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फ़ोटो: Pinakpani, Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0. सांकेतिक चित्र.

भारत में गर्भपात: MTP क़ानून क्या इजाज़त देता है, किसकी सहमति चाहिए

न्याय पाठशाला7 मिनट✓ समीक्षा और अद्यतन: अक्टूबर 2026Read in English

भारत में क़ानूनी गर्भपात: 20 और 24 हफ़्ते की सीमा, फ़ैसला किसका, पति की सहमति ज़रूरी नहीं, अविवाहित महिलाएँ और नाबालिग, कहाँ जाएँ, ख़र्च और गोपनीयता।

क़ानून: धारा 3, 4, 5 और 5A, गर्भ का चिकित्सकीय समापन अधिनियम, 1971 (2021 में संशोधित) · नियम 3B, MTP नियम, 2003 · अनुच्छेद 21, भारत का संविधान · X बनाम प्रिंसिपल सेक्रेटरी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग (2022)

संक्षेप में

  • MTP क़ानून में तय आधारों पर भारत में गर्भपात (abortion) क़ानूनी है: 20 हफ़्ते तक एक डॉक्टर की राय पर, 20–24 हफ़्ते में तय श्रेणियों की महिलाओं के लिए दो डॉक्टरों की राय पर, और 24 हफ़्ते के बाद सिर्फ़ मेडिकल बोर्ड या अदालत के ज़रिए।
  • आप 18 या उससे ज़्यादा उम्र की हैं तो सिर्फ़ आपकी सहमति काफ़ी है। पति, साथी या माता-पिता की मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं।
  • अविवाहित महिलाओं को भी विवाहित महिलाओं जैसा ही अधिकार है (X बनाम प्रिंसिपल सेक्रेटरी, 2022)।
  • सरकारी अस्पताल के स्त्री रोग विभाग में जाएँ; सेवा मुफ़्त या कम ख़र्च में मिलती है। आपकी पहचान क़ानूनन गोपनीय है (धारा 5A MTP Act)।
  • बिना पर्चे के गर्भपात की गोलियाँ न ख़रीदें। मुफ़्त क़ानूनी मदद: 15100।

बहुत-सी महिलाएँ मानती हैं कि भारत में गर्भपात ग़ैरक़ानूनी है, या इसके लिए पति या परिवार के दस्तख़त चाहिए। दोनों बातें ग़लत हैं। इन्हीं भ्रमों की वजह से कुछ महिलाएँ असुरक्षित तरीक़े अपनाती हैं और जान जोखिम में डालती हैं। 1971 से तय शर्तों पर गर्भपात क़ानूनी है। गर्भ का चिकित्सकीय समापन अधिनियम, 1971 (MTP Act), जो 2021 में संशोधित हुआ, बताता है कि गर्भ कब, कहाँ और किसके द्वारा समाप्त किया जा सकता है। यह गाइड उन सवालों के जवाब देती है जो महिलाएँ सचमुच पूछती हैं: कितने हफ़्ते तक, किसकी इजाज़त, कहाँ जाएँ, और अस्पताल मना कर दे तो क्या करें।

गर्भपात कब किया जा सकता है

धारा 3 MTP Act के तहत पंजीकृत चिकित्सक (registered medical practitioner, RMP, यानी नियमों में तय प्रशिक्षण वाला डॉक्टर) गर्भ समाप्त कर सकता है अगर उसे जारी रखने से महिला की जान को ख़तरा हो या उसके शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर चोट पहुँचे, या बच्चे के गंभीर शारीरिक या मानसिक विकृति के साथ पैदा होने का पर्याप्त जोखिम हो। क़ानून ख़ुद कहता है कि बलात्कार से हुए गर्भ की, या महिला या उसके साथी द्वारा इस्तेमाल किए गर्भनिरोधक के फेल होने से हुए गर्भ की पीड़ा को मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर चोट माना जाएगा। यानी "कंडोम फट गया" या "गोली काम नहीं आई" एक क़ानूनी आधार है।

कितने डॉक्टरों की राय चाहिए, यह गर्भ की अवधि पर निर्भर है:

