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Hands decorated with bridal mehndiनारी

फ़ोटो: AmanAgrahari01, Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0. सांकेतिक चित्र.

बाल विवाह ग़ैरक़ानूनी है: उसे कैसे रोकें और बाद में क्या होता है

न्याय पाठशाला8 मिनट✓ समीक्षा और अद्यतन: अक्टूबर 2026Read in English

शादी की क़ानूनी उम्र (महिला 18, पुरुष 21), PCMA 2006 में किसे सज़ा, शादी रोकने के लिए निषेधाज्ञा कैसे लें, 1098, और जिस बच्चे की शादी हो चुकी है उसके रास्ते।

क़ानून: धारा 2, 3, 9–13, 16 · बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 · अनुच्छेद 21 और 21A, भारत का संविधान · Society for Enlightenment and Voluntary Action v Union of India (2024)

संक्षेप में

  • जिस शादी में दुल्हन 18 से कम या दूल्हा 21 से कम हो, वह बाल विवाह है धारा 2 PCMA। यह हर धर्म और समुदाय पर लागू है।
  • बालिग़ दूल्हे, पुजारी या आयोजक, और शादी की इजाज़त देने या उसमें शामिल होने वाले माता-पिता या अभिभावक, हर एक को 2 साल तक सश्रम कारावास और ₹1 लाख तक जुर्माना हो सकता है धारा 9–11। अपराध संज्ञेय और ग़ैर-ज़मानती हैं धारा 15।
  • कोई भी, सिर्फ़ रिश्तेदार नहीं, तय शादी रुकवा सकता है: 1098 या 112 पर कॉल करें, बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी को बताएँ, या मजिस्ट्रेट से निषेधाज्ञा (injunction) माँगें धारा 13। निषेधाज्ञा तोड़कर की गई शादी शून्य है।
  • बचपन में ब्याहा गया व्यक्ति 18 का होने के दो साल बाद तक शादी रद्द करवा सकता है, भरण-पोषण और निवास के आदेश के साथ धारा 3, 4।

15 साल में ब्याही लड़की की पढ़ाई आम तौर पर छूट जाती है, वह अक्सर शरीर के तैयार होने से पहले माँ बन जाती है, और अपनी ज़िंदगी पर उसका बहुत कम बस चलता है। बाल विवाह आज भी पूरे भारत में होते हैं, कभी चुपचाप, कभी अक्षय तृतीया या दूसरे "शुभ" दिनों पर सामूहिक समारोहों में। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 (PCMA) इसे अपराध बनाता है और, जो ज़्यादा काम का है, आम लोगों को शादी होने से पहले उसे रोकने के औज़ार देता है।

क़ानून क्या कहता है

"बच्चा" 21 से कम उम्र का पुरुष या 18 से कम उम्र की महिला है, और बाल विवाह वह है जिसमें कोई भी पक्ष बच्चा हो धारा 2(a), 2(b) PCMA। अधिनियम रिवाज पर भारी है और हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, सब पर लागू है; ऐसी शादियों की वैधता पर यह पर्सनल लॉ पर भी भारी है या नहीं, यह सवाल सुप्रीम कोर्ट ने 2026 तक खुला रखा है, पर आपराधिक धाराएँ और निषेधाज्ञा की शक्तियाँ हर हाल में लागू हैं। महिलाओं की उम्र 21 करने वाला विधेयक 2024 में निरस्त हो गया, इसलिए महिलाओं के लिए उम्र 18 ही है।

बाल विवाह शून्यकरणीय (voidable) है: वह तब तक क़ायम रहता है जब तक जो बच्चा था वह ज़िला अदालत से उसे रद्द करने को न कहे, जो वह बालिग़ होने के दो साल बाद तक कर सकता है (लड़की 20 तक, लड़का 23 तक) धारा 3। कुछ बाल विवाह शुरू से शून्य (void) हैं, बिना किसी क़ानूनी असर के: जहाँ बच्चे को अभिभावक से बहला-फुसलाकर ले जाया गया, ज़बरदस्ती या धोखे से शादी कराई गई, शादी के लिए बेचा या तस्करी की गई धारा 12, या जहाँ शादी अदालत की निषेधाज्ञा तोड़कर हुई धारा 14। कर्नाटक ने अपने राज्य के लिए अधिनियम में संशोधन कर हर बाल विवाह को शून्य कर दिया है।

