पीछा करना, चोरी-छिपे देखना और ऑनलाइन उत्पीड़न: इसे कैसे रोकें
स्टॉकिंग (धारा 78 BNS), वॉयेरिज़्म (धारा 77) और ऑनलाइन यौन उत्पीड़न क्या हैं, सज़ाएँ, सबूत कैसे बचाएँ, 24 घंटे में तस्वीरें कैसे हटवाएँ, और FIR कैसे कराएँ।
संक्षेप में
- किसी महिला की साफ़ अनिच्छा के बावजूद बार-बार उसका पीछा करना, संपर्क करना या ऑनलाइन निगरानी करना स्टॉकिंग है, 3 साल तक की कैद धारा 78 BNS। उसे निजी काम करते देखना या तस्वीर लेना, या ऐसी तस्वीर शेयर करना वॉयेरिज़्म है, 1 से 3 साल धारा 77 BNS।
- कुछ भी ब्लॉक या डिलीट करने से पहले प्रोफ़ाइल, URL, तारीख़ और समय का स्क्रीनशॉट लें। अंतरंग तस्वीरें आगे न भेजें, रिपोर्ट करने के लिए भी नहीं।
- ऑनलाइन उत्पीड़न की रिपोर्ट cybercrime.gov.in पर करें (महिला और बाल अनुभाग, जो गुमनाम भी हो सकता है) और प्लेटफ़ॉर्म से अंतरंग तस्वीरें हटाने को कहें; IT नियमों में आपकी शिकायत के 24 घंटे के भीतर हटाना ज़रूरी है।
- किसी भी थाने में FIR कराएँ; ये संज्ञेय अपराध हैं, और महिला अधिकारी को आपकी शिकायत दर्ज करनी चाहिए धारा 173 BNSS। अभी ख़तरा: 112। सहारा: 181। मुफ़्त वकील: 15100।
एक आदमी जो आपके कॉलेज के बाहर खड़ा मिलता रहता है। एक अजनबी जो ब्लॉक करने के बाद नए अकाउंट से हर रात मैसेज करता है। चेंजिंग रूम में छिपा कैमरा, या आपकी इजाज़त के बिना शेयर की गई निजी तस्वीर। ये "छेड़छाड़" या मज़ाक नहीं हैं। ये अपराध हैं, और क़ानून आपको कार्रवाई के तेज़ रास्ते देता है। सुप्रीम कोर्ट ने Puttaswamy v Union of India (2017) में निजता को जीवन के अधिकार का हिस्सा माना अनुच्छेद 21; ये अपराध रोज़मर्रा की ज़िंदगी में उसी हक़ की रक्षा करते हैं।
क़ानून क्या कहता है
स्टॉकिंग (पीछा करना)। कोई आदमी स्टॉकिंग करता है अगर वह किसी महिला की साफ़ अनिच्छा के बावजूद निजी मेलजोल बढ़ाने के लिए बार-बार उसका पीछा करे और संपर्क करे या करने की कोशिश करे, या उसके इंटरनेट, ईमेल या किसी और इलेक्ट्रॉनिक संचार के इस्तेमाल पर नज़र रखे धारा 78 BNS (पहले धारा 354D IPC)। सज़ा: पहली बार 3 साल तक और जुर्माना, दूसरी बार 5 साल तक। अगर आदमी क़ानूनन अपराध रोक या पकड़ रहा हो, या क़ानूनी कर्तव्य निभा रहा हो, तो यह स्टॉकिंग नहीं है। बार-बार कॉल, नए नंबरों से मैसेज, आपके नाम से फ़र्ज़ी अकाउंट और आपकी लोकेशन ट्रैक करना, सब परिभाषा में आते हैं।
वॉयेरिज़्म (चोरी-छिपे देखना)। ऐसी महिला को देखना या उसकी तस्वीर लेना जो ऐसा निजी काम कर रही हो जिसमें वह उचित रूप से उम्मीद करे कि कोई नहीं देख रहा, या ऐसी तस्वीर फैलाना, पहली बार 1 से 3 साल और जुर्माना, दूसरी बार 3 से 7 साल धारा 77 BNS (पहले धारा 354C IPC)। स्पष्टीकरण अहम है: उसने तस्वीर खिंचवाने की सहमति दी भी हो, तो भी उसकी सहमति के बिना दूसरों से शेयर करना अपराध है। "निजी काम" में शौचालय का इस्तेमाल, कपड़े बदलना या यौन क्रिया शामिल है।
