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A wheelchair ramp outside a building in Bengaluruसमानता

फ़ोटो: Chongkian, Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0. सांकेतिक चित्र.

RPwD एक्ट, 2016 के तहत दिव्यांगजन के अधिकार: आप क्या माँग सकते हैं

न्याय पाठशाला7 मिनट✓ समीक्षा और अद्यतन: अक्टूबर 2026Read in English

21 दिव्यांगताएँ, उचित सुविधा, नौकरी में 4% और सीटों में 5% आरक्षण, UDID कार्ड कैसे बनवाएँ, और स्कूल या नियोक्ता के मना करने पर शिकायत कहाँ करें।

क़ानून: अनुच्छेद 14 और 21, भारत का संविधान · दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016

संक्षेप में

  • दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (RPwD एक्ट) में 21 स्थितियाँ शामिल हैं: दृष्टिहीनता और चलने-फिरने की दिव्यांगता से लेकर ऑटिज़्म, डिस्लेक्सिया, मानसिक रोग, थैलेसीमिया और एसिड हमले की चोटें तक।
  • हर दिव्यांग व्यक्ति को उचित सुविधा (reasonable accommodation) का हक़ है: रैंप, लेखक (scribe), अतिरिक्त समय, सुलभ फ़ॉर्मैट। इससे इनकार भेदभाव है।
  • बेंचमार्क दिव्यांगता (40% या ज़्यादा, प्रमाणित) होने पर: सरकारी पदों में 4%, सरकारी और सहायता-प्राप्त उच्च शिक्षा में 5% सीटें, 6 से 18 साल तक मुफ़्त शिक्षा।
  • UDID कार्ड swavlambancard.gov.in पर ऑनलाइन या ज़िला अस्पताल से बनवाएँ; यह पूरे भारत में मान्य है।
  • अधिकार से इनकार? संस्था के शिकायत निवारण अधिकारी को लिखें, फिर राज्य दिव्यांगजन आयुक्त को। मुफ़्त वकील: 15100।

एक छात्र जो परीक्षा हॉल तक सीढ़ियाँ नहीं चढ़ सकता। एक क्लर्क जिसे नेत्रहीन होने की वजह से प्रमोशन नहीं दिया गया। मानसिक रोग वाला एक व्यक्ति जिसे बैंक से लौटा दिया गया। भारतीय क़ानून में ये बदक़िस्मती नहीं, इनमें से कई अधिकारों का उल्लंघन हैं। RPwD एक्ट दिव्यांगजन को अधिकारों वाले नागरिक मानता है और सरकार, स्कूलों और नियोक्ताओं पर ज़िम्मेदारी डालता है। इस लेख में बताया गया है कि यह आपको क्या देता है और इसका इस्तेमाल कैसे करें।

एक्ट किसे सुरक्षा देता है

एक्ट में 21 "निर्दिष्ट दिव्यांगताएँ" हैं: शारीरिक, संवेदी, बौद्धिक, सीखने संबंधी और मानसिक, साथ ही थैलेसीमिया और हीमोफ़ीलिया जैसे रक्त विकार (पूरी सूची नीचे सवालों में है)।

कुछ अधिकार हर दिव्यांग व्यक्ति के हैं। कुछ, जैसे आरक्षण और मुफ़्त शिक्षा, बेंचमार्क दिव्यांगता वाले व्यक्ति के हैं: चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा प्रमाणित 40 प्रतिशत या उससे ज़्यादा की निर्दिष्ट दिव्यांगता धारा 2(r), RPwD एक्ट।

