मृत्यु पर ₹2 लाख और गंभीर चोट पर ₹50,000 देती है धारा 161 मोटर वाहन अधिनियम। तय फ़ॉर्म में अपने इलाक़े के दावा जाँच अधिकारी (Claims Enquiry Officer, आमतौर पर SDM या SDO) को आवेदन करें। S. Rajaseekaran v. Union of India (2024) में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह परिवारों को इस योजना के बारे में बताए, और विधिक सेवा प्राधिकरण उन परिवारों की मदद करें जिन्होंने एक महीने में दावा नहीं किया।

आपराधिक केस। लापरवाही या तेज़ रफ़्तार से गाड़ी चलाकर मौत करना अपराध है धारा 106(1) BNS (पहले धारा 304A IPC)। पुलिस को FIR दर्ज करनी होगी। आपराधिक केस और मुआवज़े का दावा अलग-अलग चलते हैं।

परिवारों के लिए क़दम दर क़दम

  1. FIR नंबर और जाँच अधिकारी का नाम व फ़ोन नंबर लें।
  2. मेडिकल रिकॉर्ड, बिल, डिस्चार्ज समरी और मृत्यु हो तो पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट जुटाएँ।
  3. आमदनी (सैलरी स्लिप, ITR, कारोबार के रिकॉर्ड) और उम्र का सबूत इकट्ठा करें।
  4. पुलिस से पूछें कि दुर्घटना रिपोर्ट MACT को गई या नहीं; न गई हो तो ख़ुद दावा याचिका दायर करें।
  5. हिट-एंड-रन में FIR और मेडिकल या मृत्यु के काग़ज़ों के साथ दावा जाँच अधिकारी को आवेदन करें।
  6. ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण (15100) से मुफ़्त मदद लें। लोक अदालतें कई दावे जल्दी निपटा देती हैं।
उदाहरण

इंदौर के पास हाईवे पर इमरान ने एक स्कूटर सवार को गिरते देखा। उन्होंने 112 पर कॉल किया, सवार के सिर के घाव पर कपड़ा दबाया और एंबुलेंस के साथ गए। अस्पताल में क्लर्क ने उनका फ़ोन नंबर और जमा राशि माँगी। इमरान ने कहा कि वे गुड सेमेरिटन हैं, दोनों से मना किया और चले गए। सवार सुरेश का इलाज योजना के तहत कैशलेस हुआ। बाद में सुरेश के परिवार ने MACT में दावा किया; टक्कर मारने वाली कार की बीमा कंपनी ने लोक अदालत में समझौता किया।

ये तैयार रखें

  • FIR की कॉपी और दुर्घटना रिपोर्ट।
  • मेडिकल रिकॉर्ड, बिल, डिस्चार्ज समरी; ज़रूरत हो तो पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाण-पत्र।
  • आमदनी और उम्र का सबूत; आश्रितों का ब्योरा।
  • गाड़ी का नंबर, बीमा का ब्योरा (पता हो तो), जगह की फ़ोटो।
  • दावेदार या वारिसों का पहचान पत्र और बैंक ब्योरा।
सावधान

अस्पतालों में कभी-कभी एजेंट परिवारों से मिलकर बड़े हिस्से के बदले दावा "संभालने" की पेशकश करते हैं। आपको उनकी ज़रूरत नहीं। विधिक सेवा प्राधिकरण मुफ़्त मदद करता है, और दावा सीधे MACT में दायर हो सकता है।

कहाँ जाएँ

  • आपात स्थिति: 112 (पुलिस और एंबुलेंस)।
  • इलाज: नज़दीकी अस्पताल; PM-RAHAT के तहत कैशलेस इलाज माँगें।
  • मुआवज़ा: आपके ज़िले का मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण; हिट-एंड-रन में दावा जाँच अधिकारी (SDM/SDO)।
  • मुफ़्त क़ानूनी मदद: ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण, 15100।
  • अधिकारियों के ख़िलाफ़ शिकायत: pgportal.gov.in।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

घायल को अस्पताल ले जाऊँ तो क्या पुलिस परेशान करेगी?

नहीं। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 134A और 2020 के नियमों के तहत आपको नाम या संपर्क देना ज़रूरी नहीं, आपको रोका नहीं जा सकता, और नेक नीयत से किए काम की ज़िम्मेदारी से आप सुरक्षित हैं। आप गवाह बनना चुनें तो सिर्फ़ एक बार पूछताछ होनी चाहिए।

क्या अस्पताल को दुर्घटना पीड़ित का बिना पैसे लिए इलाज करना होगा?

हाँ। PM-RAHAT योजना के तहत नामित अस्पतालों को सात दिन तक ₹1.5 लाख तक कैशलेस इलाज देना होगा, और हर अस्पताल को जान बचाने के लिए आपात इलाज देना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने Parmanand Katara (1989) में यही कहा।

टक्कर मारने वाली गाड़ी भाग गई तो?

अगर उसका कभी पता न चले, तो हिट-एंड-रन योजना में दावा जाँच अधिकारी को ₹2 लाख (मृत्यु) या ₹50,000 (गंभीर चोट) के लिए आवेदन करें। बाद में गाड़ी का पता चल जाए, तो MACT में पूरा मुआवज़ा माँग सकते हैं।

क्या मोटर दुर्घटना दावे की कोई समय सीमा है?

क़ानून छह महीने कहता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस नियम की चुनौती लंबित रहने तक दावे समय-सीमा पार बताकर ख़ारिज न हों (नवंबर 2025)। जितनी जल्दी हो सके दावा करें।

क्या मुआवज़े के लिए वकील ज़रूरी है?

विवादित दावों में वकील मदद करता है, लेकिन ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण (15100) से मुफ़्त वकील मिल सकता है। कई दावे पूरे मुक़दमे के बिना लोक अदालत में निपट जाते हैं।

यह लेख जागरूकता के लिए सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। अपनी स्थिति के लिए किसी वकील से सलाह लें या मुफ़्त क़ानूनी सहायता के लिए 15100 पर कॉल करें।

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