Englishफ़ॉलो करें:
A fountain pen writing on paperश्रम

फ़ोटो: Free-Photos, Wikimedia Commons, CC0. सांकेतिक चित्र.

बीमा दावा ख़ारिज हुआ? उसे कैसे चुनौती दें

न्याय पाठशाला6 मिनट✓ समीक्षा और अद्यतन: अक्टूबर 2026Read in English

कारण माँगें, बीमा कंपनी और बीमा भरोसा पर शिकायत करें, फिर मुफ़्त बीमा लोकपाल (₹50 लाख तक, एक साल के अंदर) या उपभोक्ता आयोग जाएँ।

क़ानून: धारा 45, बीमा अधिनियम, 1938 · बीमा लोकपाल नियम, 2017 · उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019

संक्षेप में

  • ख़ारिज करने का पत्र आख़िरी फ़ैसला नहीं है। बीमा कंपनी को लिखित में ठोस कारण देने होते हैं; सही क्लॉज़ और इस्तेमाल हुए दस्तावेज़ माँगें।
  • पहले कंपनी के शिकायत अधिकारी से शिकायत करें (IRDAI के बीमा भरोसा पोर्टल पर ट्रैक कर सकते हैं)। 30 दिन में जवाब न आए या आप असंतुष्ट हों, तो बीमा लोकपाल (Insurance Ombudsman) के पास जाएँ।
  • लोकपाल मुफ़्त है, वकील की ज़रूरत नहीं, और ₹50 लाख तक के दावे सुनता है। कंपनी के इनकार या जवाब के एक साल के अंदर शिकायत करें।
  • तीन साल से चल रही जीवन बीमा पॉलिसी पर किसी भी आधार पर, जानकारी छिपाने पर भी, सवाल नहीं उठाया जा सकता धारा 45 बीमा अधिनियम। स्वास्थ्य पॉलिसियों में भी ऐसी ही पाँच साल (60 महीने) की सुरक्षा है, साबित धोखाधड़ी को छोड़कर।

लोग बीमा अपने सबसे बुरे दिनों के लिए लेते हैं: अस्पताल, दुर्घटना, परिवार में मौत। ठीक उसी समय दावा ख़ारिज हो जाए तो परिवार को उधार लेना या कुछ बेचना पड़ता है। आम खोज होती है "हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट हो गया क्या करें" और "बीमा लोकपाल में शिकायत कैसे करें"। यह लेख दोनों का जवाब क़दम दर क़दम देता है।

दावे क्यों ख़ारिज होते हैं, और कब यह ग़लत है

  • "जानकारी छिपाना" (non-disclosure)। कंपनी कहती है कि पॉलिसी लेते समय आपने कोई बीमारी, आदत या पुरानी पॉलिसी छिपाई। यह सबसे ज़्यादा विवाद वाला आधार है। जिस बीमारी का आपको पता ही नहीं था, या जिसका दावे से कोई संबंध नहीं, वह अक्सर उचित आधार नहीं होती।
  • अपवाद और प्रतीक्षा अवधि (exclusions, waiting period)। पॉलिसियाँ कुछ इलाज बाहर रखती हैं और पहले से मौजूद बीमारियाँ एक प्रतीक्षा अवधि के बाद ही कवर करती हैं। देखें कि क्लॉज़ सचमुच आपके इलाज पर लागू होता है या नहीं।
  • देर से सूचना या काग़ज़ों की कमी। अदालतों और लोकपालों ने अक्सर माना है कि असली दावा सिर्फ़ थोड़ी देर से सूचना के कारण ख़ारिज नहीं होना चाहिए, अगर देरी का कारण बताया गया हो।
  • लैप्स पॉलिसी। ग्रेस पीरियड देखें: IRDAI के स्वास्थ्य नियमों में सालाना, छमाही और तिमाही प्रीमियम पर 30 दिन, और मासिक पर 15 दिन।

क़ानून की सुरक्षा

जीवन बीमा: तीन साल का नियम

धारा 45, बीमा अधिनियम, 1938 के तहत पॉलिसी जारी होने, जोखिम शुरू होने, पुनर्जीवित (revival) होने या राइडर जुड़ने की तारीख़, जो सबसे बाद की हो, से तीन साल बाद जीवन बीमा पॉलिसी पर किसी भी आधार पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। तीन साल के अंदर कंपनी धोखाधड़ी या महत्वपूर्ण तथ्य के ग़लत बयान के आधार पर सिर्फ़ लिखित में कारण बताकर ही इनकार कर सकती है। अगर आप साबित करें कि बयान आपकी पूरी जानकारी में सच था और छिपाने का कोई इरादा नहीं था, तो धोखाधड़ी का आरोप नहीं चलेगा।

