भारत में बच्चा गोद लेने का क़ानूनी तरीक़ा: CARA, पात्रता, HAMA
कौन गोद ले सकता है, CARA/CARINGS पर पंजीकरण से ज़िला मजिस्ट्रेट के आदेश तक के क़दम, HAMA के तहत परिवार में गोद लेना, और अनौपचारिक गोद लेना क्यों ख़तरनाक है।
संक्षेप में
- दो क़ानूनी रास्ते हैं: अनाथ, परित्यक्त और सौंपे गए बच्चों के लिए JJ Act का रास्ता, CARA के ज़रिए (सबके लिए खुला), और हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध परिवारों के भीतर गोद लेने के लिए हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम (HAMA)।
- CARA के ऑनलाइन पोर्टल (CARINGS) पर पंजीकरण करें। विशेषीकृत दत्तक ग्रहण एजेंसी आपका गृह अध्ययन करती है; आप वरिष्ठता के क्रम में रेफ़रल का इंतज़ार करते हैं; ज़िला मजिस्ट्रेट गोद लेने का आदेश देता है (धारा 61 JJ Act)।
- सिर्फ़ तय शुल्क। बच्चे के बदले पैसे देना, या अस्पताल या बिचौलिए से बच्चा लेना अपराध है (धारा 80–81 JJ Act)।
- आदेश के बाद बच्चा "सभी उद्देश्यों के लिए" आपका है, विरासत समेत (धारा 63 JJ Act)।
- कोई लावारिस बच्चा मिले? 1098 पर कॉल करें। मुफ़्त क़ानूनी सलाह: 15100।
हर साल हज़ारों भारतीय परिवार किसी बच्चे को घर देना चाहते हैं, और देखरेख संस्थाओं में हज़ारों बच्चे परिवार का इंतज़ार करते हैं। क़ानून इन्हें सुरक्षित रूप से मिलाने के लिए है: यह पक्का करने के लिए कि बच्चा सचमुच गोद लेने के लिए मुक्त है, माता-पिता तैयार हैं, और रास्ते में कोई बच्चे को ख़रीदता-बेचता नहीं। सबसे ज़रूरी बात सीधी है। सिर्फ़ क़ानूनी प्रक्रिया से लिया गया गोद ही आपके बच्चे को बेटे या बेटी के पूरे और स्थायी अधिकार देता है। नर्सिंग होम, रिश्तेदार या एजेंट द्वारा "सौंपे गए" बच्चे को ऐसी कोई सुरक्षा नहीं, और आपको भी नहीं।
दो क़ानूनी रास्ते
रास्ता 1: JJ Act और CARA। किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 और केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) के बनाए दत्तक ग्रहण विनियम, 2022 अनाथ, परित्यक्त या सौंपे गए बच्चों (धारा 2(2) JJ Act) को गोद लेने की प्रक्रिया तय करते हैं। यह रास्ता हर भारतीय के लिए खुला है, धर्म चाहे जो हो; सुप्रीम कोर्ट ने शबनम हाशमी बनाम भारत संघ (2014) में यह पक्का किया। ऐसा बच्चा तभी गोद लिया जा सकता है जब ज़िला बाल कल्याण समिति (CWC) उसे "गोद लेने के लिए क़ानूनी रूप से मुक्त" घोषित कर दे (धारा 38 JJ Act)।
रास्ता 2: HAMA। हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 हिंदू, बौद्ध, जैन और सिखों पर लागू है, और ज़्यादातर तब इस्तेमाल होता है जब बच्चा परिवार के भीतर से गोद लिया जाए, जैसे भाई का बच्चा। गोद लेने वाले में क्षमता होनी चाहिए (धारा 7–8), बच्चा देने वाला माता-पिता या अभिभावक हो (धारा 9), बच्चा 15 साल से कम और पहले से गोद न लिया गया हो (धारा 10), और धारा 11 की शर्तें लागू होती हैं: जीवित बेटा हो तो बेटा गोद नहीं ले सकते, और लड़की गोद लेने वाला पुरुष (या लड़का गोद लेने वाली महिला) बच्चे से कम से कम 21 साल बड़ा हो। पंजीकृत दत्तक विलेख (adoption deed) वैध गोद का मज़बूत सबूत है (धारा 16)। हिंदू रिश्तेदार JJ Act का रास्ता भी अपना सकते हैं, जिससे हर जगह मान्य आधिकारिक आदेश मिलता है।
