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An apartment complex under construction in Kolkataघर

फ़ोटो: Biswarup Ganguly, Wikimedia Commons, CC BY 3.0. सांकेतिक चित्र.

किराए का घर: क़रारनामा, डिपॉज़िट, बेदख़ली और आपके अधिकार

न्याय पाठशाला8 मिनट✓ समीक्षा और अद्यतन: अक्टूबर 2026Read in English

11 महीने का क़रार, डिपॉज़िट वापस कैसे पाएँ, मकान मालिक कब निकाल सकता है, ताला-बिजली काटने पर क्या करें, पुलिस वेरिफ़िकेशन और शिकायत कहाँ करें।

क़ानून: धारा 17, पंजीकरण अधिनियम, 1908 · धारा 106 और 108, संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · राज्यों के किराया क़ानून · मॉडल किरायेदारी अधिनियम, 2021

संक्षेप में

  • कोई भी पैसा देने से पहले स्टांप पेपर पर लिखित, दस्तख़त किया हुआ क़रारनामा (rent agreement) बनवाएँ। 11 महीने के क़रार का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी नहीं; एक साल से ज़्यादा का हो तो ज़रूरी है धारा 17, पंजीकरण अधिनियम।
  • किराया और डिपॉज़िट बैंक ट्रांसफ़र या UPI से दें, सिर्फ़ नक़द कभी नहीं। भुगतान का रिकॉर्ड ही आपका सबूत है।
  • मकान मालिक आपको ज़बरदस्ती निकाल नहीं सकता, ताला नहीं बदल सकता, पानी-बिजली नहीं काट सकता। बेदख़ली के लिए नोटिस और फिर अदालत या किराया प्राधिकरण (Rent Authority) का आदेश चाहिए।
  • डिपॉज़िट वापस नहीं मिला? पहले लिखित माँग, फिर क़ानूनी नोटिस, फिर वसूली का मुक़दमा या किराया प्राधिकरण में अर्ज़ी। घर में घुसने के दिन की तस्वीरें ऐसे मामले जिता देती हैं।
  • मुफ़्त क़ानूनी सलाह: 15100। मकान मालिक ज़बरदस्ती घुसे या सप्लाई काटे: 100 / 112।

मकान मालिक और किराएदार के ज़्यादातर झगड़ों की जड़ एक ही है: कुछ लिखा नहीं गया। यह लेख बताता है कि लिखित में क्या-क्या रखें, काग़ज़ चुप हो तब भी क़ानून आपको क्या देता है, और गड़बड़ होने पर क्या करें।

आप पर कौन-सा क़ानून लागू होता है

घर किराए पर लेने पर क़ानून की तीन परतें काम करती हैं। संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 (Transfer of Property Act) मकान मालिक (lessor) और किराएदार (lessee) के बीच वे बुनियादी नियम तय करता है जो क़रार चुप होने पर लागू होते हैं। पंजीकरण अधिनियम, 1908 और आपके राज्य का स्टांप अधिनियम तय करते हैं कि क़रार कैसे बनेगा। इसके ऊपर हर राज्य का अपना किराया क़ानून है: ज़्यादातर राज्यों में पुराना किराया नियंत्रण अधिनियम (Rent Control Act), और कुछ राज्यों में केंद्र के मॉडल किरायेदारी अधिनियम, 2021 (Model Tenancy Act) पर आधारित नया क़ानून।

मॉडल किरायेदारी अधिनियम सिर्फ़ एक नमूना है। वह किसी राज्य में तभी क़ानून बना जब उस राज्य ने उसे अपनाया। 2026 तक ज़्यादातर राज्य अब भी अपने पुराने किराया क़ानूनों पर चल रहे हैं, इसलिए हमेशा देखें कि आपके राज्य में कौन-सा क़ानून है। मुख्य फ़र्क़ इस बात का है कि शिकायत कहाँ होगी: पुराने क़ानूनों में किराया नियंत्रक (Rent Controller) या दीवानी अदालत में, नए क़ानूनों में किराया प्राधिकरण, किराया अदालत और किराया अधिकरण (Rent Authority, Rent Court, Rent Tribunal) में।

ज़्यादातर क़रार 11 महीने के क्यों होते हैं

एक साल से ज़्यादा का पट्टा (lease) सब-रजिस्ट्रार दफ़्तर में रजिस्टर कराना ज़रूरी है धारा 17(1)(d), पंजीकरण अधिनियम। रजिस्ट्रेशन का मतलब है स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फ़ीस देना और दोनों पक्षों का पहचान-पत्र और गवाहों के साथ हाज़िर होना। 11 महीने के क़रार में यह सब बच जाता है, इसीलिए यही चलन है।