स्वास्थ्य बीमा: IRDAI का 2024 मास्टर सर्कुलर

  • मोरेटोरियम (moratorium)। 60 महीने लगातार कवर के बाद जानकारी छिपाने या ग़लत बयान के आधार पर पॉलिसी या दावे पर सवाल नहीं उठ सकता, साबित धोखाधड़ी को छोड़कर।
  • कैशलेस में तेज़ी। कंपनी को कैशलेस अनुरोध पर एक घंटे में फ़ैसला करना है, और अस्पताल के अनुरोध के तीन घंटे में डिस्चार्ज की अंतिम मंज़ूरी देनी है।
  • समीक्षा के बिना इनकार नहीं। दावा सिर्फ़ कंपनी की दावा समीक्षा समिति (claims review committee) की मंज़ूरी से ख़ारिज हो सकता है।
  • भाग-दौड़ नहीं। दस्तावेज़ अस्पताल से कंपनी या TPA (दावे निपटाने वाला थर्ड-पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर) को ख़ुद लेने हैं, आपको नहीं दौड़ाना।
  • नवीनीकरण। सिर्फ़ इसलिए कि आपने पहले दावा किया था, पॉलिसी का नवीनीकरण मना नहीं किया जा सकता।

क़दम दर क़दम: इनकार को चुनौती

  1. इनकार का पत्र ध्यान से पढ़ें। बताया गया क्लॉज़ नोट करें। पत्र अस्पष्ट हो तो लिखकर सही क्लॉज़, कारण, और आपके ख़िलाफ़ इस्तेमाल हुए दस्तावेज़ों (जैसे प्रस्ताव फ़ॉर्म और जाँच रिपोर्ट) की कॉपी माँगें।
  2. कंपनी के शिकायत अधिकारी से शिकायत करें। पॉलिसी और दावा नंबर दें और बिंदुवार दस्तावेज़ों के साथ बताएँ कि इनकार क्यों ग़लत है। आप इसे IRDAI के शिकायत पोर्टल बीमा भरोसा पर भी दर्ज कर सकते हैं, जो इसे कंपनी को भेजता है और आप ट्रैक कर सकते हैं।
  3. बीमा लोकपाल के पास जाएँ। अगर कंपनी शिकायत ठुकरा दे, असंतोषजनक जवाब दे, या 30 दिन में जवाब न दे, तो बीमा लोकपाल नियम, 2017 के तहत शिकायत करें। कंपनी के अंतिम जवाब के एक साल के अंदर। दावा ₹50 लाख तक का होना चाहिए। बीमा लोकपाल परिषद की वेबसाइट (cioins.co.in) पर ऑनलाइन, या अपने इलाक़े के लोकपाल कार्यालय में पत्र या ईमेल से, दस्तावेज़ों की कॉपी के साथ आवेदन करें। कोई फ़ीस नहीं।
  4. सुनवाई में जाएँ। लोकपाल पहले मध्यस्थता की कोशिश करता है। न हो तो वह अवॉर्ड देता है, आमतौर पर पूरी शिकायत मिलने के तीन महीने में। अवॉर्ड कंपनी पर बाध्यकारी है, जिसे 30 दिन में पालन करना होता है; IRDAI के 2024 स्वास्थ्य सर्कुलर के तहत समय पर अवॉर्ड लागू न करने वाली कंपनी को पॉलिसीधारक को ₹5,000 प्रतिदिन देने होंगे।
  5. या उपभोक्ता आयोग जाएँ। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत ग़लत इनकार "सेवा में कमी" है। इनकार के दो साल के अंदर शिकायत करें। ₹50 लाख तक के दावे ज़िला आयोग, ₹50 लाख से ₹2 करोड़ तक राज्य आयोग, और ₹2 करोड़ से ऊपर राष्ट्रीय आयोग में। ई-जागृति (e-Jagriti) पोर्टल पर ऑनलाइन दाख़िल कर सकते हैं, और राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 मार्गदर्शन देती है।
सुझावएक ही मंच चुनें। अगर वही शिकायत उपभोक्ता आयोग या अदालत में ले गए, तो लोकपाल उसे नहीं सुनेगा। ₹50 लाख से कम के ज़्यादातर दावों में लोकपाल तेज़ और आसान है; बड़े दावों में, या जब आप ख़र्च और ज़्यादा मुआवज़ा भी चाहते हों, उपभोक्ता आयोग बेहतर है।
उदाहरण