JJ Act के तहत कौन गोद ले सकता है
- आप शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से स्थिर हों, बच्चे का ख़र्च उठाने में सक्षम हों, और किसी जानलेवा बीमारी से मुक्त हों।
- विवाहित दंपति में दोनों की सहमति और कम से कम दो साल का स्थिर वैवाहिक जीवन ज़रूरी।
- अकेली महिला किसी भी लिंग का बच्चा गोद ले सकती है। अकेला पुरुष लड़की गोद नहीं ले सकता।
- उम्र की सीमा बच्चे की उम्र पर निर्भर है। दंपति की संयुक्त उम्र 2 साल तक के बच्चे के लिए 85 साल से ज़्यादा नहीं, जो 8 से 18 साल के बच्चे के लिए 110 साल तक जाती है। अकेले माता-पिता के लिए सीमा 40 से 55 साल है।
- बच्चे और हर माता-पिता के बीच कम से कम 25 साल का अंतर होना चाहिए।
- जिन दंपतियों के पहले से तीन या ज़्यादा बच्चे हैं, उन पर आमतौर पर विचार नहीं होता, सिवाय विशेष ज़रूरत वाले बच्चों, मुश्किल से रखे जा सकने वाले बच्चों, या रिश्तेदार और सौतेले माता-पिता द्वारा गोद लेने के।
उम्र पंजीकरण की तारीख़ पर गिनी जाती है। रिश्तेदार और सौतेले माता-पिता द्वारा गोद लेने की विनियमों में अपनी सरल शर्तें हैं।
क़दम दर क़दम: CARA प्रक्रिया
- ऑनलाइन पंजीकरण CARA के पोर्टल CARINGS पर करें: पहचान, पता और आय का प्रमाण, विवाह प्रमाणपत्र (विवाहित हों तो), मेडिकल फ़िटनेस प्रमाणपत्र, फ़ोटो और दो संदर्भ (references)।
- गृह अध्ययन (home study)। आपके ज़िले की विशेषीकृत दत्तक ग्रहण एजेंसी (SAA) का सामाजिक कार्यकर्ता आपके घर आता है और विनियमों में तय समय में गृह अध्ययन रिपोर्ट बनाता है। इसमें आपकी प्रेरणा, सेहत, आर्थिक स्थिति और सहारा देने वाले लोग शामिल हैं।
- प्रतीक्षा सूची और रेफ़रल। मंज़ूरी के बाद आप पंजीकरण की तारीख़ और पसंद (उम्र, लिंग, राज्य) के आधार पर वरिष्ठता सूची में आते हैं। आपकी बारी आने पर आपको मेडिकल और पृष्ठभूमि रिपोर्ट के साथ एक या ज़्यादा बच्चों की प्रोफ़ाइल मिलती है। विनियमों में तय छोटी-सी समय-सीमा में स्वीकार या आरक्षित करना होता है, इसलिए लॉगिन सक्रिय रखें।
- मुलाक़ात और गोद-पूर्व पालन (pre-adoption foster care)। आप एजेंसी में बच्चे से मिलते हैं, स्वीकृति पर दस्तख़त करते हैं, और बच्चे को गोद-पूर्व पालन में घर लाते हैं।
- गोद लेने का आदेश। एजेंसी ज़िला मजिस्ट्रेट के सामने आवेदन दाख़िल करती है, जो निजी तौर पर सुनवाई करता है और दो महीने के भीतर फ़ैसला करता है (धारा 61 JJ Act)। 2021 के संशोधन के बाद से आदेश सिविल अदालत नहीं, DM देता है।
- जन्म प्रमाणपत्र और फ़ॉलो-अप। आदेश के साथ आपको माता-पिता के रूप में आपके नाम वाला जन्म प्रमाणपत्र मिलता है। एजेंसी लगभग दो साल तक फ़ॉलो-अप मुलाक़ातें करती है यह देखने के लिए कि बच्चा कैसे रच-बस रहा है।
शुल्क CARA तय करता है और अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करता है; कोई एजेंसी इससे ज़्यादा या "दान" नहीं माँग सकती।
बड़े बच्चे, भाई-बहन और विशेष ज़रूरत वाले बच्चे बहुत ज़्यादा समय तक इंतज़ार करते हैं। जो परिवार अपनी पसंद का दायरा बढ़ाते हैं, उन्हें रेफ़रल कहीं जल्दी मिलता है, और विनियम ऐसे गोद को प्राथमिकता देते हैं।
