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A construction worker cutting steel at a site in Delhiस्वतंत्रता

फ़ोटो: Ramesh Lalwani, Wikimedia Commons, CC BY 2.0. सांकेतिक चित्र.

संगठन बनाने की आज़ादी: यूनियन और संस्थाएँ बनाने का आपका अधिकार

न्याय पाठशाला8 मिनट✓ समीक्षा और अद्यतन: अक्टूबर 2026Read in English

अनुच्छेद 19(1)(c): यूनियन, सोसाइटी, ट्रस्ट या NGO कैसे बनाएँ और पंजीकृत कराएँ, राज्य क्या रोक सकता है, और जुड़ने की सज़ा मिले तो क्या करें।

क़ानून: अनुच्छेद 19(1)(c) और 19(4), भारत का संविधान · औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 · सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860

संक्षेप में

  • अनुच्छेद 19(1)(c) हर नागरिक को संगठन (association), यूनियन और सहकारी समिति बनाने का अधिकार देता है, और किसी में ज़बरदस्ती शामिल न किए जाने का अधिकार भी।
  • राज्य इसे सिर्फ़ अनुच्छेद 19(4) के आधारों पर रोक सकता है: भारत की संप्रभुता और अखंडता, सार्वजनिक व्यवस्था और नैतिकता। हड़ताल या सामूहिक सौदेबाज़ी का अधिकार इसका हिस्सा नहीं है; वे श्रम क़ानून से आते हैं।
  • ट्रेड यूनियनें अब औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 (21 नवंबर 2025 से लागू) से चलती हैं: सात सदस्य आवेदन कर सकते हैं, और कम से कम 10 प्रतिशत कामगार या 100 कामगार सदस्य होने चाहिए।
  • यूनियन में शामिल होने की सज़ा मिले तो रिकॉर्ड रखें और श्रम विभाग में शिकायत करें; रजिस्ट्रार या राज्य आपके समूह को अनुचित रूप से रोके तो लिखित कारण माँगें और हाई कोर्ट रिट पर विचार करें।

किसान सहकारी समितियाँ बनाते हैं, मज़दूर यूनियन, निवासी कल्याण संघ, और दोस्त क्लब, NGO या अध्ययन-मंडल। लोग अकेले से ज़्यादा मिलकर हासिल करते हैं, और संविधान इस तरह साथ आने के आपके अधिकार की रक्षा करता है। यह गाइड बताती है कि यह अधिकार क्या-क्या ढकता है, समूह कैसे पंजीकृत कराएँ, और कोई आपको रोके तो क्या करें।

संविधान क्या कहता है

अनुच्छेद 19(1)(c) हर नागरिक को "संगम या संघ या सहकारी समितियाँ बनाने" का अधिकार देता है। सहकारी समितियाँ 2011 में 97वें संशोधन से जोड़ी गईं। अदालतों ने इस अधिकार में समूह शुरू करना, उसमें शामिल होना, उसमें बने रहना, और शामिल न होने की आज़ादी भी शामिल मानी है। Damyanti Naranga v. Union of India (1971) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क़ानून मौजूदा सदस्यों की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ किसी संगठन में नए सदस्य ठूँस नहीं सकता, क्योंकि इससे वह समूह ही बदल जाता है जिसे उन्होंने चुना था।

राज्य इस अधिकार को सिर्फ़ ऐसे क़ानून से रोक सकता है जो उचित हो और अनुच्छेद 19(4) के आधारों पर टिका हो: भारत की संप्रभुता और अखंडता, सार्वजनिक व्यवस्था, या नैतिकता। अदालतें जाँचती हैं कि पाबंदी सचमुच ज़रूरी है या नहीं और ज़रूरत से ज़्यादा तो नहीं।

