नवतेज जौहर के बाद भारत में LGBTQ+ अधिकार: क़ानून आपको क्या देता है
नवतेज जौहर (2018) ने क्या बदला, सुप्रियो (2023) ने क्या अधूरा छोड़ा, परिवार और पुलिस से सुरक्षा, संयुक्त बैंक खाता, जोड़े के रूप में तैयारी और मदद कहाँ मिलेगी।
संक्षेप में
- दो वयस्कों के बीच सहमति से समलैंगिक संबंध अपराध नहीं है। धारा 377 को Navtej Singh Johar (2018) में पढ़कर सीमित कर दिया गया और भारतीय न्याय संहिता (BNS) ने उसे दोबारा नहीं लिखा।
- पुलिस आपको समलैंगिक, लेस्बियन, बाइसेक्शुअल या क्वीयर होने पर गिरफ़्तार, धमका या "समझा" नहीं सकती, न आपको परिवार के पास लौटने को मजबूर कर सकती है। वयस्क जोड़े हाई कोर्ट से सुरक्षा पा सकते हैं।
- Supriyo (2023): मौजूदा क़ानून में समलैंगिक विवाह या संयुक्त गोद लेने का अधिकार नहीं; फ़ैसला संसद को करना है। पुनर्विचार याचिकाएँ जनवरी 2025 में ख़ारिज हुईं।
- आप संयुक्त बैंक खाता खोल सकते हैं और साथी को नॉमिनी बना सकते हैं (वित्त मंत्रालय की सलाह, अगस्त 2024)।
- धमकी, ब्लैकमेल या पहचान उजागर करना: 112, FIR, cybercrime.gov.in या 1930। मुफ़्त वकील: 15100।
150 से ज़्यादा सालों तक एक औपनिवेशिक क़ानून ने समान लिंग के वयस्कों के प्रेम को अपराध माना। बहुत लोग पुलिस, ब्लैकमेल करने वालों और अपने ही परिवार के डर में जिए। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे ख़त्म किया। पर अपराध-मुक्ति पूरी बराबरी नहीं है, और कुछ सवाल अब भी खुले हैं। इस लेख में बताया गया है कि क्या बदला, आज आप किस पर भरोसा कर सकते हैं, और धमकी मिलने पर क्या करें।
नवतेज जौहर में क्या तय हुआ
पुरानी भारतीय दंड संहिता की धारा 377 "प्रकृति के विरुद्ध शारीरिक संभोग" को दंडित करती थी। Navtej Singh Johar v Union of India (2018) में पाँच जजों की बेंच ने इसे उस हद तक असंवैधानिक माना जहाँ तक यह निजी तौर पर वयस्कों के सहमति से बने यौन संबंधों को अपराध बनाती थी। कोर्ट ने कहा कि यौन रुझान (sexual orientation) पहचान का स्वाभाविक हिस्सा है; इसे दंडित करना अनुच्छेद 14 की समानता, अनुच्छेद 15 के लिंग-भेदभाव निषेध, अनुच्छेद 19(1)(a) की अभिव्यक्ति और अनुच्छेद 21 की गरिमा व निजता का उल्लंघन है। कोर्ट ने Puttaswamy (2017) पर भरोसा किया, जिसने यौन रुझान समेत निजता को मौलिक अधिकार माना था।
1 जुलाई 2024 को जब BNS ने दंड संहिता की जगह ली, तो उसमें धारा 377 जैसा कोई प्रावधान नहीं रखा गया। वयस्कों के सहमति से बने संबंध अब सीधे-सीधे अपराध नहीं हैं।
आज आप किस पर भरोसा कर सकते हैं
- अपराध-मुक्ति। कोई पुलिस अधिकारी सहमति से बने वयस्क संबंध के लिए आप पर केस दर्ज नहीं कर सकता, न हिरासत में ले सकता है, न धमका सकता है। अगर कोई आपकी "पोल खोलने" की धमकी देकर पैसे माँगे, तो वह BNS के तहत जबरन वसूली (extortion) है, आपका रुझान चाहे जो हो।
- साथी चुनने और साथ रहने का अधिकार। साथी चुनना अनुच्छेद 21 की स्वतंत्रता का हिस्सा है। देश भर के हाई कोर्ट परिवार की धमकी झेल रहे वयस्क जोड़ों, समलैंगिक जोड़ों समेत, को नियमित रूप से पुलिस सुरक्षा का आदेश देते हैं। Supriyo में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस क्वीयर लोगों को परेशान न करे, न किसी वयस्क को जन्म के परिवार के पास लौटने को मजबूर करे।
- "कन्वर्ज़न थेरेपी" से आज़ादी। S. Sushma v Commissioner of Police (2021) में मद्रास हाई कोर्ट ने क्वीयर लोगों की सुरक्षा के लिए व्यापक निर्देश दिए, और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने तब से डॉक्टरों द्वारा कन्वर्ज़न थेरेपी को पेशेवर कदाचार माना है। ऐसी थेरेपी देने वाले डॉक्टर की शिकायत राज्य चिकित्सा परिषद में की जा सकती है।
