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Rural job-guarantee workers desilting a village pond in Haryanaनागरिक

फ़ोटो: Mulkh Singh, Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0. सांकेतिक चित्र.

ग्रामीण रोज़गार गारंटी: मनरेगा से वीबी-जी राम जी के 125 दिन तक

न्याय पाठशाला6 मिनट✓ समीक्षा और अद्यतन: अक्टूबर 2026Read in English

1 जुलाई 2026 से मनरेगा की जगह वीबी-जी राम जी अधिनियम। काम कैसे माँगें, 125 दिन की गारंटी, मज़दूरी, भत्ता और शिकायत कहाँ करें।

क़ानून: विकसित भारत–रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम, 2025 · अनुच्छेद 41, भारत का संविधान

संक्षेप में

  • 1 जुलाई 2026 से मनरेगा की जगह वीबी-जी राम जी (VB-G RAM G) अधिनियम लागू है। अब हर ग्रामीण परिवार को साल में कम से कम 125 दिन का मज़दूरी वाला काम गारंटी से मिलेगा (पहले 100)।
  • ग्राम पंचायत में लिखित या मौखिक रूप से काम माँगें और तारीख़ वाली रसीद ज़रूर लें। 15 दिन में काम न मिले तो राज्य को बेरोज़गारी भत्ता देना होगा।
  • मज़दूरी सीधे आपके बैंक या डाकघर खाते में, हर हफ़्ते या मस्टर रोल बंद होने के 15 दिन के भीतर आएगी। देरी पर मुआवज़ा मिलेगा। कोई भी अधिसूचित मज़दूरी ₹300 प्रतिदिन से कम नहीं है।
  • e-KYC सत्यापित पुराना मनरेगा जॉब कार्ड नया कार्ड मिलने तक मान्य है।

लगभग बीस साल तक महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) ने हर ग्रामीण परिवार को साल में 100 दिन के काम का क़ानूनी हक़ दिया पहले धारा 3 मनरेगा। लाखों परिवारों के लिए इसका मतलब था सूखे दिनों में रोटी, पलायन न करने की वजह, और जब कोई काम न दे तब उचित मज़दूरी। अब वह क़ानून बदल गया है। नया क़ानून क्या कहता है और उसमें अपना हक़ कैसे लें, यह यहाँ जानिए।

1 जुलाई 2026 को क्या बदला

संसद ने विकसित भारत–रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम, 2025 पास किया, जिसे वीबी-जी राम जी कहते हैं। केंद्र ने 11 मई 2026 को अधिसूचना जारी की कि यह 1 जुलाई 2026 से पूरे ग्रामीण भारत में लागू होगा; उसी दिन मनरेगा निरस्त (repeal) हो गया। 30 जून को चल रहे काम नए ढाँचे में जारी रहे।

  • 100 की जगह 125 दिन। जिस ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक काम के लिए तैयार हैं, उसे वित्त वर्ष में कम से कम 125 दिन का मज़दूरी वाला काम गारंटी से मिलेगा।
  • खेती के मौसम में विराम। हर राज्य को पहले से ऐसी अवधि घोषित करनी होगी, साल में 60 दिन तक, बुआई और कटाई के व्यस्त मौसम में, जब योजना में काम नहीं होगा। तारीख़ें इलाक़े के हिसाब से अलग हो सकती हैं।
  • साझा ख़र्च। मज़दूरी, सामग्री और प्रशासन का ख़र्च अब ज़्यादातर राज्यों में केंद्र और राज्य 60:40 में बाँटते हैं (उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों में 90:10)। केंद्र हर राज्य का सालाना आवंटन तय करता है। कई राज्यों और मज़दूर संगठनों ने आपत्ति की है कि इससे असल में मिलने वाला काम सीमित हो सकता है; यह बहस जारी है।
  • राज्यों को अपनी योजना अधिसूचित करनी है, नया क़ानून लागू होने के छह महीने के भीतर, इसलिए 2026 में कुछ स्थानीय नियम अभी बन रहे हैं।
  • कार्ड। e-KYC सत्यापित पुराने जॉब कार्ड तब तक मान्य हैं जब तक राज्य नए ग्रामीण रोज़गार गारंटी कार्ड जारी न कर दें। सिर्फ़ e-KYC लंबित होने से काम से मना नहीं किया जा सकता।

