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Voters queueing at a polling station in Shillong, 2023नागरिक

फ़ोटो: GeoEvan (polgeonow.com), Wikimedia Commons, CC BY 4.0. सांकेतिक चित्र.

मतदाता पंजीकरण और मतदान के दिन के अधिकार: फ़ॉर्म 6, छुट्टी

न्याय पाठशाला7 मिनट✓ समीक्षा और अद्यतन: अक्टूबर 2026Read in English

मतदाता सूची में नाम (फ़ॉर्म 6), सुधार या पता बदलना (फ़ॉर्म 8), कौन-सा पहचान पत्र ले जाएँ, सवेतन छुट्टी, टेंडर वोट, और किसे फ़ोन करें: 1950।

क़ानून: अनुच्छेद 326, भारत का संविधान · धारा 14, 19 और 23, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 · धारा 62 और 135B, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 · नियम 49N और 49P, निर्वाचन संचालन नियम, 1961 · धारा 169–174 BNS

संक्षेप में

  • हर नागरिक जो किसी अर्हक तारीख़ (1 जनवरी, 1 अप्रैल, 1 जुलाई या 1 अक्टूबर) को 18 साल का हो, वहाँ पंजीकरण करा सकता है जहाँ वह सामान्यतः रहता है (अनुच्छेद 326; धारा 14 और 19, RP Act 1950)।
  • पंजीकरण के लिए फ़ॉर्म 6, सुधार, पता बदलने या नया कार्ड पाने के लिए फ़ॉर्म 8, नाम हटाने के लिए फ़ॉर्म 7। voters.eci.gov.in पर ऑनलाइन या अपने बूथ लेवल अधिकारी (BLO) के ज़रिए भरें।
  • मतदाता सूची में नाम न हो तो वोटर आईडी कार्ड बेकार है। हर चुनाव से कुछ महीने पहले सूची जाँचें।
  • मतदान के दिन नियोक्ता को आपको सवेतन छुट्टी देनी होगी (धारा 135B, RP Act 1951)। EPIC या चुनाव आयोग द्वारा अधिसूचित कोई वैकल्पिक फ़ोटो पहचान पत्र साथ रखें।
  • किसी ने आपके नाम पर वोट डाल दिया? पीठासीन अधिकारी से टेंडर वोट (tendered vote) माँगें (नियम 49P)। मतदाता हेल्पलाइन: 1950।

आपका वोट वह एक पल है जब दिहाड़ी मज़दूर और मंत्री के पास बिल्कुल बराबर ताक़त होती है। फिर भी बहुत लोग इसे साधारण वजहों से खो देते हैं: नाम कभी जुड़ा ही नहीं, घर बदलने पर कट गया, या पता नहीं था कि मतदान के दिन क्या ले जाना है। यह गाइड आपको पंजीकरण से लेकर उँगली पर स्याही लगने तक ले चलती है।

वोट कौन दे सकता है

अनुच्छेद 326 वयस्क मताधिकार की गारंटी देता है। धारा 19, RP Act 1950 के तहत आप पंजीकृत हो सकते हैं अगर आप भारत के नागरिक हैं, अर्हक तारीख़ (qualifying date) को 18 साल से कम नहीं हैं, और उस निर्वाचन क्षेत्र में "सामान्यतः निवासी" हैं। निर्वाचन विधि (संशोधन) अधिनियम, 2021 के बाद से साल में चार अर्हक तारीख़ें हैं: 1 जनवरी, 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर (धारा 14(b))। आप 17 साल की उम्र से पहले ही आवेदन कर सकते हैं; अगली अर्हक तारीख़ पार करते ही नाम जुड़ जाता है।

आप सिर्फ़ वहीं वोट देते हैं जहाँ मतदाता सूची (electoral roll) में आपका नाम है। मतदान अधिकारी कार्ड नहीं, सूची देखता है। जेल या पुलिस हिरासत में बंद व्यक्ति वोट नहीं दे सकता (धारा 62(5), RP Act 1951)।