यह अधिकार क्या नहीं देता

  • हड़ताल या सौदेबाज़ी का अपने आप अधिकार नहीं। All India Bank Employees' Association v. National Industrial Tribunal (1962) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यूनियन बनाने के अधिकार के साथ सामूहिक सौदेबाज़ी (collective bargaining) या हड़ताल का मौलिक अधिकार नहीं आता। वे अधिकार सामान्य श्रम क़ानूनों से आते हैं और नियंत्रित किए जा सकते हैं। T.K. Rangarajan v. Government of Tamil Nadu (2003) में अदालत ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों को हड़ताल का मौलिक अधिकार नहीं है।
  • सशस्त्र बल और पुलिस। अनुच्छेद 33 के तहत संसद सशस्त्र बलों, पुलिस और ऐसी सेवाओं के सदस्यों के लिए यह अधिकार सीमित कर सकती है।
  • ग़ैरक़ानूनी संगठन। ग़ैरक़ानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (UAPA) के तहत ग़ैरक़ानूनी घोषित समूह में शामिल होना या उसका समर्थन नहीं किया जा सकता; सदस्यता अपराध हो सकती है। घोषणा ख़ुद एक ट्रिब्यूनल के सामने जाती है और उसे चुनौती दी जा सकती है।
सुझावअनौपचारिक समूह के रूप में मिलने से आपको कोई नहीं रोक सकता। पंजीकरण तभी चाहिए जब आपको क़ानूनी पहचान चाहिए: बैंक खाता, अनुबंध करने की शक्ति, अनुदान पाना, या समूह के नाम से मुकदमा करना।

औद्योगिक संबंध संहिता में ट्रेड यूनियन

औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 ने ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926, औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 और स्थायी आदेश अधिनियम, 1946 की जगह ली। यह 21 नवंबर 2025 को लागू हुई, इसलिए कुछ राज्यों के नियम अभी नए हैं। मुख्य बातें:

  • पंजीकरण। सात या ज़्यादा सदस्य अपने राज्य के ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार को यूनियन का नाम, नियम, कार्यालय का पता और पदाधिकारियों के साथ आवेदन दे सकते हैं। आवेदन की तारीख़ पर यूनियन में उस प्रतिष्ठान या उद्योग के कम से कम 10 प्रतिशत कामगार या 100 कामगार, जो भी कम हो, सदस्य होने चाहिए।
  • वार्ताकार यूनियन। प्रतिष्ठान में एक ही पंजीकृत यूनियन हो तो नियोक्ता को उसे एकमात्र वार्ताकार यूनियन (sole negotiating union) मानना होगा। कई हों तो जिसमें 51 प्रतिशत या ज़्यादा कामगार सदस्य हों, वह मान्य होती है; वरना कम से कम 20 प्रतिशत सदस्यता वाली यूनियनों से वार्ता परिषद बनती है।
  • हड़ताल। किसी भी औद्योगिक प्रतिष्ठान के कामगारों को हड़ताल से कम से कम 14 दिन पहले नोटिस देना होगा। नोटिस 60 दिन तक वैध रहता है। सुलह (conciliation) के दौरान और उसके बाद कुछ समय तक, या मामला ट्रिब्यूनल में हो तब, हड़ताल की अनुमति नहीं है।
  • सुरक्षा। यूनियन बनाने या उसमें शामिल होने की सज़ा देना संहिता में अनुचित श्रम व्यवहार (unfair labour practice) है। शिकायत सुलह अधिकारी के पास और हल न हो तो औद्योगिक ट्रिब्यूनल में जाती है।
  • पंजीकरण से इनकार लिखित और कारण सहित होना चाहिए, और संहिता में ट्रिब्यूनल में अपील का प्रावधान है।

संहिता के नियम केंद्र और राज्य दोनों बनाते हैं, इसलिए फ़ॉर्म, फ़ीस और समय-सीमा अलग-अलग हैं। अपने राज्य के श्रम विभाग की वेबसाइट देखें।