आपके मुख्य अधिकार

  • समानता और भेदभाव से सुरक्षा। सरकार को समानता, गरिमा और अखंडता का सम्मान सुनिश्चित करना है धारा 3, RPwD एक्ट। दिव्यांगता के आधार पर किसी से भेदभाव नहीं हो सकता, जब तक वह किसी वैध उद्देश्य का आनुपातिक साधन न हो।
  • उचित सुविधा। ज़रूरी और उपयुक्त बदलाव, बिना असंगत बोझ के, ताकि आप बराबरी से हिस्सा ले सकें: लेखक, अतिरिक्त समय, रैंप, स्क्रीन-रीडर सॉफ़्टवेयर, सांकेतिक भाषा दुभाषिया। Vikash Kumar v Union Public Service Commission (2021) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राइटर्स क्रैम्प वाला उम्मीदवार 40 प्रतिशत बेंचमार्क से नीचे होने पर भी लेखक का हक़दार है, क्योंकि उचित सुविधा ख़ुद समानता का हिस्सा है।
  • समावेशी शिक्षा। सरकारी और सहायता-प्राप्त स्कूलों को दिव्यांग बच्चों को बिना भेदभाव दाख़िला देना, भवन और पढ़ाई सुलभ बनानी और सहयोग देना होगा। 6 से 18 साल के हर बेंचमार्क दिव्यांग बच्चे को पड़ोस के या विशेष स्कूल में मुफ़्त शिक्षा का हक़ है धारा 31, RPwD एक्ट।
  • उच्च शिक्षा। सरकारी और सहायता-प्राप्त संस्थानों को बेंचमार्क दिव्यांगजन के लिए कम से कम 5 प्रतिशत सीटें आरक्षित रखनी होंगी, उम्र में पाँच साल की छूट के साथ धारा 32, RPwD एक्ट।
  • सरकारी नौकरियाँ। हर सरकारी प्रतिष्ठान में कम से कम 4 प्रतिशत रिक्तियाँ बेंचमार्क दिव्यांगजन के लिए आरक्षित हैं धारा 34, RPwD एक्ट।
  • दिव्यांग होने पर नौकरी से निकालना मना। सरकारी प्रतिष्ठान सेवा के दौरान दिव्यांग हुए कर्मचारी को न निकाल सकता है, न पदावनत कर सकता है, न प्रमोशन रोक सकता है। वही काम संभव न रहे तो उसी वेतन पर दूसरे पद पर रखना होगा धारा 20, RPwD एक्ट।
  • निजी नियोक्ता। निजी कंपनियों समेत हर प्रतिष्ठान को समान अवसर नीति प्रकाशित करनी होगी; 20 या ज़्यादा कर्मचारियों वालों को उसे पंजीकृत कराना और शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त करना होगा धारा 21, 23, RPwD एक्ट।
  • सुलभता। भवनों, परिवहन और सूचना सेवाओं को सुलभता मानकों का पालन करना होगा। Rajive Raturi v Union of India (2024) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये मानक बाध्यकारी न्यूनतम नियम होने चाहिए, सिर्फ़ दिशानिर्देश नहीं।

क़दम दर क़दम: प्रमाणपत्र और UDID कार्ड

लगभग हर लाभ दिव्यांगता प्रमाणपत्र से शुरू होता है। यूनिक डिसेबिलिटी आईडी (UDID) कार्ड इसका राष्ट्रीय रूप है और पूरे भारत में माना जाता है।

  1. ऑनलाइन आवेदन करें UDID पोर्टल पर, या ज़िला अस्पताल या राज्य द्वारा तय कार्यालय में। फ़ोटो, पहचान और पते का प्रमाण, और पुराने मेडिकल काग़ज़ चाहिए।
  2. मेडिकल जाँच। सरकारी अस्पताल में तारीख़ मिलेगी। मेडिकल बोर्ड केंद्रीय दिशानिर्देशों के मुताबिक़ दिव्यांगता का प्रकार और प्रतिशत तय करता है धारा 58, RPwD एक्ट।
  3. कार्ड डाउनलोड करें मंज़ूरी के बाद पोर्टल से। स्थायी दिव्यांगता के प्रमाणपत्र आम तौर पर बिना समाप्ति तिथि के बनते हैं; बदलने वाली स्थितियों में समीक्षा की तारीख़ तय होती है।
  4. प्रतिशत से असहमत? राज्य द्वारा अधिसूचित अपीलीय चिकित्सा प्राधिकारी के पास अपील कर सकते हैं। अस्पताल से फ़ॉर्म और समय-सीमा पूछें।