  • 20 हफ़्ते तक: एक RMP की राय (धारा 3(2)(a))।
  • 20 से 24 हफ़्ते: दो RMP की राय, नियम 3B, MTP नियम में सूचीबद्ध श्रेणियों की महिलाओं के लिए (धारा 3(2)(b)): यौन हमले, बलात्कार या अनाचार की पीड़िताएँ; नाबालिग; जिनकी वैवाहिक स्थिति गर्भावस्था के दौरान बदली (विधवा या तलाक़शुदा); शारीरिक दिव्यांगता वाली महिलाएँ; मानसिक रोग से पीड़ित महिलाएँ; भ्रूण में विकृति के मामले; और सरकार द्वारा घोषित मानवीय संकट या आपदा की स्थिति में महिलाएँ।
  • 24 हफ़्ते के बाद: सिर्फ़ तब, जब राज्य का मेडिकल बोर्ड भ्रूण में गंभीर विकृति पाए (धारा 3(2B))। 2021 के नियम बोर्ड से तीन दिन में फ़ैसला करने को कहते हैं।
  • जान बचाने के लिए किसी भी समय: महिला की जान बचाने के लिए तुरंत ज़रूरी हो तो एक डॉक्टर कभी भी, कहीं भी गर्भ समाप्त कर सकता है (धारा 5)।

दूसरी स्थितियों में 24 हफ़्ते के बाद महिलाओं ने हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है, जिन्होंने आमतौर पर मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के बाद कुछ मामलों में इजाज़त दी और कुछ में मना किया। मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने एक नाबालिग बलात्कार पीड़िता के मामले में कहा कि संसद ऐसे मामलों में समय-सीमा हटाने पर विचार कर सकती है। अक्टूबर 2026 तक क़ानून बदला नहीं है।

किसकी सहमति चाहिए

वयस्क महिला की अपनी लिखित सहमति काफ़ी है (धारा 3(4))। क़ानून पति, साथी, माता-पिता या ससुराल वालों की सहमति नहीं माँगता, और जो अस्पताल इसकी माँग करता है वह क़ानून से बाहर जा रहा है। 18 साल से कम उम्र की लड़की, या मानसिक रोग के कारण सहमति देने में असमर्थ महिला के लिए अभिभावक की लिखित सहमति चाहिए।

X बनाम प्रिंसिपल सेक्रेटरी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग (2022) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि "वैवाहिक स्थिति में बदलाव" की श्रेणी को अविवाहित महिलाओं को बाहर रखने के लिए नहीं पढ़ा जा सकता: सहमति के रिश्ते में रह रही महिला को भी 24 हफ़्ते तक गर्भपात का वही अधिकार है जो विवाहित महिला को। कोर्ट ने यह भी कहा कि MTP क़ानून के लिए "बलात्कार" में पति द्वारा ज़बरदस्ती शामिल है, इसलिए विवाहित महिला बिना FIR के पीड़िता के रूप में गर्भपात करा सकती है। कोर्ट ने इन अधिकारों को अनुच्छेद 21 के तहत प्रजनन स्वायत्तता, गरिमा और निजता से जोड़ा।

सुझाव

बलात्कार के आधार पर गर्भपात के लिए FIR या पुलिस शिकायत ज़रूरी नहीं है। डॉक्टर आपके बयान पर काम करता है। केस दर्ज कराना आपका अलग फ़ैसला है।

कहाँ और कैसे होता है

  • गर्भपात RMP द्वारा सरकारी अस्पताल या सरकार से मंज़ूर जगह पर ही होना चाहिए (धारा 4)। निजी क्लिनिक में मंज़ूरी का प्रमाणपत्र दिखाने को कहें।
  • दवाओं से शुरुआती गर्भपात ("MTP गोली") नियमों के तहत नौ हफ़्ते तक क़ानूनी है, लेकिन सिर्फ़ तब जब ऐसे RMP ने लिखी हो जिसकी पहुँच आपात स्थिति के लिए किसी मंज़ूरशुदा अस्पताल तक हो। दुकान या ऑनलाइन से बिना पर्चे ख़रीदी गोलियाँ बेचना ग़ैरक़ानूनी है और लेना ख़तरनाक।
  • सरकारी अस्पताल और कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र यह सेवा मुफ़्त देते हैं। निजी अस्पताल शुल्क लेते हैं; हाँ करने से पहले ख़र्च लिखित में माँगें।
  • आपका नाम और ब्योरा गोपनीय है। जो RMP इसे क़ानून से अधिकृत व्यक्ति के अलावा किसी को बताता है, वह अपराध करता है (धारा 5A)। अस्पताल आपके परिवार को फ़ोन नहीं कर सकता।
  • भ्रूण का लिंग पता करना, या लिंग की वजह से गर्भ समाप्त करना, PC-PNDT अधिनियम, 1994 के तहत अलग अपराध है। MTP क़ानून इसकी इजाज़त नहीं देता।