गोद लेने का आदेश क्या करता है
धारा 63 JJ Act के तहत आदेश की तारीख़ से बच्चा सभी उद्देश्यों के लिए आपका बच्चा हो जाता है, मानो आपसे ही पैदा हुआ हो, विरासत और भरण-पोषण के समान अधिकारों के साथ। जन्म देने वाले परिवार से उसके क़ानूनी रिश्ते ख़त्म हो जाते हैं। आप बच्चे के नए नाम से नया जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल रिकॉर्ड, पासपोर्ट और आधार बनवा सकते हैं।
ग़ैरक़ानूनी गोद और बाल तस्करी
JJ Act की प्रक्रिया के बाहर बच्चा गोद लेना या देना तीन साल तक की क़ैद या एक लाख रुपये जुर्माना या दोनों से दंडनीय है (धारा 80 JJ Act)। बच्चे को बेचना या ख़रीदना पाँच साल तक की क़ैद और जुर्माना (धारा 81)। शामिल माता-पिता पर मुक़दमा चल सकता है और बच्चा हटाया जा सकता है। लावारिस बच्चा मिले तो उसे अपने पास न रखें: तुरंत 1098 या पुलिस को बुलाएँ ताकि बच्चे को देखभाल मिले और क़ानूनी प्रक्रिया शुरू हो।
इंदौर में रहने वाले, छह साल से विवाहित फ़रीदा और अनिल CARINGS पर पंजीकरण करते हैं और "2 साल तक का बच्चा, कोई भी लिंग" चुनते हैं। SAA की सामाजिक कार्यकर्ता दो बार घर आती है और गृह अध्ययन अपलोड करती है। चौदह महीने बाद उन्हें भोपाल की एक एजेंसी से 14 महीने की बच्ची की प्रोफ़ाइल और मेडिकल रिपोर्ट मिलती है। वे ऑनलाइन स्वीकार करते हैं, उससे मिलते हैं, और उसे गोद-पूर्व पालन में घर लाते हैं। एजेंसी आवेदन दाख़िल करती है; ज़िला मजिस्ट्रेट छह हफ़्ते के भीतर गोद लेने का आदेश देता है। इसके साथ उन्हें अपने नाम वाला उसका जन्म प्रमाणपत्र मिलता है। CARA के प्रकाशित शुल्क के अलावा उनसे किसी ने कुछ नहीं माँगा।
ये तैयार रखें
- PAN, आधार या पासपोर्ट; पते का प्रमाण; विवाहित हों तो विवाह प्रमाणपत्र
- ताज़ा आय प्रमाण (सैलरी स्लिप, आयकर रिटर्न या व्यवसाय के काग़ज़)
- हर माता-पिता का सरकारी या मान्यता प्राप्त डॉक्टर से मेडिकल फ़िटनेस प्रमाणपत्र
- पारिवारिक फ़ोटो और आपको अच्छी तरह जानने वाले दो लोगों के संदर्भ पत्र
- एजेंसी की हर रसीद, रिपोर्ट और पत्र की कॉपी
"डॉक्टर एक अविवाहित माँ को जानते हैं जो बच्चा दे देगी" तस्करी का सबसे पुराना जाल है। CWC की घोषणा और DM के आदेश के बिना गोद शून्य है: जन्म देने वाली माँ या कोई और सालों बाद बच्चे पर दावा कर सकता है, बच्चे को आपसे कोई विरासत नहीं मिलती, और आप पर मुक़दमा चलता है। कोई पैसे लेकर "जल्दी" बच्चा देने की बात करे तो हट जाएँ और रिपोर्ट करें।
कहाँ जाएँ
- CARA (केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण) और उसका CARINGS पोर्टल, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधीन
- अपने ज़िले की विशेषीकृत दत्तक ग्रहण एजेंसी और ज़िला बाल संरक्षण इकाई; एजेंसी की शिकायत के लिए राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसी
- बच्चे की स्थिति से जुड़े सवालों के लिए ज़िले की बाल कल्याण समिति
- लावारिस बच्चा या बच्चे की बिक्री का शक: 1098 (चाइल्डलाइन), 112
- मुफ़्त क़ानूनी सलाह, HAMA विलेख समेत: 15100 (NALSA); देरी की शिकायत: pgportal.gov.in
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
CARA से गोद लेने में कितना समय लगता है?