किसे सज़ा हो सकती है

  • 18 से ऊपर का पुरुष जो किसी बच्चे से शादी करे: 2 साल तक सश्रम कारावास, या ₹1 लाख तक जुर्माना, या दोनों धारा 9।
  • जो भी शादी कराए, संपन्न करे, निर्देशित करे या उसमें मदद करे, जैसे पुजारी, क़ाज़ी, पंडित, कैटरर या आयोजक जो जानता हो कि यह बाल विवाह है: वही सज़ा धारा 10।
  • माता-पिता, अभिभावक या बच्चे की ज़िम्मेदारी वाला कोई व्यक्ति जो शादी को बढ़ावा दे या इजाज़त दे, या लापरवाही से उसे न रोके, शामिल होकर या हिस्सा लेकर भी: वही सज़ा; इस धारा में महिला को कैद नहीं, सिर्फ़ जुर्माना हो सकता है धारा 11।

ये अपराध संज्ञेय (cognizable, यानी पुलिस कोर्ट के आदेश के बिना केस दर्ज कर गिरफ़्तार कर सकती है) और ग़ैर-ज़मानती हैं धारा 15। सहमति की उम्र 18 है, इसलिए 18 से कम उम्र की लड़की के साथ कोई भी यौन कृत्य POCSO अधिनियम और BNS में अपराध है, शादी के भीतर भी; धारा 63 BNS में वैवाहिक संबंध का अपवाद तभी लागू है जब पत्नी 18 या उससे बड़ी हो।

क़दम दर क़दम: शादी रोकना

  1. 1098 (चाइल्डलाइन) या 112 पर कॉल करें जैसे ही तय बाल विवाह की ख़बर मिले। गाँव या मोहल्ला, तारीख़ और जगह, और लड़की की अनुमानित उम्र बताएँ। आप गुमनाम रह सकते हैं।
  2. बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी (CMPO) को बताएँ, जो धारा 16 में नियुक्त होते हैं। राज्य के हिसाब से यह बाल विकास परियोजना अधिकारी, तहसीलदार, BDO या ज़िला बाल संरक्षण अधिकारी होते हैं; ज़िला महिला एवं बाल विकास कार्यालय बता देगा। CMPO का काम शादी रोकना, सबूत जुटाना और परिवार को समझाना है।
  3. थाने में लिखित रिपोर्ट करें। अपराध संज्ञेय है, इसलिए पुलिस तय शादी की सूचना पर कार्रवाई कर सकती है और शादी हो जाए तो FIR दर्ज करनी ही होगी।
  4. मजिस्ट्रेट से निषेधाज्ञा माँगें धारा 13। प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट या महानगर मजिस्ट्रेट किसी भी जानकार व्यक्ति, NGO या CMPO की शिकायत पर, या अपनी जानकारी पर, किसी ख़ास शादी पर रोक लगा सकते हैं; ज़रूरी हो तो परिवार को पहले सुने बिना अंतरिम निषेधाज्ञा दी जा सकती है। सामूहिक विवाह के दिनों पर मजिस्ट्रेट आम निषेधाज्ञा जारी कर सकते हैं। उसे तोड़ने पर 2 साल तक और ₹1 लाख तक जुर्माना, और शादी ख़ुद शून्य धारा 14।
  5. ज़िले की बाल कल्याण समिति (CWC) को शामिल करें, जो किशोर न्याय अधिनियम में बच्चे को "देखभाल और संरक्षण की ज़रूरत वाला" घोषित कर सकती है और परिवार के अड़े रहने पर उसे सुरक्षित अभिरक्षा में रख सकती है।
उदाहरण