यहाँ लोग दो ग़लतियाँ करते हैं। पहली: 11 महीने के क़रार के लिए भी आपके राज्य में तय मूल्य का स्टांप पेपर चाहिए (अब ज़्यादातर राज्यों में ई-स्टांप)। सादे काग़ज़ पर या कम स्टांप वाला क़रार तब तक सबूत के तौर पर ठुकराया जा सकता है जब तक कमी और जुर्माना न भरा जाए। दूसरी: जिस क़रार का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी था और नहीं हुआ, उसकी शर्तें साबित करने के लिए उसे अदालत में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता धारा 49, पंजीकरण अधिनियम। इसलिए अगर आप दो-तीन साल का क़रार कर रहे हैं, तो उसे रजिस्टर कराइए; क़रार की सुरक्षा खोने के मुक़ाबले यह ख़र्च छोटा है।

नोटरी से सत्यापित क़रार रजिस्टर्ड क़रार नहीं है; नोटरी सिर्फ़ दस्तख़तों की पुष्टि करता है।

ये बातें लिखित में रखें

  • मकान मालिक और किराएदार के पूरे नाम, पते और पहचान-पत्र नंबर, और मकान का सही पता।
  • महीने का किराया, किस तारीख़ को देना है, कैसे देना है, और सालाना बढ़ोतरी (तय प्रतिशत, "बाद में तय होगा" नहीं)।
  • सिक्योरिटी डिपॉज़िट की रक़म, यह कि वह वापसी योग्य (refundable) है, और घर ख़ाली करने के कितने दिन के भीतर लौटाया जाएगा। मॉडल किरायेदारी अधिनियम में घरों के लिए डिपॉज़िट की सीमा दो महीने का किराया है; बेंगलुरु जैसे शहरों में अब भी दस महीने का चलन है, इसलिए मोल-भाव करें।
  • दोनों पक्षों के लिए नोटिस अवधि (आम तौर पर एक महीना) और लॉक-इन अवधि, अगर कोई हो।
  • बिजली, पानी, पाइप गैस, सोसाइटी मेंटेनेंस और प्रॉपर्टी टैक्स कौन भरेगा।
  • मरम्मत कौन कराएगा: छोटी रोज़मर्रा की मरम्मत आम तौर पर किराएदार की, ढाँचे की मरम्मत मकान मालिक की।
  • सौंपे गए सामान (पंखे, गीज़र, अलमारी) की सूची और उनकी हालत, तस्वीरों के साथ।
  • मकान मालिक अंदर आ सकता है या नहीं, और कितनी पहले सूचना देगा। मालिक को जब चाहे घुस आने का कोई आम अधिकार नहीं है।
सुझावडिपॉज़िट और हर महीने का किराया बैंक ट्रांसफ़र या UPI से दें और नोट में लिखें "Rent Oct 2026, Flat 302"। नक़द देना ही पड़े तो हर बार दस्तख़त और तारीख़ वाली रसीद लें। घर में आने के दिन और छोड़ने के दिन हर कमरे, मीटर रीडिंग और सामान की तारीख़ वाली तस्वीरें और एक छोटा वीडियो बनाएँ।

क़रार चुप हो, तब भी आपके अधिकार

  • ख़त्म करने से पहले नोटिस। अगर नोटिस अवधि लिखी नहीं है, तो रिहायशी किरायेदारी महीना-दर-महीना मानी जाती है और कोई भी पक्ष 15 दिन के लिखित नोटिस से उसे ख़त्म कर सकता है धारा 106, संपत्ति अंतरण अधिनियम।
  • मरम्मत। जो मरम्मत मकान मालिक की ज़िम्मेदारी है, अगर वह आपके लिखित नोटिस के बाद उचित समय में नहीं कराता, तो आप ख़ुद करा सकते हैं और ख़र्च किराए से काट सकते हैं धारा 108, संपत्ति अंतरण अधिनियम। बिल सँभालकर रखें।
  • ज़रूरी सप्लाई। राज्यों के किराया क़ानून और मॉडल किरायेदारी अधिनियम, दोनों किराएदार को निकालने के लिए पानी, बिजली या सफ़ाई काटने को ग़ैरक़ानूनी मानते हैं। किराया प्राधिकरण या अदालत सप्लाई बहाल करने और मुआवज़े का आदेश दे सकती है।