क़दम दर क़दम: अधिकार से इनकार होने पर

  1. लिखित में माँगें। RPwD एक्ट का हवाला देते हुए ईमेल करें या पत्र दें कि कौन-सी सुविधा या लाभ चाहिए। कॉपी रखें और तारीख़ नोट करें।
  2. शिकायत निवारण अधिकारी (GRO)। प्रतिष्ठान के GRO को शिकायत करें, जिसे शिकायत दर्ज कर नियमों में तय समय में कार्रवाई करनी होगी।
  3. राज्य दिव्यांगजन आयुक्त धारा 80, RPwD एक्ट, या केंद्रीय संस्थाओं के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मुख्य आयुक्त। ये जाँच कर सकते हैं, काग़ज़ तलब कर सकते हैं और कार्रवाई की सिफ़ारिश कर सकते हैं। कई ईमेल से शिकायत लेते हैं।
  4. पुलिस। दिव्यांग व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से अपमानित या डराना, मारपीट, आश्रित व्यक्ति को खाना-पानी न देना, या यौन शोषण धारा 92, RPwD एक्ट के तहत अपराध है, जिसमें छह महीने से पाँच साल तक की जेल है। आपात स्थिति में 112 पर कॉल करें।
  5. अदालत। अपराधों की सुनवाई हर ज़िले में नामित विशेष अदालत करती है धारा 84, RPwD एक्ट। अधिकारों से इनकार पर आप हाई कोर्ट भी जा सकते हैं। मुफ़्त क़ानूनी सहायता वकील के लिए 15100 पर कॉल करें; दिव्यांगजन आय चाहे जो हो, पात्र हैं।
उदाहरण

अर्जुन, जिसे 60 प्रतिशत चलने-फिरने की दिव्यांगता है, को एक निजी कॉलेज ने कहा कि केमिस्ट्री लैब दूसरी मंज़िल पर है "इसलिए वह कोई और कोर्स चुन ले"। उसने RPwD एक्ट का हवाला देते हुए प्रिंसिपल को लिखा और क्लास या लैब सत्र भूतल पर कराने को कहा। दो हफ़्ते में जवाब न आने पर उसने अपने UDID कार्ड और पत्र के साथ राज्य दिव्यांगजन आयुक्त को ईमेल किया। आयुक्त कार्यालय ने कॉलेज को नोटिस भेजा, कॉलेज ने प्रैक्टिकल सत्र नीचे शिफ़्ट किए और उसे दाख़िला दिया।

ये तैयार रखें

  • दिव्यांगता प्रमाणपत्र या UDID कार्ड (और उस पर लिखा प्रतिशत)।
  • पहचान प्रमाण, पते का प्रमाण, फ़ोटो।
  • मेडिकल रिकॉर्ड और पहले की जाँचें।
  • सुविधा के लिए आपका लिखित अनुरोध और जवाब (अगर आया हो), तारीख़ों के साथ।
  • नौकरी के दावों के लिए: नियुक्ति पत्र, रिक्ति की सूचना और आरक्षित पद दिखाने वाला रोस्टर।
सावधान

यह न मान लें कि लेखक, अतिरिक्त समय या रैंप माँगने के लिए 40 प्रतिशत दिव्यांगता चाहिए। उचित सुविधा हर दिव्यांग व्यक्ति पर लागू है; 40 प्रतिशत का बेंचमार्क सिर्फ़ आरक्षण और कुछ योजनाओं के लिए है। और हमेशा लिखित में माँगें: मौखिक अनुरोध से बाद में मुकरना आसान है।