सूची में नाम जुड़वाना और सही रखना

  • फ़ॉर्म 6: नया पंजीकरण, नए निर्वाचन क्षेत्र में जाने पर भी। फ़ॉर्म 6A प्रवासी (NRI) नागरिकों के लिए; फ़ॉर्म 6B स्वेच्छा से आधार जोड़ने के लिए।
  • फ़ॉर्म 7: किसी नाम पर आपत्ति या नाम हटाने के लिए (जैसे परिवार के किसी दिवंगत सदस्य का)।
  • फ़ॉर्म 8: नाम की वर्तनी, फ़ोटो या उम्र सुधारने, निर्वाचन क्षेत्र के भीतर या बाहर पता बदलने, नया कार्ड पाने, या दिव्यांग के रूप में चिह्नित होने के लिए।

voters.eci.gov.in या चुनाव आयोग के ऐप पर ऑनलाइन भरें, या फ़ॉर्म अपने BLO को दें, जो आपके मतदान केंद्र की सूची सँभालने वाला स्थानीय अधिकारी है। उम्र का प्रमाण (जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल प्रमाणपत्र, पासपोर्ट, आधार आदि) और पते का प्रमाण (पासपोर्ट, बैंक पासबुक, राशन कार्ड, किराया अनुबंध, बिजली-पानी का बिल, या घोषणा के साथ परिवार के सदस्य की प्रविष्टि) चाहिए। निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) आपके दावे पर फ़ैसला करता है; इनकार या नाम कटने के ख़िलाफ़ आप नियमों में तय समय में ज़िला मजिस्ट्रेट या ज़िला निर्वाचन अधिकारी के पास अपील कर सकते हैं (धारा 24, RP Act 1950)।

चुनाव आयोग 2025 से चरणों में राज्यों में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision, SIR) कर रहा है। BLO गणना फ़ॉर्म लेकर घर आते हैं, प्रारूप सूची प्रकाशित होती है, और अंतिम सूची से पहले आप दावे और आपत्तियाँ दे सकते हैं। आपके यहाँ पुनरीक्षण चल रहा हो तो फ़ॉर्म समय पर लौटाएँ और प्रारूप सूची जाँचें; इस चरण में छूटे नाम ही मतदान के दिन ग़ायब मिलते हैं।

सुझाव

voters.eci.gov.in पर EPIC नंबर से या नाम, उम्र और ज़िले से अपना नाम खोजें। यह चुनाव की घोषणा होते ही करें, मतदान के दिन नहीं। किसी चुनाव की सूची जम जाने के बाद, जो नामांकन बंद होने से कुछ पहले होता है, नाम जुड़ना संभव नहीं।

मतदान के दिन क्या ले जाएँ

अपना मतदाता फ़ोटो पहचान पत्र (EPIC) ले जाएँ। न हो तो चुनाव आयोग हर चुनाव के लिए वैकल्पिक फ़ोटो दस्तावेज़ों की सूची अधिसूचित करता है, जिसमें आमतौर पर आधार, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, PAN कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, फ़ोटो वाली बैंक पासबुक और फ़ोटो वाला पेंशन दस्तावेज़ शामिल होते हैं। BLO द्वारा बाँटी गई मतदाता सूचना पर्ची बूथ ढूँढने में मदद करती है, पर पहचान का सबूत नहीं है। बूथ के अंदर मोबाइल फ़ोन की इजाज़त नहीं; प्रवेश द्वार पर जमा काउंटर के बारे में पूछें।