कविता के पिता की बाईपास सर्जरी पर ₹4.2 लाख ख़र्च हुए। कंपनी ने दावा यह कहकर ख़ारिज किया कि पॉलिसी लेते समय उन्होंने "हाई ब्लड प्रेशर" छिपाया था। लेकिन पॉलिसी छह साल से चल रही थी। कविता ने शिकायत अधिकारी को IRDAI के 60 महीने के मोरेटोरियम का हवाला देकर और नवीनीकरण रसीदें लगाकर लिखा। 30 दिन में जवाब न आने पर उसने ऑनलाइन बीमा लोकपाल के पास शिकायत की। सुनवाई में कंपनी कोई धोखाधड़ी नहीं दिखा सकी, और लोकपाल ने पूरा दावा चुकाने का निर्देश दिया।

ये तैयार रखें

  • पॉलिसी दस्तावेज़, प्रस्ताव फ़ॉर्म की कॉपी, और सभी प्रीमियम व नवीनीकरण रसीदें।
  • दावा फ़ॉर्म, अस्पताल के बिल, डिस्चार्ज समरी, पर्चे और जाँच रिपोर्ट।
  • मृत्यु दावे में: मृत्यु प्रमाणपत्र, मृत्यु के चिकित्सीय कारण का प्रमाणपत्र, और दुर्घटना हो तो FIR और पोस्टमार्टम रिपोर्ट।
  • इनकार का पत्र और कंपनी या TPA के साथ हर ईमेल या पत्र।
सावधान

प्रस्ताव फ़ॉर्म एजेंट से न भरवाएँ। "जानकारी छिपाने" के ज़्यादातर इनकार उसी फ़ॉर्म से निकलते हैं जिसमें किसी और ने हर बीमारी के आगे "नहीं" भर दिया। फ़ॉर्म ख़ुद भरें, ईमानदारी से बताएँ, और कॉपी रखें।

कहाँ जाएँ

  • पहले: बीमा कंपनी का शिकायत निवारण अधिकारी (विवरण पॉलिसी और कंपनी की वेबसाइट पर)।
  • साथ में: IRDAI का बीमा भरोसा पोर्टल, bimabharosa.irdai.gov.in।
  • फिर: आपके इलाक़े का बीमा लोकपाल (बीमा लोकपाल परिषद, cioins.co.in के ज़रिए), ₹50 लाख तक के दावों के लिए।
  • या: उपभोक्ता आयोग; मार्गदर्शन 1915 या consumerhelpline.gov.in पर।
  • मुफ़्त क़ानूनी मदद: 15100।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बीमा लोकपाल के पास शिकायत की समय-सीमा क्या है?

कंपनी द्वारा आपकी शिकायत ठुकराने या अंतिम जवाब देने की तारीख़ से एक साल। पहले कंपनी से शिकायत करनी होती है और जवाब के लिए 30 दिन तक इंतज़ार करना होता है। दावे की राशि ₹50 लाख से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए।

क्या कंपनी ऐसी बीमारी के आधार पर दावा ख़ारिज कर सकती है जो मैंने नहीं बताई?

जीवन बीमा में, जारी होने या पुनर्जीवित होने के तीन साल बाद नहीं (धारा 45 बीमा अधिनियम)। स्वास्थ्य बीमा में, 60 महीने लगातार कवर के बाद नहीं, साबित धोखाधड़ी को छोड़कर। उससे पहले कंपनी को दिखाना होगा कि तथ्य महत्वपूर्ण था और लिखित कारण देने होंगे।

क्या लोकपाल के लिए वकील चाहिए?

नहीं। आप ख़ुद, मुफ़्त, ऑनलाइन या पत्र से शिकायत कर सकते हैं, और सुनवाई में ख़ुद, या जहाँ कार्यालय यह सुविधा दे वहाँ वीडियो से, पेश हो सकते हैं। हर दस्तावेज़ की कॉपी और घटनाओं का छोटा लिखित क्रम साथ रखें।

क्या लोकपाल का फ़ैसला बाध्यकारी है?

यह कंपनी पर बाध्यकारी है, जिसे आपकी स्वीकृति मिलने के 30 दिन में पालन करना होता है। आप संतुष्ट न हों तो आप उससे बँधे नहीं हैं और फिर भी उपभोक्ता आयोग या अदालत जा सकते हैं।

यह लेख जागरूकता के लिए सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। अपनी स्थिति के लिए किसी वकील से सलाह लें या मुफ़्त क़ानूनी सहायता के लिए 15100 पर कॉल करें।

क्या यह लेख उपयोगी था?कोई ग़लती दिखी? हमें बताएँ

हर हफ़्ते एक सरल क़ानूनी लेख पाएँ

आपके अधिकारों पर नए लेख, सीधे आपके ईमेल पर। कोई स्पैम नहीं।