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A construction worker cutting steel at a site in Delhiश्रम

फ़ोटो: Ramesh Lalwani, Wikimedia Commons, CC BY 2.0. सांकेतिक चित्र.

नौकरी से ग़लत तरीक़े से निकाला गया? आपके अधिकार और रास्ते

न्याय पाठशाला8 मिनट✓ समीक्षा और अद्यतन: अक्टूबर 2026Read in English

नोटिस, छँटनी मुआवज़ा, 2 कार्य दिवस में पूरा बकाया, और शिकायत समिति, सुलह अधिकारी व ट्रिब्यूनल तक जाने का तरीक़ा।

क़ानून: धाराएँ 4, 70 · औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 · धारा 17(2), वेतन संहिता, 2019

संक्षेप में

  • अगर आप "कर्मकार" (worker) हैं और एक साल लगातार काम कर चुके हैं, तो एक महीने के लिखित नोटिस (या उसकी जगह वेतन) और हर पूरे साल के लिए 15 दिन के औसत वेतन के मुआवज़े के बिना आपकी छँटनी नहीं हो सकती धारा 70 IR संहिता।
  • आप किसी भी वजह से नौकरी छोड़ें, आपका पूरा वेतन दो कार्य दिवसों में देना होगा धारा 17(2) वेतन संहिता।
  • "कदाचार" (misconduct) के आरोप में निकाले जाने से पहले आपको आरोप बताए जाने और जवाब का पूरा मौक़ा मिलना चाहिए।
  • बर्ख़ास्तगी को श्रम विभाग के सुलह अधिकारी के सामने और फिर सीधे औद्योगिक न्यायाधिकरण (Industrial Tribunal) में दो साल के अंदर चुनौती दी जा सकती है धारा 4(10)–(11) IR संहिता।
  • जिस इस्तीफ़े या "फ़ुल एंड फ़ाइनल" पर आप सहमत नहीं, उस पर दस्तख़त न करें। मुफ़्त क़ानूनी मदद: 15100।

आपसे कहा गया कि कल से मत आना, कभी फ़ोन पर, कभी बिना कारण वाली चिट्ठी से। किराया, स्कूल फ़ीस और EMI नहीं रुकते। बहुत लोग मानते हैं कि भारत में मालिक किसी को भी, कभी भी निकाल सकता है। ज़्यादातर कामगारों के लिए यह क़ानून नहीं है। यह लेख बताता है कि बर्ख़ास्तगी कब ग़ैरक़ानूनी है, आपको कौन-सा पैसा मिलना ही चाहिए, और कहाँ जाना है।

किसे सुरक्षा मिलती है, किस क़ानून से

21 नवंबर 2025 से औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 (IR संहिता) ने औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की जगह ले ली है। इसकी सबसे मज़बूत सुरक्षा "कर्मकार" (worker) के लिए है: जो भी वेतन पर शारीरिक, अकुशल, कुशल, तकनीकी, ऑपरेशनल, लिपिकीय (clerical) या पर्यवेक्षी (supervisory) काम करता है। दो समूह बाहर हैं: जो मुख्य रूप से प्रबंधकीय या प्रशासनिक काम करते हैं, और ₹18,000 महीने (या केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित ज़्यादा राशि) से अधिक कमाने वाले सुपरवाइज़र धारा 2(zr) IR संहिता। फ़ैसला आपके पद के नाम से नहीं, आपके असल रोज़ के काम से होता है।

अगर आप "कर्मकार" नहीं हैं (जैसे वरिष्ठ मैनेजर), तो आपके अधिकार मुख्य रूप से नियुक्ति पत्र, कंपनी की नीति और सिविल अदालत से आते हैं। आप फिर भी अनुबंध के तहत नोटिस वेतन, बकाया वेतन और हर्जाना माँग सकते हैं।

सरकारी कर्मचारियों को अतिरिक्त सुरक्षा है: संविधान के अनुच्छेद 311 के तहत किसी सिविल सेवक को बिना जाँच, जिसमें उसे आरोप बताए जाएँ और सुना जाए, बर्ख़ास्त या पदावनत नहीं किया जा सकता। उनका रास्ता आमतौर पर केंद्रीय या राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण है।