यौन उत्पीड़न। अनचाहा शारीरिक संपर्क, यौन संबंध की माँग, मर्ज़ी के ख़िलाफ़ पॉर्नोग्राफ़ी दिखाना, या यौन रंग वाली टिप्पणियाँ धारा 75 BNS: पहले तीन के लिए 3 साल तक सश्रम कारावास, टिप्पणियों के लिए 1 साल तक।
लज्जा का अपमान। किसी महिला की लज्जा का अपमान करने की नीयत से कोई शब्द, आवाज़, इशारा या वस्तु, या उसकी निजता में दख़ल, 3 साल तक साधारण कारावास और जुर्माना धारा 79 BNS। लज्जा भंग करने की नीयत से हमला या बल प्रयोग 1 से 5 साल धारा 74 BNS।
जब यह ऑनलाइन हो
- धारा 66E IT अधिनियम: किसी के निजी अंग की तस्वीर बिना सहमति लेना, प्रकाशित या प्रसारित करना: 3 साल तक या ₹2 लाख तक जुर्माना, या दोनों।
- धारा 67 IT अधिनियम: अश्लील सामग्री इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रकाशित या भेजना: पहली बार 3 साल तक और ₹5 लाख तक जुर्माना।
- धारा 67A IT अधिनियम: स्पष्ट यौन सामग्री: पहली बार 5 साल तक और ₹10 लाख तक जुर्माना। "रिवेंज पॉर्न" और मॉर्फ़ की गई नग्न तस्वीरों के लिए यही धारा है।
- तस्वीरें लीक करने या नुक़सान पहुँचाने की धमकी आपराधिक अभित्रास (criminal intimidation) है धारा 351 BNS, और जान से मारने, गंभीर चोट या महिला पर चरित्रहीनता का आरोप लगाने की धमकी पर सज़ा ज़्यादा है। रुकने के बदले पैसे माँगना जबरन वसूली है।
IT नियम, 2021 के तहत जिस प्लेटफ़ॉर्म को किसी व्यक्ति के निजी अंग, नग्नता या यौन क्रिया दिखाने वाली, या किसी की नक़ल करने वाली सामग्री की शिकायत मिले, उसे उसे 24 घंटे के भीतर हटाना या उस तक पहुँच बंद करनी होगी। हर बड़े प्लेटफ़ॉर्म में ऐप के भीतर "रिपोर्ट" विकल्प और एक शिकायत अधिकारी होता है जिसका संपर्क वेबसाइट पर प्रकाशित होना चाहिए।
क़दम दर क़दम
- पहले सबूत सुरक्षित करें। मैसेज, प्रोफ़ाइल, URL और तारीख़-समय के स्क्रीनशॉट लें। कॉल लॉग सहेजें। चैट की प्रति डाउनलोड करें। कोई वीडियो या तस्वीर शेयर हुई हो तो कहाँ-कब नोट करें, पर उसे आगे न भेजें; वह ख़ुद अपराध हो सकता है। एक छोटी समय-रेखा लिखें।
- प्लेटफ़ॉर्म को रिपोर्ट करें ऐप के भीतर, "नग्नता या यौन सामग्री" या "नक़ल (impersonation)" चुनकर, और शिकायत अधिकारी को ईमेल करें। टिकट नंबर नोट करें। 24 घंटे की घड़ी आपकी शिकायत से चलती है।
- cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत करें। "महिलाओं और बच्चों से जुड़े अपराध" चुनें। गुमनाम रिपोर्ट भी हो सकती है, पर नाम वाली शिकायत से पुलिस आपसे संपर्क कर पाती है। पैसे भी ऐंठे गए हों तो 1930 पर कॉल करें।
- किसी भी थाने जाएँ और लिखित शिकायत दें। स्टॉकिंग, वॉयेरिज़्म और यौन उत्पीड़न संज्ञेय अपराध (cognizable, जिनमें पुलिस कोर्ट की इजाज़त के बिना केस दर्ज कर गिरफ़्तार कर सकती है) हैं, इसलिए पुलिस को FIR दर्ज करनी ही होगी धारा 173 BNSS, चाहे घटना कहीं और हुई हो ("ज़ीरो FIR")। माँगें कि महिला अधिकारी आपका बयान दर्ज करे; इन अपराधों में क़ानून यही कहता है। शिकायत इलेक्ट्रॉनिक रूप से भेजकर 3 दिन के भीतर दस्तख़त भी कर सकती हैं।
