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A construction worker cutting steel at a site in Delhiसमानता

फ़ोटो: Ramesh Lalwani, Wikimedia Commons, CC BY 2.0. सांकेतिक चित्र.

हाथ से मैला ढोना प्रतिबंधित: मुआवज़ा, पुनर्वास और शिकायत कैसे करें

न्याय पाठशाला7 मिनट✓ समीक्षा और अद्यतन: अक्टूबर 2026Read in English

2013 का क़ानून क्या रोकता है, सीवर में मौत पर 30 लाख रुपये का मुआवज़ा (Balram Singh, 2023), पुनर्वास के हक़, और मज़दूर को सीवर में भेजे जाने पर किसे फ़ोन करें।

क़ानून: अनुच्छेद 17, 21 और 23, भारत का संविधान · हाथ से मैला ढोने वालों के रूप में नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 · Balram Singh v. Union of India (2023)

संक्षेप में

  • किसी से हाथ से मानव मल उठवाना, या सुरक्षा उपकरण और सुरक्षा उपायों के बिना सीवर या सेप्टिक टैंक साफ़ कराना हाथ से मैला ढोने वालों के रूप में नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 के तहत अपराध है। अपराध संज्ञेय (cognizable, यानी पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है) और ग़ैर-ज़मानती हैं।
  • सीवर या सेप्टिक टैंक में मरने वाले मज़दूर के परिवार को 30 लाख रुपये मिलने चाहिए; स्थायी विकलांगता पर 20 लाख और दूसरी विकलांगता पर कम से कम 10 लाख (Balram Singh v Union of India, 2023)। भुगतान प्राधिकरण करता है, चाहे मज़दूर को निजी ठेकेदार ने रखा हो।
  • हाथ से मैला ढोने वाले के रूप में चिह्नित व्यक्ति नक़द सहायता, वज़ीफ़े के साथ कौशल प्रशिक्षण, ऋण सब्सिडी और आवास में मदद का हक़दार है।
  • मज़दूर सीवर में फँसा या बेहोश हो: तुरंत 112 पर कॉल करें। बिना उपकरण किसी और को बचाने के लिए अंदर न जाने दें।
  • उल्लंघन की शिकायत ज़िलाधिकारी, पुलिस और राष्ट्रीय सफ़ाई कर्मचारी आयोग को करें। मुफ़्त वकील: 15100।

हर साल भारतीय शहरों में मज़दूर सीवरों और सेप्टिक टैंकों के अंदर ज़हरीली गैस से मरते हैं। कई और अब भी सूखे शौचालय, खुली नालियाँ या रेल की पटरियाँ हाथ से साफ़ करते हैं। लगभग सभी उन समुदायों से हैं जिन्हें जाति ने पीढ़ियों से इस काम में धकेला है। क़ानून साफ़ कहता है कि यह ख़त्म होना चाहिए। इस लेख में बताया गया है कि क्या प्रतिबंधित है, पीड़ितों के परिवार किसके हक़दार हैं, पुनर्वास कैसे होता है, और शिकायत कैसे करें।

क़ानून क्या रोकता है

हाथ से मैला ढोने वाला (manual scavenger) वह व्यक्ति है जिसे अस्वच्छ शौचालय, खुली नाली, गड्ढे या रेल पटरी से मानव मल को सड़ने से पहले हाथ से साफ़ करने, ढोने, ठिकाने लगाने या सँभालने के लिए रखा गया हो धारा 2(1)(g)। ख़तरनाक सफ़ाई (hazardous cleaning) का मतलब है नियमों में ज़रूरी सुरक्षा उपकरण, सफ़ाई यंत्रों और सुरक्षा उपायों के बिना हाथ से सीवर या सेप्टिक टैंक साफ़ करना धारा 2(1)(d)।

  • कोई व्यक्ति, स्थानीय निकाय या एजेंसी अस्वच्छ शौचालय नहीं बना सकती, न किसी को हाथ से मैला ढोने वाले के रूप में रख सकती है धारा 5, 6।
  • कोई किसी को सीवर या सेप्टिक टैंक की ख़तरनाक सफ़ाई के लिए नहीं रख सकता धारा 7।
  • सज़ा: धारा 5 और 6 के पहले अपराध पर एक साल तक जेल या 50,000 रुपये तक जुर्माना, या दोनों धारा 8; ख़तरनाक सफ़ाई पर दो साल तक या 2 लाख रुपये तक जुर्माना, या दोनों, और दोहराने पर पाँच साल या 5 लाख रुपये तक धारा 9।
  • सभी अपराध संज्ञेय और ग़ैर-ज़मानती हैं धारा 22।

अनुसूचित जाति या जनजाति के सदस्य को हाथ से मैला ढोने के लिए मजबूर करना SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत अत्याचार भी है। मज़दूर की मौत हो तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अपराध, जैसे लापरवाही से मौत, भी लागू होते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिए

Safai Karamchari Andolan v Union of India (2014) में कोर्ट ने कहा कि हाथ से मैला ढोना गरिमा के साथ जीने के अधिकार का उल्लंघन है और 1993 के बाद की हर सीवर मौत पर मुआवज़े का आदेश दिया। Balram Singh v Union of India (20 अक्टूबर 2023) में कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को इस प्रथा को पूरी तरह ख़त्म करने के चौदह निर्देश दिए और मुआवज़ा बढ़ाया:

  • सीवर या सेप्टिक टैंक की सफ़ाई में मरने वाले के आश्रितों को 30 लाख रुपये।
  • सीवर के काम से स्थायी रूप से विकलांग हुए व्यक्ति को 20 लाख रुपये।
  • दूसरी विकलांगताओं पर कम से कम 10 लाख रुपये।

कोर्ट ने राष्ट्रीय सर्वेक्षण, पीड़ितों के बच्चों की छात्रवृत्ति, चरणबद्ध मशीनीकरण और हर मौत की जवाबदेही का भी निर्देश दिया, और कहा कि बिना सुरक्षा उपकरण सीवर का काम बंधुआ मज़दूरी के बराबर हो सकता है। जनवरी 2025 में इसी मामले में कोर्ट ने दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद में हाथ से सीवर सफ़ाई पर पूरी रोक का आदेश दिया। मामले की निगरानी जारी है।

पुनर्वास: आप किसके हक़दार हैं

क़ानून सिर्फ़ सज़ा नहीं देता। हाथ से मैला ढोने वाले के रूप में चिह्नित हर व्यक्ति का पुनर्वास ज़रूरी है धारा 13। क़ानून और केंद्रीय योजना (अब सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मियों के लिए नमस्ते योजना) के तहत इसमें शामिल है:

  • एकमुश्त नक़द सहायता (केंद्रीय योजना में 40,000 रुपये, परिवार के एक वयस्क सदस्य को)।
  • दो साल तक दूसरी आजीविका का कौशल प्रशिक्षण, प्रशिक्षण के दौरान मासिक वज़ीफ़े के साथ।
  • दूसरे धंधे या मशीनी सफ़ाई उपकरण के लिए सब्सिडी और रियायती ऋण।
  • SC छात्रों की योजनाओं के तहत बच्चों के लिए छात्रवृत्ति।
  • आवासीय भूखंड और मकान बनाने में मदद, आवास योजना की पात्रता के अधीन।

चिह्नित होना सबसे अहम है। नगरपालिकाओं और पंचायतों को सर्वे कर हाथ से मैला ढोने वालों की सूची बनानी होती है धारा 11, 12, और यह काम करने वाला कोई भी व्यक्ति चिह्नित होने के लिए सीधे स्थानीय निकाय में आवेदन कर सकता है। नमस्ते के तहत प्रोफ़ाइल किए गए सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मियों को PPE किट, सुरक्षा प्रशिक्षण और स्वास्थ्य बीमा मिलना चाहिए।

क़दम दर क़दम

  1. सीवर या टैंक में आपात स्थिति: तुरंत 112 पर कॉल करें और दमकल व एंबुलेंस माँगें। बिना साँस लेने के उपकरण के किसी और को अंदर न भेजें; ज़्यादातर एक साथ कई मौतें बचाने की कोशिश में होती हैं।
  2. मौत या चोट के बाद: क़ानून की धारा 7, 9 और BNS के तहत ठेकेदार और अधिकारियों पर FIR पर ज़ोर दें। पोस्टमार्टम रिपोर्ट लें और सँभालकर रखें।
  3. मुआवज़े का दावा ज़िलाधिकारी (DM) को लिखित में करें, FIR, मृत्यु प्रमाणपत्र, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और रिश्ते का प्रमाण लगाकर। ज़िले में क़ानून लागू कराने की ज़िम्मेदारी DM की है धारा 18। मुआवज़ा प्राधिकरण को देना है, ठेकेदार शामिल हो या न हो।
  4. चल रहे उल्लंघन (सूखा शौचालय, बिना उपकरण सीवर में भेजे जा रहे मज़दूर) की शिकायत DM, नगर आयुक्त और पुलिस को करें। धारा 24, 25 की ज़िला और उप-मंडल सतर्कता समितियाँ अमल पर नज़र रखने के लिए हैं; DM कार्यालय से पूछें कि उनकी बैठक कब होती है।
  5. चिह्नित होने के लिए आवेदन करें नगरपालिका या पंचायत में, और रसीद वाली कॉपी रखें।
  6. मुफ़्त क़ानूनी मदद: NALSA 15100; ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण मुआवज़े का दावा दायर करने और प्राधिकरण के न देने पर हाई कोर्ट में याचिका में मदद कर सकता है।
उदाहरण