बेदख़ली: मकान मालिक क्या कर सकता है, क्या नहीं

मकान मालिक आपको इसलिए निकालना चाह सकता है कि नोटिस अवधि ख़त्म हो गई, लॉक-इन पूरा हो गया, किराया बक़ाया है, या उसे अपने परिवार के लिए घर चाहिए। वजह जो भी हो, रास्ता एक ही है: पहले लिखित नोटिस, और फिर भी आप न जाएँ तो राज्य के क़ानून के तहत किराया नियंत्रक, किराया अदालत या दीवानी अदालत से बेदख़ली का आदेश (eviction order)। उसके बाद ही अदालत का अधिकारी, ज़रूरत हो तो पुलिस की मदद से, आपको हटा सकता है।

मकान मालिक जो कभी नहीं कर सकता, वह है अपने हाथ से बेदख़ली: ताला बदलना, दरवाज़ा उतार लेना, आपका सामान बाहर फेंकना, धमकाने के लिए आदमी भेजना, या बिजली काटना। ये आपराधिक अतिचार धारा 329 BNS, रिष्टि यानी नुक़सान पहुँचाना धारा 324 BNS या आपराधिक धमकी धारा 351 BNS हो सकते हैं। आप पुलिस बुला सकते हैं और दीवानी अदालत से घर में वापस जाने के लिए तुरंत निषेधाज्ञा (injunction) भी माँग सकते हैं।

दूसरा पहलू: वैध नोटिस ख़त्म होने के बाद अगर आप रुके रहते हैं, तो आप पर इस्तेमाल और क़ब्ज़े का हर्जाना बनता है। मॉडल किरायेदारी अधिनियम में यह पहले दो महीने दोगुना किराया और उसके बाद चार गुना है। डिपॉज़िट को "मेरे आख़िरी दो महीने का किराया" मत मानिए, जब तक मालिक लिखित में राज़ी न हो।

डिपॉज़िट वापस कैसे पाएँ

जो तरीक़ा काम करता है:

  1. घर ख़ाली करने का नोटिस लिखित में दें (WhatsApp या ईमेल भी चलेगा) और आख़िरी दिन साथ मिलकर जाँच (joint inspection) की माँग करें। चाबी देते समय मीटर रीडिंग और घर की हालत लिखी हुई दस्तख़त वाली पर्ची लें।
  2. तय दिनों में डिपॉज़िट न आए तो क़रार की धारा का हवाला देते हुए विनम्र लिखित माँग भेजें, साथ में आने और जाने के दिन की तस्वीरें।
  3. वकील के ज़रिए (या ख़ुद लिखकर) क़ानूनी नोटिस भेजें और 15 दिन का समय दें।
  4. फिर भी कुछ नहीं? दीवानी अदालत में ब्याज सहित डिपॉज़िट वसूली का मुक़दमा करें, या आपके राज्य में किराया प्राधिकरण हो तो वहाँ अर्ज़ी दें। छोटी रक़म के लिए ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) मध्यस्थता या लोक अदालत करा सकता है, जो मुफ़्त और तेज़ है।

मकान मालिक सामान्य टूट-फूट से ज़्यादा असली नुक़सान, बक़ाया बिल और बक़ाया किराया काट सकता है। वह सिर्फ़ पुरानी पड़ गई दीवार की पुताई या कभी तय न हुए "सफ़ाई ख़र्च" के नाम पर कटौती नहीं कर सकता।

पुलिस वेरिफ़िकेशन

ज़्यादातर शहरों में पुलिस आयुक्त ने स्थायी आदेश (आम तौर पर धारा 163 BNSS, पहले धारा 144 CrPC के तहत) जारी किए हैं कि मकान मालिक किराएदार का ब्योरा स्थानीय थाने या ऑनलाइन जमा करे। यह ज़िम्मेदारी मकान मालिक की है, और इसे न निभाने वाले मालिक पर मुक़दमा हो सकता है। इसमें कोई ख़र्च नहीं है और यह आपकी भी हिफ़ाज़त करता है: यह सबूत है कि आप वहाँ क़ानूनन रहते हैं। पहचान-पत्र की कॉपी, फ़ोटो और क़रार साथ रखें; कई शहरों में फ़ॉर्म ऑनलाइन या पुलिस के नागरिक ऐप से भरा जाता है।

उदाहरण

फ़रह पुणे में 14,000 रुपये महीने पर 1BHK लेती है, डिपॉज़िट 50,000 रुपये। वह 11 महीने का ई-स्टांप क़रार करती है, हर महीने UPI से किराया देती है और घर में आने के दिन फ़्लैट का वीडियो बनाती है। एक साल बाद घर छोड़ते समय मालिक कहता है कि वह "पुताई" के 30,000 रुपये काटेगा। फ़रह WhatsApp पर आने के दिन का वीडियो भेजती है जिसमें वही निशान दिख रहे हैं, क़रार की वह धारा उद्धृत करती है कि डिपॉज़िट 30 दिन में लौटाना है, और लिखती है कि पैसा न मिला तो वह किराया प्राधिकरण में अर्ज़ी देगी। एक हफ़्ते में उसे 47,000 रुपये मिल जाते हैं; एक टूटी कुंडी की वाजिब कटौती के बाद।