समूह पंजीकृत कराने के दूसरे रास्ते

  • सोसाइटी। सात या ज़्यादा व्यक्ति सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 या राज्य के सोसाइटी क़ानून में पंजीकरण करा सकते हैं, ज्ञापन (नाम, उद्देश्य, शासी निकाय) और नियमों के साथ। अपने राज्य या ज़िले के सोसाइटी रजिस्ट्रार को आवेदन दें। फ़ीस कम है और राज्य के हिसाब से अलग है।
  • ट्रस्ट। ज़्यादातर परोपकार के लिए। ट्रस्ट डीड से बनता है, सब-रजिस्ट्रार के यहाँ पंजीकृत; कुछ राज्यों में चैरिटी कमिश्नर के यहाँ भी पंजीकरण ज़रूरी है।
  • सहकारी समिति। राज्य सहकारी क़ानून में सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार के यहाँ, या कई राज्यों में फैले समूह के लिए बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम में।
  • धारा 8 कंपनी। कंपनी अधिनियम, 2013 में ग़ैर-लाभकारी कंपनी, कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय में ऑनलाइन पंजीकृत। काग़ज़ी काम ज़्यादा, पर बड़े NGO के लिए सबसे भरोसेमंद।

विदेशी चंदा लेने के लिए विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 (FCRA) में अलग पंजीकरण चाहिए; उसके बिना विदेशी धन न लें।

क़दम दर क़दम: अगर आपके अधिकार का उल्लंघन हो

  1. लिख लें। तारीख़ें, नाम, क्या कहा या किया गया, और नोटिस, तबादला आदेश, संदेश या बर्ख़ास्तगी पत्र की प्रतियाँ।
  2. काम की जगह: पहले नियोक्ता को लिखित शिकायत दें, फिर श्रम विभाग के सुलह अधिकारी को। केंद्रीय क्षेत्र के प्रतिष्ठानों के लिए samadhan.labour.gov.in पर या अपने राज्य के श्रम कार्यालय में शिकायत दर्ज करें।
  3. रजिस्ट्रार के यहाँ: पंजीकरण से इनकार हो या देरी हो तो लिखित कारण माँगें और संबंधित अधिनियम की अपील का इस्तेमाल करें। अपने आवेदन की पावती रखें।
  4. राज्य के ख़िलाफ़: पुलिस या अधिकारी वैध बैठक रोकें, बिना कारण अनुमति न दें या आपके समूह को निशाना बनाएँ, तो अनुच्छेद 226 में हाई कोर्ट में रिट याचिका (writ petition) उपाय है।
  5. मदद लें। मुफ़्त क़ानूनी सहायता के लिए 15100 पर कॉल करें, ख़ासकर अगर आप दिहाड़ी या ठेका कामगार हैं।
उदाहरण

रमेश 180 कामगारों वाली गारमेंट यूनिट में काम करते हैं। उनमें से बारह सुरक्षा शिकायतों के लिए यूनियन चाहते हैं। वे संहिता देखते हैं: आवेदन के लिए सात सदस्य और आवेदन की तारीख़ पर कम से कम 18 सदस्य (180 का 10 प्रतिशत) चाहिए। वे 25 सदस्य बनाते हैं, सरल नियम अपनाते हैं, पदाधिकारी चुनते हैं और राज्य के ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार को आवेदन देते हैं। एक हफ़्ते बाद सुपरवाइज़र रमेश को नाइट शिफ़्ट में डाल देता है और दो अन्य को चेतावनी देता है। रमेश शिफ़्ट आदेश और चेतावनी के संदेश सँभालकर रखते हैं, और यूनियन सुलह अधिकारी के पास अनुचित श्रम व्यवहार की शिकायत दर्ज करती है। रिकॉर्ड देखकर नियोक्ता तबादला वापस ले लेता है।

ये तैयार रखें

  • समूह का ज्ञापन और नियम, संस्थापक सदस्यों के नाम, पते और दस्तख़त के साथ।
  • उस बैठक की कार्यवाही जिसमें नियम अपनाए गए और पदाधिकारी चुने गए।
  • पदाधिकारियों का पहचान और पता प्रमाण; पंजीकृत कार्यालय के पते का प्रमाण।
  • यूनियन के लिए: तारीख़ सहित सदस्यता सूची और 10 प्रतिशत या 100 की कसौटी के लिए कामगारों का विवरण।
  • उत्पीड़न हो तो: नोटिस, तबादला या बर्ख़ास्तगी पत्र, संदेश और गवाहों के नाम।
सावधान