लखनऊ के बाहर एक हाउसिंग सोसाइटी के सेप्टिक टैंक में शंकर की मौत हो गई, जिसे एक निजी ठेकेदार ने बिना मास्क या हार्नेस के अंदर भेजा था। सोसाइटी और ठेकेदार ने परिवार को "निपटारे" के लिए 2 लाख रुपये की पेशकश की। उसकी पत्नी कमला इसके बजाय DLSA के वकील के साथ थाने गई और 2013 के क़ानून और BNS के तहत FIR दर्ज कराई। फिर उसने Balram Singh का हवाला देते हुए FIR और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ DM को लिखित दावा दिया। ज़िले ने 30 लाख रुपये दिए, और बच्चों का छात्रवृत्ति में नामांकन हुआ।

ये तैयार रखें

  • FIR की कॉपी, मृत्यु प्रमाणपत्र, पोस्टमार्टम या मेडिकल रिपोर्ट।
  • रिश्ते का प्रमाण (आधार, राशन कार्ड, विवाह प्रमाणपत्र) और आश्रित के बैंक खाते का ब्योरा।
  • ठेकेदार, सोसाइटी या एजेंसी और शामिल अधिकारियों के नाम; कोई वर्क ऑर्डर, भुगतान रिकॉर्ड या संदेश।
  • सुरक्षित रूप से संभव हो तो जगह और सुरक्षा उपकरण न होने की फ़ोटो या वीडियो।
  • पुनर्वास के लिए: पहचान प्रमाण, जाति प्रमाणपत्र, और चिह्नित होने के आवेदन की रसीद वाली कॉपी।
सावधान

मुआवज़े की जगह ठेकेदार या हाउसिंग सोसाइटी से निजी "समझौता" स्वीकार न करें। 30 लाख रुपये सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत सरकारी प्राधिकरण को देने हैं और यह दोषसिद्धि पर निर्भर नहीं है। समझौते के काग़ज़ पर दस्तख़त को बाद में यह कहने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है कि परिवार ने दावा छोड़ दिया।

कहाँ जाएँ

  • आपात स्थिति: 112 (दमकल और एंबुलेंस)। जातिगत अत्याचार हेल्पलाइन: 14566।
  • FIR: स्थानीय थाना; मना करने पर पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत।
  • मुआवज़ा और अमल: ज़िलाधिकारी; नगर आयुक्त या पंचायत; ज़िला सतर्कता समिति।
  • राष्ट्रीय सफ़ाई कर्मचारी आयोग: ncsk.nic.in; योजनाएँ: सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, socialjustice.gov.in; शिकायतें: pgportal.gov.in।
  • मुफ़्त वकील: NALSA 15100; nalsa.gov.in।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सीवर में मौत पर परिवार को कितना मुआवज़ा मिलता है?

Balram Singh v Union of India (2023) में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत 30 लाख रुपये। स्थायी रूप से विकलांग हुए मज़दूर को 20 लाख रुपये और दूसरी विकलांगताओं पर कम से कम 10 लाख रुपये। राशि ठेकेदार नहीं, सरकारी प्राधिकरण देता है, और यह आपराधिक दोषसिद्धि का इंतज़ार नहीं करती। ज़िलाधिकारी को लिखित आवेदन दें।

क्या मज़दूर की सहमति हो तो भी हाथ से सेप्टिक टैंक साफ़ कराना ग़ैरक़ानूनी है?

हाँ। नियमों में ज़रूरी सुरक्षा उपकरण और सुरक्षा उपायों के बिना किसी को सीवर या सेप्टिक टैंक की ख़तरनाक सफ़ाई के लिए रखना 2013 के क़ानून की धारा 7 में अपराध है, मज़दूर चाहे जो कहे। ग़रीब मज़दूर की सहमति नियोक्ता के काम को क़ानूनी नहीं बनाती, और सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बिना उपकरण ऐसा काम बंधुआ मज़दूरी के बराबर हो सकता है।

जब निजी ठेकेदार ने मज़दूर को अंदर भेजा हो तो ज़िम्मेदार कौन है?

ठेकेदार और उसे काम देने वाले हर व्यक्ति पर क़ानून और BNS के तहत मुक़दमा चल सकता है, पर मुआवज़ा देने की ज़िम्मेदारी सरकारी प्राधिकरण, जैसे नगरपालिका या सीवर के लिए ज़िम्मेदार निकाय, पर है, भले ही मज़दूर को निजी ठेकेदार या हाउसिंग सोसाइटी ने रखा हो।

पहले हाथ से मैला ढोने वाले व्यक्ति को क्या मदद मिल सकती है?

स्थानीय निकाय द्वारा चिह्नित होने पर व्यक्ति धारा 13 के तहत पुनर्वास का हक़दार है: एकमुश्त नक़द सहायता, वज़ीफ़े के साथ कौशल प्रशिक्षण, नए धंधे के लिए रियायती ऋण, बच्चों की छात्रवृत्ति और लागू योजनाओं में आवास की मदद। चिह्नित होने के लिए नगरपालिका या पंचायत में आवेदन करें, और योजना के फ़ॉर्म के लिए ज़िला समाज कल्याण कार्यालय से संपर्क करें।

यह लेख जागरूकता के लिए सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। अपनी स्थिति के लिए किसी वकील से सलाह लें या मुफ़्त क़ानूनी सहायता के लिए 15100 पर कॉल करें।

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