क़दम दर क़दम

  1. गर्भ और उसकी अवधि की पुष्टि करें, सरकारी अस्पताल या मंज़ूरशुदा क्लिनिक में यूरिन टेस्ट और अल्ट्रासाउंड से। हफ़्ते आख़िरी माहवारी के पहले दिन से गिने जाते हैं, पता चलने के दिन से नहीं।
  2. स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलें और साफ़ कहें कि आप गर्भ समाप्त करना चाहती हैं। 20 हफ़्ते के भीतर हैं तो एक डॉक्टर की राय काफ़ी है। सहमति फ़ॉर्म पर आप ख़ुद दस्तख़त करती हैं; कोई और नहीं।
  3. डॉक्टर के साथ तरीक़ा चुनें: दवाएँ (नौ हफ़्ते तक) या छोटी-सी प्रक्रिया। पूछें कि क्या उम्मीद करें, कब वापस आना है, और किन लक्षणों में तुरंत अस्पताल आना है।
  4. अस्पताल मना करे या टाले, तो इनकार लिखित में माँगें और उसी दिन ज़िला मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) या सिविल सर्जन के पास जाएँ। अविवाहित होने या पति के दस्तख़त न होने की वजह से इनकार ग़ैरक़ानूनी है।
  5. 24 हफ़्ते पार हो गए हों, या बोर्ड मना कर दे, तो तुरंत ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण (15100) से संपर्क करें; हाई कोर्ट याचिका कुछ दिनों में सुनी जा सकती है, पर हर हफ़्ता मायने रखता है।
उदाहरण

पुणे में काम करने वाली 24 साल की अविवाहित मीना गर्भनिरोधक फेल होने से 11 हफ़्ते की गर्भवती है। एक निजी क्लिनिक कहता है कि "पति या पिता" के दस्तख़त चाहिए। मीना इसके बजाय ज़िला सरकारी अस्पताल के स्त्री रोग OPD जाती है, अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट दिखाती है और सहमति फ़ॉर्म पर ख़ुद दस्तख़त करती है। डॉक्टर पुष्टि करती है कि वह 20 हफ़्ते के भीतर है, प्रक्रिया समझाती है, और अगले दिन बिना किसी ख़र्च के गर्भपात हो जाता है। उसके परिवार को कोई सूचना नहीं दी जाती। क्लिनिक की माँग का क़ानून में कोई आधार नहीं था: MTP क़ानून में वयस्क महिला की अपनी सहमति ही सब कुछ है।

ये तैयार रखें

  • कोई भी फ़ोटो पहचान पत्र (आधार, वोटर आईडी); 18 के आसपास हों तो उम्र का सबूत ज़रूरी
  • अल्ट्रासाउंड या प्रेग्नेंसी टेस्ट रिपोर्ट, अगर है
  • 20–24 हफ़्ते के लिए: जहाँ संभव हो अपनी श्रेणी का दस्तावेज़ (दिव्यांगता प्रमाणपत्र, मृत्यु या तलाक़ के काग़ज़); बलात्कार के मामले में आपका अपना बयान काफ़ी है
सावधान

"गर्भपात ग़ैरक़ानूनी है, इसलिए चुपचाप करा लो" सबसे ख़तरनाक भ्रम है। अप्रशिक्षित लोग और बिना पर्चे की गोलियाँ रक्तस्राव, संक्रमण और मौत का कारण बनती हैं। अपराध ग़ैर-पंजीकृत व्यक्ति से या बिना मंज़ूरी की जगह पर गर्भपात कराना है, गर्भपात ख़ुद नहीं। जल्दी जाएँ, सरकारी अस्पताल जाएँ, और गोपनीयता के अपने अधिकार पर ज़ोर दें।