पंजीकरण और गृह अध्ययन में कुछ महीने लगते हैं; रेफ़रल का इंतज़ार आपकी पसंद और आपके चुने आयु वर्ग में क़ानूनी रूप से मुक्त बच्चों की संख्या पर निर्भर है। स्वस्थ शिशु के लिए इंतज़ार अक्सर एक साल से ज़्यादा होता है। उम्र, लिंग या राज्य की पसंद का दायरा बढ़ाने से यह घटता है। बच्चा रेफ़र होने के बाद क़ानूनी क़दमों में आमतौर पर कुछ महीने और लगते हैं।
क्या अकेला पुरुष या महिला भारत में गोद ले सकते हैं?
हाँ। अकेली महिला किसी भी लिंग का बच्चा गोद ले सकती है। अकेला पुरुष सिर्फ़ लड़का। अकेले माता-पिता की उम्र सीमा बच्चे की उम्र के हिसाब से 40 से 55 साल है, और 25 साल के अंतर का नियम लागू है। अकेले माता-पिता को अक्सर थोड़ा ज़्यादा इंतज़ार करना पड़ता है, पर प्रक्रिया वही है।
क्या मैं अपने भाई या बहन का बच्चा गोद ले सकता हूँ?
हाँ। हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध परिवार धारा 10 और 11 की शर्तें पूरी होने पर पंजीकृत दत्तक विलेख के साथ HAMA के तहत रिश्तेदार से गोद ले सकते हैं। कोई भी परिवार इसके बजाय JJ Act और 2022 के विनियमों की रिश्तेदार-गोद प्रक्रिया अपना सकता है, जो ज़िला मजिस्ट्रेट के आदेश पर ख़त्म होती है और जिसे स्कूल, पासपोर्ट दफ़्तर और विदेशी दूतावास बिना सवाल मानते हैं।
क्या सौतेला माता/पिता पति या पत्नी के पहले विवाह के बच्चे को गोद ले सकता है?
हाँ। दत्तक ग्रहण विनियम, 2022 में सौतेले माता-पिता द्वारा गोद लेने की प्रक्रिया है: जैविक माता/पिता और सौतेला माता/पिता साथ आवेदन करते हैं, जहाँ ज़रूरी हो दूसरे जैविक माता/पिता की सहमति ली जाती है, और ज़िला मजिस्ट्रेट आदेश देता है। प्रतीक्षा सूची नहीं होती क्योंकि बच्चा पहले से तय है।
अस्पताल से मिला बच्चा क्या बाद में क़ानूनी बनाया जा सकता है?
सिर्फ़ क़ानूनी प्रक्रिया से, और सिर्फ़ तब जब बच्चे की स्थिति इसकी इजाज़त दे। बिना देर किए बाल कल्याण समिति के पास जाएँ; वे जन्म देने वाले माता-पिता का पता लगाएँगे, और ऐसे मामलों के लिए विनियमों के प्रावधानों के तहत बच्चे को क़ानूनी रूप से मुक्त घोषित करके आपके पास रखा जा सकता है। बच्चे को चुपचाप रखना JJ Act के तहत अपराध है, इसलिए तुरंत क़ानूनी सलाह (15100) लें।
यह लेख जागरूकता के लिए सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। अपनी स्थिति के लिए किसी वकील से सलाह लें या मुफ़्त क़ानूनी सहायता के लिए 15100 पर कॉल करें।