- बैंकिंग। 28 अगस्त 2024 को वित्तीय सेवा विभाग ने सलाह जारी की कि क्वीयर व्यक्तियों के संयुक्त बैंक खाता खोलने या साथी को नॉमिनी बनाने पर कोई रोक नहीं है; RBI ने बैंकों को वैसा ही स्पष्टीकरण दिया।
- ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत अतिरिक्त क़ानूनी अधिकार हैं, जिसे 2026 में संशोधित किया गया; अक्टूबर 2026 तक संशोधन सुप्रीम कोर्ट में चुनौती के अधीन है (हमारा अलग लेख देखें)।
विवाह का फ़ैसला और बची हुई कमियाँ
Supriyo Chakraborty v Union of India (2023) में याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से समलैंगिक विवाह को मान्यता देने को कहा। पाँचों जजों ने माना कि विवाह का कोई मौलिक अधिकार नहीं है और कोर्ट विशेष विवाह अधिनियम, 1954 में समलैंगिक विवाह नहीं पढ़ सकता; यह संसद का काम है। 3:2 से कोर्ट ने सिविल यूनियन और अविवाहित क्वीयर जोड़ों के संयुक्त रूप से गोद लेने के अधिकार को भी मान्यता देने से मना किया। सभी जज सहमत थे कि क्वीयर लोगों से भेदभाव नहीं होना चाहिए, और केंद्र ने कोर्ट से कहा कि वह क्वीयर जोड़ों की व्यावहारिक समस्याओं, राशन कार्ड, संयुक्त खाते, चिकित्सा निर्णय, पेंशन और उत्तराधिकार, पर एक समिति बनाएगा। कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में वह समिति 2024 में बनी। पुनर्विचार याचिकाएँ जनवरी 2025 में ख़ारिज हुईं।
तो 2026 की स्थिति यह है:
- समलैंगिक जोड़े विवाह पंजीकृत नहीं करा सकते, न जोड़े के रूप में संयुक्त रूप से गोद ले सकते हैं (एक अकेला व्यक्ति गोद लेने के नियमों के तहत अपने नाम पर गोद ले सकता है)।
- निजी नौकरियों, आवास या सेवाओं में यौन रुझान पर आधारित भेदभाव के ख़िलाफ़ कोई सामान्य क़ानून नहीं है। कुछ नियोक्ताओं और राज्यों की अपनी नीतियाँ हैं।
- BNS में वयस्क पुरुष पर यौन हमले का कोई विशिष्ट अपराध नहीं है; चोट, ग़लत तरीक़े से बंद रखना और आपराधिक धमकी जैसे दूसरे अपराध फिर भी लागू होते हैं।
क़दम दर क़दम: अपनी और साथी की सुरक्षा
- तुरंत ख़तरा: 112 पर कॉल करें। अगर किसी महिला को बंद रखा जा रहा हो या ज़बरन शादी कराई जा रही हो, तो 181 भी मदद कर सकता है।
- परिवार या दूसरों की धमकी: जो कहा गया उसे लिख लें, संदेश और रिकॉर्डिंग रखें, और तथ्यों के मुताबिक़ आपराधिक धमकी, ग़लत तरीक़े से बंद रखने या जबरन वसूली की FIR दर्ज कराएँ। मुफ़्त कॉपी लें।
- सुरक्षा याचिका: वयस्क जोड़ा हाई कोर्ट में पुलिस सुरक्षा की याचिका दायर कर सकता है। क़ानूनी सहायता वकील और क्वीयर समूह ये नियमित रूप से करते हैं; दोनों साथियों की उम्र का प्रमाण साथ रखें।
- ऑनलाइन ब्लैकमेल या पहचान उजागर करने की धमकी: पैसे न दें। भेजने वाले के ब्योरे के साथ स्क्रीनशॉट सँभालें, साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट करें या 1930 पर कॉल करें, और FIR दर्ज कराएँ।
- जोड़े के रूप में काग़ज़ी तैयारी: पंजीकृत वसीयत, बैंक खातों, बीमा और भविष्य निधि में नामांकन, संयुक्त खाता, और साथी का नाम देते हुए लिखित चिकित्सा अधिकार-पत्र। वकील इन्हें एक दिन में बना सकता है।
- काम पर भेदभाव: कंपनी की शिकायत और उत्पीड़न-विरोधी नीति का लिखित इस्तेमाल करें; उत्पीड़न यौन हो तो यौन उत्पीड़न क़ानून की आंतरिक समिति महिलाओं पर लागू है और कई नियोक्ता इसे सब पर लागू करते हैं।