- पुलिस मना करे, तो शिकायत पंजीकृत डाक से पुलिस अधीक्षक को भेजें और कुछ न हो तो धारा 175(3) BNSS में मजिस्ट्रेट के पास अर्ज़ी दें।
- उन लोगों को बताएँ जो आपको सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं: परिवार, हॉस्टल वार्डन, नियोक्ता। स्टॉकर आपके साथ काम या पढ़ाई करता हो तो POSH आंतरिक समिति या कॉलेज की उत्पीड़न-विरोधी सेल साथ-साथ कार्रवाई कर सकती है। पासवर्ड बदलें, दो-चरण लॉगिन चालू करें, और देखें कि आपकी लोकेशन और स्टोरी कौन देख सकता है।
जयपुर में दूसरे साल की छात्रा अंजलि एक सहपाठी को दिन में दर्जनों मैसेज भेजने पर ब्लॉक करती हैं। वह तीन नए इंस्टाग्राम अकाउंट बनाता है, हर पोस्ट पर कमेंट करता है, और एक रात मॉर्फ़ की गई नग्न तस्वीर इस मैसेज के साथ भेजता है: "शेयर कर दूँ या मिलोगी?" अंजलि हर चीज़ का समय समेत स्क्रीनशॉट लेती हैं, तस्वीर को ऐप में बिना-सहमति नग्नता के तौर पर रिपोर्ट करती हैं, और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करती हैं। अगली सुबह वे अपनी दोस्त और स्क्रीनशॉट के साथ नज़दीकी थाने जाती हैं। एक महिला कॉन्स्टेबल शिकायत दर्ज करती है और धारा 78 व 351 BNS और धारा 67A IT अधिनियम में FIR होती है। इंस्टाग्राम एक दिन में तस्वीर हटा देता है; पुलिस प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए अकाउंट ट्रेस करती है।
ये तैयार रखें
- स्क्रीनशॉट जिनमें भेजने वाले का प्रोफ़ाइल नाम, हैंडल या नंबर, मैसेज, और तारीख़-समय दिखे।
- एक्सपोर्ट की गई चैट बैकअप; कॉल लॉग; कोई वॉइस नोट।
- पोस्ट या प्रोफ़ाइल के URL, और प्लेटफ़ॉर्म की शिकायत के टिकट नंबर।
- घटनाओं की तारीख़वार समय-रेखा, ऑफ़लाइन पीछा करने और गवाहों समेत।
ग़ुस्से में बातचीत डिलीट न करें, न "मामला निपटाने" के लिए फ़ोन स्टॉकर के परिवार को दें। मिटाए सबूत वापस पाना मुश्किल है, और इन अपराधों में निजी समझौता नहीं हो सकता। तस्वीरें लीक करने की धमकी देने वाले को पैसे न दें; पैसे देने से यह कभी ख़त्म नहीं होता, और सेक्सटॉर्शन ख़ुद अपराध है जिसे पुलिस रोज़ संभालती है। रिपोर्ट करें।
कहाँ जाएँ
- आपातकाल: 112। महिला हेल्पलाइन 181 काउंसलिंग और पुलिस में मदद के लिए।
- राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल: cybercrime.gov.in; वित्तीय धोखाधड़ी या वसूली के लिए हेल्पलाइन 1930। परेशान करने वाले कॉल और SIM की रिपोर्ट sancharsaathi.gov.in पर।
- पुलिस: कोई भी थाना, महिला थाना या ज़िला साइबर सेल; धारा 77/78 BNS और IT अधिनियम में FIR। मना हो तो पुलिस अधीक्षक, फिर मजिस्ट्रेट।
- मुफ़्त विधिक सहायता: 15100 या ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण (nalsa.gov.in)। राष्ट्रीय महिला आयोग: ncw.gov.in। पीड़िता 18 से कम हो तो 1098।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
उसने कभी धमकी नहीं दी। क्या फिर भी स्टॉकिंग की रिपोर्ट कर सकती हूँ?