ये तैयार रखें

  • स्टांप पेपर पर दस्तख़त किया क़रार, सामान की सूची और तस्वीरों के साथ
  • डिपॉज़िट और हर महीने के किराए का बैंक या UPI स्टेटमेंट
  • आने और जाने के दिन की तारीख़ वाली तस्वीरें और वीडियो
  • पुलिस वेरिफ़िकेशन की पावती
  • मकान मालिक या ब्रोकर से हुई सारी WhatsApp, ईमेल और नोटिस की बातचीत
सावधान

"एग्रीमेंट बाद में, डिपॉज़िट अभी" यहीं किराएदार पैसा गँवाते हैं। डिपॉज़िट कभी ऐसी दस्तख़त वाली रसीद के बिना न दें जिसमें फ़्लैट, रक़म और "refundable security deposit" (वापसी योग्य सिक्योरिटी डिपॉज़िट) शब्द लिखे हों। और ऐसे क़रार पर कभी दस्तख़त न करें जिसमें ख़ाली जगहें छूटी हों।

कहाँ जाएँ

  • किराया प्राधिकरण / किराया नियंत्रक अपने राज्य के किराया क़ानून के तहत, या दीवानी अदालत: डिपॉज़िट वसूली, ग़ैरक़ानूनी बेदख़ली या सप्लाई कटने पर (पहले लिखित माँग और क़ानूनी नोटिस के बाद)।
  • पुलिस (100 / 112) अगर मालिक ज़बरदस्ती घुसे, ताला बदले, धमकाए या ज़रूरी सप्लाई काटे।
  • ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण (15100) मुफ़्त वकील, मध्यस्थता या लोक अदालत के लिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या 11 महीने का रेंट एग्रीमेंट क़ानूनी रूप से वैध है?

हाँ। 11 महीने का क़रार वैध पट्टा है और पंजीकरण अधिनियम के तहत इसका रजिस्ट्रेशन ज़रूरी नहीं। फिर भी यह आपके राज्य में तय मूल्य के स्टांप पेपर पर और दोनों पक्षों के दस्तख़त के साथ होना चाहिए। अगर आप इसे हर साल बढ़ाते हैं, तो हर बार नया दस्तख़त किया क़रार बनना चाहिए।

क्या मकान मालिक बिना नोटिस मुझे निकाल सकता है?

नहीं। मकान मालिक को क़रार के अनुसार लिखित नोटिस देना होगा, या कुछ न लिखा हो तो संपत्ति अंतरण अधिनियम के तहत 15 दिन का नोटिस, और आप न जाएँ तो किराया नियंत्रक, किराया अदालत या दीवानी अदालत से बेदख़ली का आदेश लेना होगा। ताला बदलना, बिजली काटना और धमकाना ग़ैरक़ानूनी है और इसकी शिकायत पुलिस में हो सकती है।

मकान मालिक मेरा सिक्योरिटी डिपॉज़िट नहीं लौटा रहा। मैं क्या करूँ?

आने और जाने के दिन की तस्वीरों के साथ लिखित माँग भेजें, फिर 15 दिन का समय देता क़ानूनी नोटिस। इससे भी काम न बने तो दीवानी अदालत में वसूली का मुक़दमा करें, या जिन राज्यों में किराया प्राधिकरण है वहाँ अर्ज़ी दें। ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण (15100) मुफ़्त मध्यस्थता या लोक अदालत में मदद कर सकता है।

मकान मालिक किराया कितना बढ़ा सकता है?

उतना ही जितना क़रार में लिखा है, और तभी जब क़रार इजाज़त देता है। क़रार चुप हो तो अवधि के बीच आपकी सहमति के बिना किराया नहीं बढ़ाया जा सकता। राज्यों के पुराने किराया नियंत्रण क़ानून संरक्षित किरायेदारियों में बढ़ोतरी की सीमा तय करते हैं; मॉडल किरायेदारी अधिनियम में बढ़ोतरी वही होगी जो क़रार में लिखी है, और लागू होने से पहले नोटिस देना होगा।

यह लेख जागरूकता के लिए सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। अपनी स्थिति के लिए किसी वकील से सलाह लें या मुफ़्त क़ानूनी सहायता के लिए 15100 पर कॉल करें।

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