यूनियन बनाना संरक्षित है; संहिता के 14 दिन के नोटिस के बिना हड़ताल करना नहीं, और इससे कामगारों की मज़दूरी और क़ानूनी सुरक्षा जा सकती है। साथ ही, अपंजीकृत यूनियन को मान्यता पाने या ट्रिब्यूनल में सदस्यों का प्रतिनिधित्व करने की क़ानूनी हैसियत नहीं होती।

कहाँ जाएँ

  • अपने राज्य के ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार, सोसाइटी रजिस्ट्रार या सहकारी समिति रजिस्ट्रार, जैसा मामला हो।
  • उत्पीड़न और विवादों के लिए श्रम विभाग का सुलह अधिकारी और औद्योगिक ट्रिब्यूनल; केंद्रीय क्षेत्र की शिकायतें samadhan.labour.gov.in पर।
  • वैध समूह को निशाना बनाने वाली राज्य कार्रवाई के ख़िलाफ़ अनुच्छेद 226 में हाई कोर्ट रिट याचिका।
  • मुफ़्त क़ानूनी सहायता 15100 (NALSA); अधिकारियों के ख़िलाफ़ शिकायत pgportal.gov.in पर।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या नियोक्ता यूनियन में शामिल होने पर मुझे निकाल सकता है?

नहीं। यूनियन बनाने या उसमें शामिल होने पर कामगार को निकालना, तबादला करना या धमकाना औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 में अनुचित श्रम व्यवहार है। लिखित सबूत रखें और सुलह अधिकारी को शिकायत करें; औद्योगिक ट्रिब्यूनल बहाली और बक़ाया वेतन का आदेश दे सकता है। प्रबंधकीय कर्मचारी संहिता की "कामगार" परिभाषा से बाहर हो सकते हैं, इसलिए अपनी स्थिति जाँचें।

यूनियन या सोसाइटी पंजीकृत कराने के लिए कितने लोग चाहिए?

ट्रेड यूनियन के लिए सात या ज़्यादा आवेदक, और कम से कम 10 प्रतिशत कामगारों या 100 कामगारों, जो भी कम हो, की सदस्यता। सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 में सोसाइटी के लिए सात या ज़्यादा व्यक्ति। ट्रस्ट एक व्यक्ति भी ट्रस्ट डीड से बना सकता है।

क्या हड़ताल का अधिकार मौलिक अधिकार है?

नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने 1962 और फिर 2003 में कहा कि हड़ताल का अधिकार अनुच्छेद 19(1)(c) का हिस्सा नहीं है। यह औद्योगिक संबंध संहिता में एक क़ानूनी अधिकार है, जो 14 दिन के नोटिस और अन्य शर्तों के अधीन है। सरकारी कर्मचारी अपने सेवा नियमों से बँधे हैं, जो आम तौर पर हड़ताल पर रोक लगाते हैं।

क्या पुलिस हमारे संगठन की बैठक रोक सकती है?

सिर्फ़ वैध आदेश के तहत, जैसे धारा 163 BNSS की निषेधाज्ञा, या बैठक हिंसक हो जाए या सार्वजनिक सड़क रोक दे। निजी हॉल में शांतिपूर्ण बैठक के लिए अनुमति नहीं चाहिए। फिर भी पुलिस रोके तो लिखित आदेश माँगें, नाम नोट करें, और मजिस्ट्रेट या हाई कोर्ट में चुनौती दें।

यह लेख जागरूकता के लिए सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। अपनी स्थिति के लिए किसी वकील से सलाह लें या मुफ़्त क़ानूनी सहायता के लिए 15100 पर कॉल करें।

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