बर्ख़ास्तगी कब ग़ैरक़ानूनी है

1. बिना निष्पक्ष जाँच के कदाचार पर बर्ख़ास्तगी

अगर मालिक कहे कि आपने कुछ ग़लत किया (चोरी, ग़ैरहाज़िरी, अनुशासनहीनता), तो नैसर्गिक न्याय (natural justice, यानी आरोप जानने और अपनी बात रखने का हक़) के लिए ज़रूरी है: लिखित आरोप-पत्र (charge-sheet), जवाब का समय, और आमतौर पर घरेलू जाँच (domestic inquiry, यानी अंदरूनी सुनवाई) जिसमें आप सबूतों का जवाब दे सकें और मदद के लिए किसी साथी को ला सकें। इसके बिना बर्ख़ास्तगी ट्रिब्यूनल रद्द कर सकता है।

2. बिना नोटिस या मुआवज़े के छँटनी

छँटनी (retrenchment) का मतलब है सज़ा के अलावा किसी भी कारण से नौकरी ख़त्म करना: ख़र्च घटाना, विभाग बंद करना, "रीस्ट्रक्चरिंग"। इसमें सेवानिवृत्ति, अनुबंध के तहत बीमारी के कारण समाप्ति, या तय अवधि के अनुबंध का अपने आप ख़त्म होना शामिल नहीं। कम से कम एक साल लगातार सेवा वाले कर्मकार की छँटनी से पहले मालिक को धारा 70 IR संहिता:

  • कारण बताते हुए एक महीने का लिखित नोटिस देना होगा, या उस महीने का वेतन देना होगा;
  • हर पूरे साल की सेवा (और छह महीने से ज़्यादा के हिस्से) के लिए 15 दिन के औसत वेतन के बराबर छँटनी मुआवज़ा देना होगा;
  • उपयुक्त सरकार को सूचना भेजनी होगी;
  • आमतौर पर उस श्रेणी में "जो बाद में आया, वह पहले जाएगा" का नियम मानना होगा।

300 या अधिक कर्मकारों वाले कारख़ानों, खदानों और बाग़ानों में ले-ऑफ़, छँटनी या बंदी के लिए सरकार की पहले से अनुमति भी ज़रूरी है। संहिता के तहत छँटनी करने वाले मालिक को 15 दिन का अंतिम वेतन कर्मकार पुनर्कौशल कोष (re-skilling fund) में भी देना होता है, जिससे यह राशि 45 दिन के अंदर छँटनी हुए कर्मकार के खाते में जानी चाहिए।

3. ऐसी बर्ख़ास्तगी जो क़ानून पूरी तरह मना करता है

  • किसी महिला को गर्भावस्था या मातृत्व अवकाश के कारण निकालना।
  • यूनियन से जुड़ने या बनाने, या यौन उत्पीड़न की शिकायत करने पर सज़ा देना।
  • जाति, धर्म, लिंग, विकलांगता जैसे आधार पर भेदभाव।
  • धमकाकर "इस्तीफ़ा" लिखवाना: जो इस्तीफ़ा स्वेच्छा से नहीं दिया गया, उसे बर्ख़ास्तगी माना जा सकता है।

IR संहिता में तय अवधि का रोज़गार (fixed-term employment) वैध है, और अनुबंध का तय तारीख़ पर ख़त्म होना छँटनी नहीं है। लेकिन ऐसे कर्मकार को वही वेतन, घंटे और सुविधाएँ मिलनी चाहिए जो उसी काम के स्थायी कर्मकार को मिलती हैं, और सिर्फ़ क़ानून से बचने के लिए लगातार छोटे अनुबंध देने को चुनौती दी जा सकती है।

जो पैसा आपको मिलना ही चाहिए

आपने इस्तीफ़ा दिया हो, बर्ख़ास्त हुए हों या छँटनी हुई हो, मालिक को आख़िरी दिन से दो कार्य दिवसों में पूरा बकाया वेतन देना होगा धारा 17(2) वेतन संहिता। इसके अलावा देखें:

  • जहाँ लागू हो, नोटिस वेतन और छँटनी मुआवज़ा।
  • बची हुई अर्जित छुट्टी का नक़दीकरण (leave encashment), आपकी शर्तों और क़ानून के अनुसार।
  • सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत ग्रेच्युटी, आमतौर पर पाँच साल लगातार सेवा के बाद (तय अवधि वाले कर्मचारियों को एक साल बाद)।
  • आपका भविष्य निधि (PF): UAN से EPFO पोर्टल पर निकालें या अगली नौकरी में ट्रांसफ़र करें।
  • रिलीविंग लेटर और अनुभव प्रमाणपत्र। दबाव डालने के लिए इन्हें रोका नहीं जा सकता।

क़दम दर क़दम: बर्ख़ास्तगी को चुनौती

  1. लिखित में लीजिए। HR को ईमेल या चिट्ठी लिखकर बर्ख़ास्तगी पत्र, कारण और बकाये का हिसाब माँगें। कॉपी रखें। अगर आपने इस्तीफ़ा नहीं दिया, तो "इस्तीफ़ा" लिखे किसी काग़ज़ पर दस्तख़त न करें।
  2. शिकायत उठाइए। 20 या ज़्यादा कर्मकारों वाले हर प्रतिष्ठान में शिकायत निवारण समिति (Grievance Redressal Committee) होनी चाहिए। विवाद पैदा होने के एक साल के अंदर आप इसमें आवेदन दे सकते हैं; इसे 30 दिन में कार्यवाही पूरी करनी चाहिए धारा 4 IR संहिता।
  3. सुलह अधिकारी (conciliation officer) को ज़िला श्रम कार्यालय में आवेदन दें (केंद्र सरकार के अधीन प्रतिष्ठानों के लिए samadhan.labour.gov.in पर ऑनलाइन)। अधिकारी दोनों पक्षों को बुलाकर समझौते की कोशिश करता है; दस्तख़त हुआ समझौता बाध्यकारी होता है।
  4. सीधे औद्योगिक न्यायाधिकरण जाइए। बर्ख़ास्तगी, छँटनी या किसी भी तरह की सेवा-समाप्ति में, सुलह आवेदन के 45 दिन बाद आप ख़ुद ट्रिब्यूनल में आवेदन दे सकते हैं धारा 4(10) IR संहिता। यह सेवा-समाप्ति के दो साल के अंदर होना चाहिए धारा 4(11) IR संहिता। ट्रिब्यूनल बहाली, पिछला वेतन (back wages) या मुआवज़ा दिला सकता है।
  5. सिर्फ़ वेतन बकाया है? श्रम विभाग के ज़रिए वेतन संहिता के तहत प्राधिकारी के सामने वेतन दावा भी कर सकते हैं।
  6. "कर्मकार" नहीं हैं? अनुबंध के तहत वकील का नोटिस भेजें, फिर सिविल मुक़दमा करें, या जहाँ अनुबंध में हो, मध्यस्थता (arbitration) का रास्ता लें।
सुझावलड़ाई के दौरान कमाते रहिए। दूसरी नौकरी करने से आपका केस ख़त्म नहीं होता, पर ट्रिब्यूनल को सच बताइए, क्योंकि कहीं और नौकरी करने पर पिछला वेतन अक्सर कम कर दिया जाता है।
उदाहरण

रमेश पुणे की एक ऑटो-पार्ट्स यूनिट में छह साल से मशीन ऑपरेटर था। एक शाम सुपरवाइज़र ने कहा, "कल मत आना, लाइन बंद है," और कोई चिट्ठी नहीं दी। रमेश ने उसी रात HR को ईमेल करके कारण और बकाया माँगा। जवाब न आने पर उसने वेतन पर्चियों और उस ईमेल के साथ सुलह अधिकारी को आवेदन दिया। बैठक में कंपनी एक महीने का नोटिस वेतन, छँटनी मुआवज़े के रूप में 90 दिन का औसत वेतन (15 दिन × 6 साल), छुट्टी नक़दीकरण और ग्रेच्युटी देने पर राज़ी हुई। रमेश ने हर रक़म जाँचने के बाद ही समझौते पर दस्तख़त किए।