मतदान केंद्र पर आपके अधिकार

  • सवेतन छुट्टी। धारा 135B, RP Act 1951 के तहत किसी भी व्यवसाय, व्यापार, उद्योग या अन्य प्रतिष्ठान में काम करने वाले हर व्यक्ति को, जो लोकसभा या विधानसभा चुनाव में वोट देने का हक़दार है, मतदान के दिन बिना वेतन कटौती के छुट्टी देनी होगी। दिहाड़ी और अस्थायी कर्मचारी भी शामिल हैं। मना करने वाले नियोक्ता पर इस धारा के तहत पाँच सौ रुपये तक जुर्माना हो सकता है; ज़िला निर्वाचन अधिकारी या श्रम विभाग में शिकायत करें।
  • गुप्त मतदान। पार्टी एजेंट और अधिकारी समेत कोई भी आपसे नहीं पूछ सकता कि आपने किसे वोट दिया, न वोट देते देख सकता है।
  • ज़रूरत हो तो मदद। दिव्यांग मतदाता और 85 से ऊपर के मतदाता व्हीलचेयर, प्राथमिकता से प्रवेश, और अधिसूचित मामलों में डाक मतपत्र से घर पर मतदान माँग सकते हैं। दृष्टिहीन या अशक्त मतदाता 18 साल या उससे बड़ा साथी बूथ में ले जा सकता है (नियम 49N)।
  • टेंडर वोट। रजिस्टर में दिखे कि आपके नाम पर कोई वोट डाल चुका है, तो पीठासीन अधिकारी को बताएँ। पहचान के सवालों के जवाब देने के बाद आप मतपत्र पर टेंडर वोट डाल सकते हैं, जो अलग सीलबंद लिफ़ाफ़े में रखा जाता है (नियम 49P)। उस दिन यह गिना नहीं जाता, पर चुनाव याचिका में नतीजे को चुनौती मिले तो मायने रखता है।
  • दबाव से आज़ादी। वोट के बदले पैसे, शराब या उपहार देना रिश्वत है (धारा 170 BNS); धमकी अनुचित प्रभाव है (धारा 171 BNS); किसी और के नाम पर वोट डालना प्रतिरूपण (personation) है (धारा 172 BNS)। हर एक पर एक साल तक की क़ैद या जुर्माना या दोनों (धारा 173–174 BNS), और रिश्वत ऐसा भ्रष्ट आचरण भी है जिससे विजेता की सीट जा सकती है।

क़दम दर क़दम

  1. voters.eci.gov.in पर अपना नाम जाँचें या 1950 पर कॉल करें (अपना STD कोड लगाकर)।
  2. नाम नहीं मिला या ब्योरा ग़लत है? फ़ॉर्म 6 या फ़ॉर्म 8 ऑनलाइन भरें और संदर्भ संख्या नोट करें। आमतौर पर कुछ हफ़्ते लगते हैं; BLO सत्यापन के लिए आ सकता है।
  3. घर बदला है? नया फ़ॉर्म 6 नहीं, निवास परिवर्तन के लिए फ़ॉर्म 8 भरें, ताकि आप दो जगह पंजीकृत न हों, जो अपराध है।
  4. मंज़ूरी के बाद पोर्टल से e-EPIC डाउनलोड करें। मतदान के दिन रिश्वत, धमकी या शराब बाँटने की रिपोर्ट चुनाव आयोग के cVIGIL फ़ीचर पर फ़ोटो के साथ करें।
  5. नाम ग़लत तरीक़े से कटा हो तो पुराने EPIC नंबर के साथ तुरंत ERO को लिखें; चुनाव नज़दीक हो तो ज़िला निर्वाचन अधिकारी और हेल्पलाइन को भी बताएँ।
उदाहरण

29 साल की सलमा दो साल पहले काम के लिए लखनऊ से नोएडा आईं, पर मतदाता पंजीकरण नहीं बदला। विधानसभा चुनाव की घोषणा होने पर वे voters.eci.gov.in पर खोजती हैं और पाती हैं कि नाम अब भी लखनऊ में है, पुरानी फ़ोटो के साथ। वे निवास परिवर्तन के लिए फ़ॉर्म 8 ऑनलाइन भरती हैं, किराया अनुबंध और बिजली बिल अपलोड करती हैं, और संदर्भ संख्या पाती हैं। नोएडा का BLO सत्यापन के लिए आता है, और तीन हफ़्ते बाद उनका नाम नए EPIC नंबर के साथ नोएडा की सूची में आ जाता है। मतदान के दिन नियोक्ता धारा 135B के तहत सवेतन छुट्टी देता है, और वे घर से पाँच मिनट दूर वोट डालती हैं।

ये तैयार रखें

  • उम्र का प्रमाण: जन्म प्रमाणपत्र, कक्षा 10 का प्रमाणपत्र, पासपोर्ट या आधार
  • वर्तमान पते का प्रमाण: पासपोर्ट, बैंक पासबुक, किराया अनुबंध, बिजली-पानी का बिल या राशन कार्ड
  • हाल की पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो (ऑनलाइन के लिए डिजिटल)
  • पता बदलने या सुधार के लिए पुराना EPIC नंबर
सावधान