राजस्थान के एक गाँव की आँगनवाड़ी कार्यकर्ता रेखा को पता चलता है कि दस दिन बाद अक्षय तृतीया पर एक 16 साल की लड़की की शादी उसकी बड़ी बहन के साथ होनी है। वे उसी शाम 1098 पर कॉल कर परिवार का नाम और तारीख़ बताती हैं। चाइल्डलाइन CMPO को सूचित करती है, जो एक कॉन्स्टेबल के साथ जाकर लड़की की उम्र दिखाता स्कूल प्रमाणपत्र दर्ज करते हैं और माता-पिता व पंडित को धारा 10 और 11 की चेतावनी देते हैं। परिवार कहता है "सिर्फ़ सगाई है", तो CMPO धारा 13 में मजिस्ट्रेट से परिवार और पंडित दोनों के ख़िलाफ़ निषेधाज्ञा लेते हैं। 16 साल की लड़की की शादी टल जाती है; 19 साल की बड़ी बहन की शादी तय समय पर होती है।

अगर बच्चे की शादी हो चुकी है

जो व्यक्ति बच्चा था, वह ज़िला (फ़ैमिली) अदालत में शादी रद्द करने की याचिका दे सकता है, नाबालिग़ हो तो अभिभावक या मित्र के ज़रिए CMPO के साथ धारा 3। अदालत लेन-देन हुए पैसे, तोहफ़े और गहने लौटाने का आदेश दे सकती है धारा 3(4), पति को, या वह नाबालिग़ हो तो उसके माता-पिता को, लड़की की दोबारा शादी तक भरण-पोषण और निवास देने का निर्देश दे सकती है धारा 4, और बच्चों की अभिरक्षा तय कर सकती है धारा 5। बाल विवाह से पैदा बच्चे वैध हैं धारा 6। लड़की 18 से कम हो तो CWC को शामिल करना होगा, और उसे किसी भी बाल पीड़ित जैसा सहारा मिलेगा।

Society for Enlightenment and Voluntary Action v Union of India (2024) में सुप्रीम कोर्ट ने विस्तृत निर्देश दिए: हर राज्य समर्पित CMPO नियुक्त करे, ज़िला कार्य-योजनाएँ बनाए, पुलिस और पंचायतों को प्रशिक्षित करे, और सिर्फ़ परिवार पर मुक़दमे को नहीं, बल्कि रोकथाम और बच्चे के अधिकारों को प्राथमिकता दे। इसने संसद को बाल सगाई पर भी रोक लगाने का सुझाव दिया, क्योंकि बहुत-सी "सगाइयाँ" नाम भर की नहीं, असल में शादियाँ होती हैं।

ये तैयार रखें

  • बच्चे की उम्र का सबूत: जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल छोड़ने का प्रमाणपत्र, आधार या आँगनवाड़ी रिकॉर्ड।
  • तय शादी का ब्योरा: तारीख़, जगह, निमंत्रण कार्ड, तैयारियों की तस्वीरें।
  • दूल्हे, उसके परिवार, पुजारी या आयोजक, और पता हो तो हॉल या कैटरर के नाम।
  • गवाह बनने को तैयार हों तो अपना नाम और नंबर; वरना 1098 के ज़रिए गुमनाम रिपोर्ट करें।
सावधान

"शादी हो गई, अब कुछ नहीं हो सकता" ग़लत है। अपराध दंडनीय बने रहते हैं, लड़की 20 साल की होने तक शादी रद्द करवा सकती है, और वह भरण-पोषण व निवास की हक़दार है। साथ ही, हर बात पक्की होने का इंतज़ार न करें; शादी से दस दिन पहले की रिपोर्ट CMPO को कार्रवाई का समय देती है, जबकि एक रात पहले की अक्सर नहीं।