कहाँ जाएँ

  • सरकारी ज़िला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज का स्त्री एवं प्रसूति रोग OPD; शुरुआती गर्भपात के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र
  • इनकार या देरी: ज़िला मुख्य चिकित्सा अधिकारी / सिविल सर्जन; राज्य स्वास्थ्य विभाग की शिकायत लाइन
  • यौन हिंसा: 112, महिला हेल्पलाइन 181; 18 से कम उम्र की लड़की के लिए 1098
  • 24 हफ़्ते के बाद या इनकार के ख़िलाफ़ अदालत में मदद: 15100 (NALSA मुफ़्त क़ानूनी सहायता), ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण
  • सरकारी अस्पताल की शिकायत: pgportal.gov.in

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या गर्भपात के लिए पति या माता-पिता की सहमति चाहिए?

नहीं। आप 18 या उससे ज़्यादा की हैं तो MTP क़ानून सिर्फ़ आपकी लिखित सहमति माँगता है। जो अस्पताल पति या माता-पिता के दस्तख़त माँगता है, वह ऐसी शर्त जोड़ रहा है जो क़ानून में है ही नहीं। सिर्फ़ 18 से कम उम्र की लड़की, या मानसिक रोग के कारण सहमति देने में असमर्थ महिला के लिए अभिभावक की लिखित सहमति चाहिए।

क्या अविवाहित महिला भारत में क़ानूनी रूप से गर्भपात करा सकती है?

हाँ। MTP क़ानून के आधार सभी महिलाओं पर लागू हैं। X बनाम प्रिंसिपल सेक्रेटरी (2022) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सहमति के रिश्ते में रह रही अविवाहित महिलाओं को विवाहित महिलाओं जैसा ही 24 हफ़्ते तक गर्भपात का अधिकार है, और उनके साथ अलग व्यवहार असंवैधानिक होगा।

कितने हफ़्ते तक गर्भपात की इजाज़त है?

क़ानून के किसी भी आधार पर, गर्भनिरोधक फेल होने समेत, 20 हफ़्ते तक एक डॉक्टर की राय पर। 20 से 24 हफ़्ते में दो डॉक्टरों की राय चाहिए और आपका किसी सूचीबद्ध श्रेणी में होना ज़रूरी है, जैसे बलात्कार पीड़िता, नाबालिग, गर्भावस्था में विधवा या तलाक़शुदा, दिव्यांगता या भ्रूण विकृति। 24 हफ़्ते के बाद सिर्फ़ मेडिकल बोर्ड (भ्रूण विकृति के लिए) या अदालत इजाज़त दे सकती है, जान बचाने के मामले को छोड़कर।

क्या अस्पताल मेरे गर्भपात की ख़बर पुलिस या परिवार को देगा?

नहीं। क़ानून की धारा 5A के तहत आपका ब्योरा गोपनीय है और अस्पताल आपके परिवार को सूचित नहीं कर सकता। अनिवार्य रिपोर्ट सिर्फ़ तब होती है जब महिला 18 से कम उम्र की हो, क्योंकि नाबालिग के साथ यौन संबंध POCSO के तहत अपराध है। तब भी सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह और उसका अभिभावक चाहें तो उसका नाम बताने की ज़रूरत नहीं।

क्या मैं घर पर गर्भपात की गोलियाँ ले सकती हूँ?

सिर्फ़ तब, जब किसी RMP ने यह पुष्टि करके कि गर्भ नौ हफ़्ते के भीतर है और अस्थानिक (ectopic) गर्भ नहीं है, उन्हें लिखा हो। डॉक्टर बताएगा कि कितना रक्तस्राव सामान्य है और कब लौटना है। केमिस्ट या ऑनलाइन से बिना पर्चे गोलियाँ ख़रीदना असुरक्षित है और उनकी बिक्री ग़ैरक़ानूनी; अधूरा गर्भपात और भारी रक्तस्राव आम नतीजे हैं।

यह लेख जागरूकता के लिए सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। अपनी स्थिति के लिए किसी वकील से सलाह लें या मुफ़्त क़ानूनी सहायता के लिए 15100 पर कॉल करें।

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