क़दम दर क़दम: काम कैसे पाएँ

  1. परिवार का पंजीकरण कराएँ। ग्रामीण परिवार का कोई भी वयस्क सदस्य ग्राम पंचायत में पंजीकरण करा सकता है। काम करने को तैयार वयस्क सदस्यों के नाम, उम्र और फ़ोटो दें। जॉब कार्ड नहीं है तो अभी पंजीकरण करा सकते हैं।
  2. काम के लिए आवेदन करें। ग्राम पंचायत (या ब्लॉक कार्यक्रम अधिकारी) को लिखित या मौखिक आवेदन दें, कितने दिन और कब से काम चाहिए। आपको तारीख़ वाली रसीद पाने का हक़ है। उसे सँभालकर रखें।
  3. 15 दिन के भीतर काम मिलना चाहिए, आवेदन की तारीख़ से, या आपने बाद की तारीख़ माँगी हो तो उससे। अपने राज्य की घोषित विराम अवधि भी देख लें।
  4. कार्यस्थल पर देखें कि मस्टर रोल (हाज़िरी रजिस्टर) में रोज़ आपकी हाज़िरी लगे। पुरुष और महिला को बराबर मज़दूरी मिलनी चाहिए। पुराने क़ानून में पीने का पानी, छाया और प्राथमिक उपचार जैसी सुविधाएँ अनिवार्य थीं; पंचायत से पूछें कि राज्य की नई योजना में क्या है।
  5. भुगतान जाँचें अपने बैंक या डाकघर खाते में। मज़दूरी हर हफ़्ते, या मस्टर रोल बंद होने के 15 दिन के भीतर आनी चाहिए।
सुझावकाम के आवेदन की तारीख़ वाली रसीद आपका सबसे ज़रूरी काग़ज़ है। इसके बिना आप साबित नहीं कर सकते कि 15 दिन कब से गिने जाएँ, और बेरोज़गारी भत्ता लेना बहुत मुश्किल हो जाता है।

मज़दूरी, देरी का मुआवज़ा और बेरोज़गारी भत्ता

  • मज़दूरी दर। केंद्र हर राज्य की मज़दूरी दर अधिसूचित करता है। 1 जुलाई 2026 से कोई भी अधिसूचित दर ₹300 प्रतिदिन से कम नहीं है। अपनी दर ग्राम पंचायत से पूछें।
  • देरी का मुआवज़ा। मज़दूरी देर से मिले तो नियमों में तय दर से देरी का मुआवज़ा पाने का हक़ है, जो राज्य देता है। मौजूदा दर ब्लॉक कार्यालय से पूछें।
  • बेरोज़गारी भत्ता। आवेदन के 15 दिन में काम न मिले तो राज्य सरकार को अपनी अधिसूचित दर से बेरोज़गारी भत्ता देना होगा (पुराने क़ानून की तरह, पहले धारा 7 मनरेगा)।

हक़ न मिले तो

  • लिखित में माँगें। रसीद नंबर और तारीख़ें लिखकर ग्राम पंचायत और ब्लॉक कार्यक्रम अधिकारी को पत्र दें। मुहर लगी प्रति रखें।
  • शिकायत व्यवस्था। काम न मिलने, मज़दूरी या भत्ता न मिलने की शिकायत ब्लॉक और ज़िला शिकायत व्यवस्था में जाती है। नए क़ानून के शिकायत निवारण नियम 2026 में बन रहे नियमों में शामिल थे; तब तक कार्यक्रम अधिकारी और ज़िला कार्यक्रम समन्वयक (आम तौर पर ज़िलाधिकारी या ज़िला परिषद के CEO) से शिकायत करें।
  • सामाजिक अंकेक्षण और ग्राम सभा। ग्राम सभा और सामाजिक अंकेक्षण (social audit) की बैठकों में जाएँ। मस्टर रोल, माप पुस्तिका और भुगतान रिकॉर्ड देखने को माँगें। नया क़ानून कामों और भुगतानों की साप्ताहिक सार्वजनिक जानकारी भी ज़रूरी करता है।
  • RTI। ब्लॉक कार्यालय से अपने परिवार के काम और भुगतान का रिकॉर्ड माँगें।
  • क़ानूनी मदद। मुफ़्त क़ानूनी सलाह के लिए 15100 पर कॉल करें या ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण से मिलें। मज़दूर संगठन और स्थानीय संस्थाएँ भी शिकायत में मदद करती हैं।
उदाहरण