कहाँ जाएँ

  • चाइल्डलाइन 1098 (24 घंटे, मुफ़्त), या शादी बिल्कुल क़रीब हो तो 112; महिला हेल्पलाइन 181।
  • बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी अपने ब्लॉक या ज़िले के, ज़िला बाल संरक्षण इकाई या महिला एवं बाल विकास कार्यालय के ज़रिए; बच्चे की देखभाल के लिए बाल कल्याण समिति।
  • थाना FIR के लिए; धारा 13 में निषेधाज्ञा के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट। मुफ़्त वकील: 15100 (nalsa.gov.in)।
  • राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग: ncpcr.gov.in; महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का बाल विवाह मुक्त भारत अभियान wcd.gov.in पर।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या बाल विवाह अपने आप अवैध है?

आम तौर पर नहीं। धारा 3 PCMA में यह शून्यकरणीय है: तब तक वैध जब तक जो बच्चा था वह ज़िला अदालत से रद्द करने को न कहे, जो वह 18 का होने के दो साल बाद तक कर सकता है। यह शुरू से शून्य सिर्फ़ धारा 12 की स्थितियों में है (बच्चे को ले जाना, ज़बरदस्ती, धोखा, बेचना या तस्करी), जहाँ यह अदालत की निषेधाज्ञा तोड़ती है, या कर्नाटक में, जिसने राज्य संशोधन से सभी बाल विवाह शून्य कर दिए हैं।

क्या मैं बाल विवाह की गुमनाम रिपोर्ट कर सकता हूँ?

हाँ। 1098 या 112 पर कॉल करें और कहें कि आप नाम नहीं देना चाहते। CMPO और पुलिस सूचना पर कार्रवाई कर सकते हैं और बच्चे की उम्र ख़ुद जाँच सकते हैं। बहुत-से बाल विवाह पड़ोसियों, शिक्षकों और आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सूचना पर रुकते हैं जो रिकॉर्ड में कभी नहीं आते।

लड़की कहे कि वह शादी करना चाहती है तो?

वह 18 से कम है तो उसकी सहमति शादी को वैध नहीं बनाती, और उसके साथ यौन संबंध POCSO अधिनियम में अपराध बने रहते हैं। अधिनियम बच्चों को उन फ़ैसलों से बचाता है जो वे अभी आज़ादी से नहीं कर सकते, अक्सर परिवार के दबाव में। बाल कल्याण समिति उससे अलग से बात करेगी और काउंसलिंग व पढ़ाई का इंतज़ाम कर सकती है। 18 की होने पर वह जिससे चाहे शादी कर सकती है।

क्या लड़की के माता-पिता जेल जाएँगे?

उन पर धारा 11 में मुक़दमा हो सकता है, जिसमें 2 साल तक और ₹1 लाख तक जुर्माना है, हालाँकि इस धारा में माँ को कैद नहीं हो सकती। व्यवहार में, शादी समय पर रुक जाए तो CMPO आम तौर पर माता-पिता से लिखित वचन लेकर परिवार पर नज़र रखते हैं, मुक़दमा नहीं करते। चेतावनी या निषेधाज्ञा के बावजूद शादी हो जाए तो मुक़दमे की संभावना ज़्यादा है।

क्या PCMA मुसलमानों पर लागू है?

अधिनियम सभी नागरिकों पर लागू है, धर्म कोई भी हो, और इसके निवारक और दंडात्मक प्रावधान पर्सनल लॉ की परवाह किए बिना चलते हैं। यौवन पा चुकी पर 18 से कम उम्र की मुस्लिम लड़की की शादी पर्सनल लॉ में वैध है या नहीं, यह अलग सवाल 2026 तक सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। हर हाल में, 18 से कम उम्र के किसी के साथ यौन संबंध पर POCSO अधिनियम लागू है।

यह लेख जागरूकता के लिए सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। अपनी स्थिति के लिए किसी वकील से सलाह लें या मुफ़्त क़ानूनी सहायता के लिए 15100 पर कॉल करें।

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