हाँ। धारा 78 BNS में धमकी ज़रूरी नहीं। आपकी साफ़ अनिच्छा के बावजूद बार-बार पीछा करना या संपर्क करना काफ़ी है, और आपकी ऑनलाइन गतिविधि पर नज़र रखना भी। उसे ब्लॉक करना, रुकने को कहना, या एक जवाब के बाद अनदेखा करना, सब अनिच्छा दिखाते हैं। उसके बाद के हर संपर्क का रिकॉर्ड रखें।
तस्वीर मैंने ख़ुद भेजी थी। क्या उसे शेयर करना फिर भी अपराध है?
हाँ। धारा 77 BNS का स्पष्टीकरण कहता है कि जहाँ महिला ने तस्वीर लेने की सहमति दी हो पर शेयर करने की नहीं, वहाँ शेयर करना वॉयेरिज़्म है। IT अधिनियम की धारा 67A भी स्पष्ट यौन सामग्री पर लागू है, चाहे तस्वीर किसी ने भी ली हो। 24 घंटे में हटवाने के लिए प्लेटफ़ॉर्म को और पुलिस को रिपोर्ट करें; आपने कुछ ग़ैरक़ानूनी नहीं किया।
क्या पुलिस मेरा फ़ोन ले लेगी?
पुलिस सबूत के तौर पर डिवाइस या संबंधित डेटा की फ़ोरेंसिक प्रति माँग सकती है। आप कह सकती हैं कि सिर्फ़ संबंधित चैट या फ़ाइलें निकाली जाएँ और फ़ोन जल्दी लौटाया जाए। तब तक प्रिंटआउट और चैट एक्सपोर्ट दें। असहज हों तो विधिक सहायता वकील को साथ ले जाएँ।
उत्पीड़क गुमनाम हो या विदेश में हो तो?
फिर भी शिकायत दर्ज कराएँ। पुलिस प्लेटफ़ॉर्म से अकाउंट का ब्योरा और IP लॉग माँग सकती है, और बहुत-से "गुमनाम" अकाउंट इसी तरह पकड़े जाते हैं। विदेशी अकाउंट के लिए भी भारतीय पुलिस सामग्री हटवा सकती है और प्लेटफ़ॉर्म के भारत के शिकायत अधिकारी के ज़रिए काम कर सकती है। हटवाना इस पर निर्भर नहीं कि पोस्ट किसने किया।
क्या पुरुष इन अपराधों का शिकार हो सकता है?
धारा 77, 78 और 79 BNS महिलाओं की रक्षा करती हैं। स्टॉकिंग या तस्वीरों के दुरुपयोग का सामना कर रहा पुरुष IT अधिनियम की धारा 66E, 67 और 67A, जो लिंग-निरपेक्ष हैं, और BNS के आपराधिक अभित्रास (धारा 351) व जबरन वसूली के प्रावधान इस्तेमाल कर सकता है। वह उसी तरह cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट और FIR कर सकता है।
यह लेख जागरूकता के लिए सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। अपनी स्थिति के लिए किसी वकील से सलाह लें या मुफ़्त क़ानूनी सहायता के लिए 15100 पर कॉल करें।