कहाँ जाएँ

  • प्रमाणपत्र और UDID कार्ड: swavlambancard.gov.in; ज़िला अस्पताल; ज़िला समाज कल्याण कार्यालय।
  • संस्था के भीतर: उसका शिकायत निवारण अधिकारी या समान अवसर प्रकोष्ठ।
  • राज्य दिव्यांगजन आयुक्त राज्य की राजधानी में; केंद्रीय संस्थाओं के लिए मुख्य आयुक्त (ccpd.nic.in)।
  • योजनाएँ और नीति: दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, depwd.gov.in; शिकायतें pgportal.gov.in पर।
  • अपराध या आपात स्थिति: 112। मानसिक स्वास्थ्य सहायता: टेली-मानस 14416। मुफ़्त वकील: NALSA 15100।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

RPwD एक्ट में कौन-सी दिव्यांगताएँ शामिल हैं?

इक्कीस निर्दिष्ट दिव्यांगताएँ, जिनमें चलने-फिरने की दिव्यांगता, दृष्टिहीनता और कम दृष्टि, श्रवण बाधा, वाणी और भाषा की दिव्यांगता, बौद्धिक दिव्यांगता, विशिष्ट सीखने की दिव्यांगताएँ, ऑटिज़्म, मानसिक रोग, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, पार्किंसन, हीमोफ़ीलिया, थैलेसीमिया, सिकल सेल रोग, एसिड हमले की चोटें और बहु-दिव्यांगता शामिल हैं। केंद्र सरकार सूची में जोड़ सकती है।

दिव्यांगता प्रमाणपत्र या UDID कार्ड कैसे बनवाएँ?

UDID पोर्टल (swavlambancard.gov.in) पर या अपने ज़िला अस्पताल में फ़ोटो, पहचान और पते के प्रमाण और मेडिकल काग़ज़ों के साथ आवेदन करें। सरकारी मेडिकल बोर्ड जाँच कर प्रतिशत तय करता है। फिर कार्ड डाउनलोड किया जा सकता है और यह पूरे भारत में मान्य है। जाँच से असहमत हों तो राज्य द्वारा अधिसूचित अपीलीय प्राधिकारी के पास अपील करें।

क्या निजी कंपनी दिव्यांगता की वजह से मुझे नौकरी देने से मना कर सकती है?

4 प्रतिशत आरक्षण सरकारी प्रतिष्ठानों पर लागू है, पर भेदभाव न करने और उचित सुविधा देने की ज़िम्मेदारी निजी प्रतिष्ठानों पर भी है। हर निजी प्रतिष्ठान को समान अवसर नीति रखनी होगी और 20 या ज़्यादा कर्मचारी होने पर शिकायत निवारण अधिकारी भी। GRO को, फिर राज्य आयुक्त को शिकायत करें।

दिव्यांग हो जाने पर क्या मुझे सरकारी नौकरी से हटाया जा सकता है?

नहीं। धारा 20, RPwD एक्ट के तहत सरकारी प्रतिष्ठान सेवा के दौरान दिव्यांग हुए कर्मचारी को न निकाल सकता है, न पदावनत कर सकता है। उसी पद पर काम न कर पाएँ तो उसी वेतन पर उपयुक्त पद देना होगा, या पद उपलब्ध होने तक अधिसंख्य (supernumerary) पद पर रखना होगा।

क्या मानसिक रोग एक्ट के तहत दिव्यांगता है?

हाँ। मानसिक रोग निर्दिष्ट दिव्यांगताओं में से एक है, इसलिए प्रमाणित मानसिक रोग वाले व्यक्ति को भेदभाव से सुरक्षा, सुविधा और 40 प्रतिशत या ज़्यादा पर आरक्षण के वही अधिकार हैं। मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 इलाज और भर्ती में और अधिकार जोड़ता है। टेली-मानस (14416) मुफ़्त परामर्श देता है।

यह लेख जागरूकता के लिए सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। अपनी स्थिति के लिए किसी वकील से सलाह लें या मुफ़्त क़ानूनी सहायता के लिए 15100 पर कॉल करें।

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