ये तैयार रखें

  • नियुक्ति पत्र, पहचान पत्र, वेतन पर्चियाँ और वेतन जमा होने वाले बैंक स्टेटमेंट।
  • बर्ख़ास्तगी पत्र, या वह मैसेज, ईमेल या व्हाट्सऐप जिसमें आपको जाने को कहा गया।
  • हाज़िरी रिकॉर्ड, चेतावनी पत्र, आरोप-पत्र और जाँच के काग़ज़, अगर हों।
  • आपका UAN (PF नंबर) और ESIC नंबर।
  • भेजी गई हर चिट्ठी की कॉपी, कूरियर या ईमेल डिलीवरी के सबूत के साथ।
सावधान

सबसे आम ग़लती है आख़िरी वेतन निकलवाने के लिए "स्वैच्छिक इस्तीफ़े" या "फ़ुल एंड फ़ाइनल सेटलमेंट" पर दस्तख़त कर देना। कमाया हुआ वेतन वैसे भी देना ही होगा, और दस्तख़त किया इस्तीफ़ा बाद की चुनौती को बहुत मुश्किल बना देता है।

कहाँ जाएँ

  • पहले: मालिक का HR, फिर शिकायत निवारण समिति।
  • फिर: ज़िला श्रम कार्यालय का सुलह अधिकारी, या केंद्र सरकार के अधीन प्रतिष्ठानों के लिए samadhan.labour.gov.in।
  • फिर: औद्योगिक न्यायाधिकरण, सुलह के 45 दिन बाद और सेवा-समाप्ति के दो साल के अंदर।
  • बर्ख़ास्तगी यौन उत्पीड़न से जुड़ी हो: आंतरिक समिति या स्थानीय समिति, या shebox.wcd.gov.in; महिला हेल्पलाइन 181।
  • मुफ़्त वकील: 15100 या ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण (nalsa.gov.in)।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या मालिक बिना कारण बताए मुझे निकाल सकता है?

अगर आप औद्योगिक संबंध संहिता के तहत "कर्मकार" हैं, तो नहीं। कदाचार पर बर्ख़ास्तगी के लिए आरोप और निष्पक्ष सुनवाई ज़रूरी है, और एक साल की सेवा होने पर छँटनी के लिए एक महीने का नोटिस (या वेतन) और मुआवज़ा ज़रूरी है। मैनेजरों पर मुख्य रूप से उनका अनुबंध लागू होता है, जिसमें आमतौर पर नोटिस या नोटिस वेतन ज़रूरी होता है।

मुझे कितना छँटनी मुआवज़ा मिलेगा?

हर पूरे साल की लगातार सेवा के लिए 15 दिन का औसत वेतन, और छह महीने से ज़्यादा का हिस्सा एक साल गिना जाता है (धारा 70 IR संहिता)। यह नोटिस वेतन, बकाया वेतन, छुट्टी नक़दीकरण और ग्रेच्युटी के अलावा है।

बर्ख़ास्तगी को चुनौती देने की समय-सीमा क्या है?

सुलह आवेदन के 45 दिन बाद आप सीधे औद्योगिक न्यायाधिकरण जा सकते हैं, और आवेदन सेवा-समाप्ति की तारीख़ से दो साल के अंदर होना चाहिए (धारा 4(11) IR संहिता)। जल्दी करें: सबूत और गवाह समय के साथ कमज़ोर पड़ते हैं।

आख़िरी वेतन कब तक मिलना चाहिए?

हटाए जाने, बर्ख़ास्तगी, छँटनी या इस्तीफ़े के दो कार्य दिवसों के अंदर (धारा 17(2) वेतन संहिता, 2019)। न मिले तो श्रम विभाग में शिकायत करें; समझौते पर दस्तख़त कराने के लिए मालिक आपका वेतन नहीं रोक सकता।

यह लेख जागरूकता के लिए सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। अपनी स्थिति के लिए किसी वकील से सलाह लें या मुफ़्त क़ानूनी सहायता के लिए 15100 पर कॉल करें।

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