झारखंड के एक गाँव की 34 साल की रेखा पंचायत सचिव से 1 अगस्त से 30 दिन का काम माँगती है। सचिव कहता है "अभी काम नहीं है"। रेखा लिखित आवेदन पर अड़ी रहती है और तारीख़ वाली रसीद ले लेती है। 20 अगस्त तक काम नहीं मिलता। एक स्थानीय मज़दूर संगठन की मदद से वह रसीद की प्रति लगाकर ब्लॉक कार्यक्रम अधिकारी को लिखती है और बेरोज़गारी भत्ता माँगती है। एक हफ़्ते में अधिकारी गाँव के तालाब पर नया काम खुलवाता है, और ब्लॉक कार्यालय काम न मिलने वाले दिनों का भत्ता प्रोसेस करता है।

ये तैयार रखें

  • जॉब कार्ड (पुराना मनरेगा कार्ड या नया ग्रामीण रोज़गार गारंटी कार्ड)।
  • काम के हर आवेदन की तारीख़ वाली रसीद।
  • मज़दूरी जमा दिखाने वाली बैंक या डाकघर पासबुक।
  • काम के दिन, कार्यस्थल का नाम और मेट का नाम लिखा नोट, ताकि मस्टर रोल ग़लत हो तो काम आए।
सावधान

"काम नहीं है, बाद में आना" बिना रसीद के न मानें। बेरोज़गारी भत्ते का हक़ तारीख़ वाले आवेदन से ही शुरू होता है। अपना जॉब कार्ड या बैंक पासबुक किसी ठेकेदार या मेट को न दें; फ़र्ज़ी हाज़िरी और मज़दूरी हड़पने का यह आम तरीक़ा है।

कहाँ जाएँ

  • ग्राम पंचायत (सरपंच या पंचायत सचिव): पंजीकरण, काम के आवेदन, रसीद।
  • ब्लॉक कार्यक्रम अधिकारी: काम न मिलना, मज़दूरी बकाया, भत्ते का दावा।
  • ज़िला कार्यक्रम समन्वयक (ज़िलाधिकारी या ज़िला परिषद CEO), और ग्रामीण विकास मंत्रालय: rural.gov.in।
  • CPGRAMS: pgportal.gov.in। मुफ़्त क़ानूनी सहायता: 15100।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या 2026 में मनरेगा अभी भी लागू है?

नहीं। मनरेगा 1 जुलाई 2026 को निरस्त हो गया और उसकी जगह विकसित भारत–रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम, 2025 (वीबी-जी राम जी) लागू हुआ। पुराने क़ानून के काम और रिकॉर्ड आगे जारी रहे, और e-KYC सत्यापित पुराने जॉब कार्ड नए कार्ड मिलने तक मान्य हैं।

वीबी-जी राम जी में कितने दिन काम की गारंटी है?

हर ग्रामीण परिवार को वित्त वर्ष में कम से कम 125 दिन का मज़दूरी वाला काम, मनरेगा के 100 दिन से ज़्यादा। राज्य खेती के व्यस्त मौसम में साल में 60 दिन तक का विराम घोषित कर सकते हैं, जब योजना का काम नहीं होगा।

15 दिन में काम न मिले तो क्या होगा?

राज्य सरकार को अपनी अधिसूचित दर से आपको बेरोज़गारी भत्ता देना होगा। इसके लिए काम के आवेदन की तारीख़ वाली रसीद चाहिए, इसलिए हमेशा रसीद लें।

नई योजना में रोज़ की मज़दूरी कितनी है?

केंद्र हर राज्य की अलग मज़दूरी दर अधिसूचित करता है। 1 जुलाई 2026 से कोई भी अधिसूचित दर ₹300 प्रतिदिन से कम नहीं है। अपने राज्य की दर ग्राम पंचायत से पूछें।

यह लेख जागरूकता के लिए सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। अपनी स्थिति के लिए किसी वकील से सलाह लें या मुफ़्त क़ानूनी सहायता के लिए 15100 पर कॉल करें।

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