26 साल के रोहित और उसके साथी इंदौर से बेंगलुरु चले गए, जब रोहित के परिवार ने उसे "वापस लाने" की धमकी दी और एक रिश्तेदार उसके नियोक्ता को फ़ोन करने लगा। उन्होंने DLSA के ज़रिए एक क़ानूनी सहायता वकील से मुलाक़ात की, उम्र के प्रमाण और धमकी भरे संदेशों के साथ हाई कोर्ट में सुरक्षा याचिका दायर की, और स्थानीय पुलिस को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश मिला। रोहित ने वसीयत भी बनाई और बैंक खाते व बीमा में साथी को नॉमिनी बनाया, ताकि संकट में अस्पताल या बैंक उसे पहचाने।
ये तैयार रखें
- दोनों साथियों की उम्र और पहचान का प्रमाण (आधार, पासपोर्ट, स्कूल प्रमाणपत्र)।
- धमकियों के स्क्रीनशॉट, कॉल रिकॉर्डिंग और संदेश, तारीख़ों और नंबरों के साथ।
- किसी पुलिस शिकायत या FIR की कॉपी।
- वसीयत, नामांकन फ़ॉर्म, संयुक्त खाते के काग़ज़ और चिकित्सा अधिकार-पत्र।
- क़ानूनी सहायता वकील या स्थानीय क्वीयर सहायता समूह का संपर्क।
ब्लैकमेल करने वाले को पैसे देने से माँगें कभी ख़त्म नहीं होतीं। जबरन वसूली और निजी तस्वीरें सार्वजनिक करने की धमकी BNS में अपराध हैं, आपका रुझान चाहे जो हो, और सहमति से बने वयस्क संबंध के लिए पुलिस आपके ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं कर सकती। जल्दी रिपोर्ट करें, और थाने से अपनी पहचान गोपनीय रखने को कहें।
अस्पताल और बैंक वादों से नहीं, काग़ज़ से चलते हैं। वसीयत, नामांकन और चिकित्सा अधिकार-पत्र में ख़र्च कम है और ये ज़रूरत के वक़्त आपके साथी की स्थिति साफ़ कर देते हैं।
कहाँ जाएँ
- आपात स्थिति: 112; ख़तरे में महिला: 181।
- पुलिस: FIR के लिए स्थानीय थाना; मना करने पर पुलिस अधीक्षक या आयुक्त को लिखित शिकायत।
- ऑनलाइन धमकी: cybercrime.gov.in या 1930।
- परिवार से सुरक्षा: क़ानूनी सहायता वकील के ज़रिए हाई कोर्ट; NALSA 15100, nalsa.gov.in।
- मानसिक स्वास्थ्य सहायता: टेली-मानस 14416। मानवाधिकार शिकायतें: nhrc.nic.in।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या भारत में समलैंगिकता क़ानूनी है?
हाँ। Navtej Singh Johar (2018) के बाद से समान लिंग के वयस्कों के बीच सहमति से यौन संबंध अपराध नहीं हैं, और जुलाई 2024 से लागू भारतीय न्याय संहिता में पुरानी धारा 377 जैसा कोई प्रावधान नहीं है। सहमति से बने वयस्क संबंध के लिए पुलिस आप पर केस दर्ज नहीं कर सकती।
क्या भारत में समलैंगिक जोड़े शादी या गोद ले सकते हैं?
2026 तक नहीं। Supriyo (2023) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विवाह का कोई मौलिक अधिकार नहीं है और सवाल संसद पर छोड़ा, और बहुमत से अविवाहित क्वीयर जोड़ों के संयुक्त रूप से गोद लेने की इजाज़त देने से मना किया। अकेला क्वीयर व्यक्ति अपने नाम पर गोद ले सकता है। एक सरकारी समिति क्वीयर जोड़ों के व्यावहारिक अधिकारों पर विचार कर रही है।
क्या मेरा परिवार मुझे घर लौटने या शादी के लिए मजबूर कर सकता है?
नहीं। वयस्क होने के बाद आप कहाँ और किसके साथ रहेंगे, यह अनुच्छेद 21 के तहत आपका चुनाव है। परिवार धमकाए या बंद रखे तो 112 पर कॉल करें, FIR दर्ज कराएँ, और क़ानूनी सहायता वकील से हाई कोर्ट में सुरक्षा याचिका दायर कराएँ। अदालतों ने समलैंगिक जोड़ों को ऐसे आदेश कई बार दिए हैं।
क्या मैं और मेरा साथी संयुक्त बैंक खाता रख सकते हैं?
हाँ। 28 अगस्त 2024 को वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने सलाह दी कि क्वीयर व्यक्तियों के संयुक्त खाता खोलने या क्वीयर साथी को नॉमिनी बनाने पर कोई रोक नहीं है, और RBI ने बैंकों को ऐसा ही स्पष्टीकरण दिया। शाखा मना करे तो इनकार लिखित में माँगें और बैंक के नोडल अधिकारी, फिर cms.rbi.org.in पर RBI लोकपाल से शिकायत करें।
यह लेख जागरूकता के लिए सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। अपनी स्थिति के लिए किसी वकील से सलाह लें या मुफ़्त क़ानूनी सहायता के लिए 15100 पर कॉल करें।