वोटर आईडी कार्ड होने का मतलब यह नहीं कि आप वोट दे सकते हैं। घर बदलने, मृत्यु या पुनरीक्षण में नाम कटने के बाद भी कार्ड लोगों के पास पड़े रहते हैं। सिर्फ़ मौजूदा सूची का नाम गिना जाता है। हर चुनाव से पहले जाँचें, और कभी दो जगह पंजीकरण न रखें: यह अपराध है और दोनों प्रविष्टियाँ कट सकती हैं।

कहाँ जाएँ

  • पंजीकरण और नाम कटने के लिए बूथ लेवल अधिकारी, फिर निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (आमतौर पर SDM या तहसीलदार)
  • अपील, मतदान के दिन की शिकायतों और सवेतन छुट्टी के नियम के लिए ज़िला निर्वाचन अधिकारी (ज़िला कलेक्टर)
  • मतदाता हेल्पलाइन 1950; सभी फ़ॉर्म और सूची खोज के लिए voters.eci.gov.in
  • चुनावी अपराध और आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन: चुनाव आयोग का cVIGIL; आपातकाल में 112
  • चुनाव याचिका या ग़लत तरीक़े से नाम कटने पर मुफ़्त क़ानूनी मदद: 15100 (NALSA)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मैं 1 जनवरी के बाद 18 का हुआ। क्या इस साल वोट दे सकता हूँ?

हाँ, अगर उस चुनाव की सूची अंतिम होने से पहले आने वाली चार अर्हक तारीख़ों (1 जनवरी, 1 अप्रैल, 1 जुलाई, 1 अक्टूबर) में से किसी को आप 18 के हो जाते हैं। 17 के होते ही फ़ॉर्म 6 भरें, वह अर्हक तारीख़ चुनें जिसे आप पार करेंगे, और वह तारीख़ आते ही नाम जुड़ जाता है।

मतदाता सूची से मेरा नाम कट गया। क्या करूँ?

नाम आमतौर पर BLO की इस रिपोर्ट पर कटता है कि आप वहाँ से चले गए या मिले नहीं। पते के प्रमाण के साथ फिर फ़ॉर्म 6 (या घर बदला हो तो फ़ॉर्म 8) भरें, और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को लिखकर वजह पूछें, क्योंकि नाम काटने से पहले आपको नोटिस ज़रूरी है। चुनाव नज़दीक हो तो 1950 पर कॉल करें और ज़िला निर्वाचन अधिकारी को बताएँ ताकि सूची जमने से पहले दावे पर फ़ैसला हो।

क्या नियोक्ता के लिए मतदान के दिन छुट्टी देना ज़रूरी है?

हाँ। RP Act 1951 की धारा 135B हर नियोक्ता से, निजी हो या सरकारी, कहती है कि उस लोकसभा या विधानसभा चुनाव में वोट देने के हक़दार कर्मचारियों को, दिहाड़ी मज़दूरों समेत, मतदान के दिन सवेतन छुट्टी दे। अपवाद सिर्फ़ तब है जब कर्मचारी की ग़ैरहाज़िरी से ख़तरा या भारी नुक़सान हो, और तब भी वोट देने का समय देना होगा। मना करने पर जुर्माना है।

किसी ने मेरे नाम पर पहले ही वोट डाल दिया हो तो?

वापस न लौटें। पीठासीन अधिकारी को बताएँ, पहचान के सवालों के जवाब दें, और नियम 49P के तहत टेंडर वोट डालने को कहें। आप काग़ज़ के मतपत्र पर वोट देंगे जो अलग सील करके रजिस्टर में दर्ज होता है। उस दिन यह गिना नहीं जाता, पर नतीजे को चुनौती मिले तो सबूत बनता है, और प्रतिरूपण रिकॉर्ड पर आ जाता है।

यह लेख जागरूकता के लिए सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। अपनी स्थिति के लिए किसी वकील से सलाह लें या मुफ़्त क़ानूनी सहायता के लिए 15100 पर कॉल करें।

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