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Stacks of files in a government office in Indiaनागरिक

फ़ोटो: Ganesh Dhamodkar, Wikimedia Commons, CC BY 2.0. सांकेतिक चित्र.

सरकारी काम अटका है? CPGRAMS, सेवा का अधिकार क़ानून और RTI

न्याय पाठशाला7 मिनट✓ समीक्षा और अद्यतन: अक्टूबर 2026Read in English

अटकी पेंशन, प्रमाणपत्र या कनेक्शन कैसे निकलवाएँ: CPGRAMS (pgportal.gov.in) और 21 दिन का नियम, अपील, राज्यों के सेवा का अधिकार क़ानून, RTI और हाई कोर्ट।

क़ानून: अनुच्छेद 14, 21 और 226, भारत का संविधान · DARPG के लोक शिकायत संबंधी व्यापक दिशानिर्देश (23 अगस्त 2024) · राज्यों के लोक सेवा का अधिकार अधिनियम · धारा 6 और 7, सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005

संक्षेप में

  • किसी भी आवेदन की पावती संख्या (acknowledgement number) ज़रूर लें। इसके बिना देरी नापी ही नहीं जा सकती।
  • केंद्रीय विभागों (पासपोर्ट, PF, आयकर, रेलवे, बैंक, डाक, केंद्रीय पेंशन) के लिए pgportal.gov.in पर CPGRAMS में शिकायत करें। विभागों को 21 दिन में निपटारा करना है या कारण सहित अंतरिम जवाब देना है।
  • जवाब से असंतुष्ट? CPGRAMS में एक अपील का प्रावधान है; इसे 30 दिन में तय करना होता है।
  • राज्य की सेवाओं (प्रमाणपत्र, राशन कार्ड, भूमि रिकॉर्ड) के लिए अपने राज्य का सेवा का अधिकार अधिनियम और शिकायत पोर्टल इस्तेमाल करें; समय-सीमा चूकने वाले अधिकारी पर जुर्माना हो सकता है।
  • आपकी फ़ाइल की स्थिति और उसे सँभालने वाले अधिकारियों के नाम पूछने वाला RTI अक्सर किसी भी रिमाइंडर से तेज़ काम करता है।

महीनों से न आई पेंशन। एक मेज़ पर अटका जाति प्रमाणपत्र। "स्वीकृत" पानी का कनेक्शन जो कभी लगा ही नहीं। बहुत से परिवारों के लिए ये तय करते हैं कि बच्चे का दाख़िला होगा या बुज़ुर्ग माता-पिता दवा ख़रीद पाएँगे। सरकारी सेवा पाने के लिए आपको सिफ़ारिश या रिश्वत की ज़रूरत नहीं। विभाग नियमों और समय-सीमाओं से बँधे हैं, और ठीक इसी के लिए शिकायत व्यवस्थाएँ बनी हैं। सही तरीक़े से इस्तेमाल करें तो ये काम करती हैं।

क़ानून और नियम क्या कहते हैं

सरकारी अधिकारियों का कर्तव्य है कि वे निष्पक्षता से, उचित समय में और क़ानून के मुताबिक़ काम करें। सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार कहा है कि राज्य की मनमानी या अनुचित देरी अनुच्छेद 14 (समानता) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) का उल्लंघन हो सकती है। इन सिद्धांतों के ऊपर तीन व्यावहारिक व्यवस्थाएँ हैं।

  • CPGRAMS। केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली केंद्र सरकार का शिकायत पोर्टल है, जिसे प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) चलाता है। DARPG के 23 अगस्त 2024 के व्यापक दिशानिर्देशों के तहत हर मंत्रालय में नोडल शिकायत अधिकारी होना चाहिए, शिकायतों का निपटारा 21 दिन में होना चाहिए, और सचमुच ज़्यादा समय चाहिए तो अंतरिम जवाब में कारण और संभावित तारीख़ देनी होगी। शिकायत "इस मंत्रालय से संबंधित नहीं" कहकर बंद नहीं की जा सकती; उसे 48 घंटे में सही दफ़्तर भेजना होगा। बंद होने के बाद आपको फ़ीडबैक कॉल आती है, और आप एक अपील कर सकते हैं।
  • सेवा का अधिकार क़ानून। मध्य प्रदेश के 2010 के क़ानून के बाद से ज़्यादातर राज्यों ने लोक सेवा का अधिकार या सेवा गारंटी अधिनियम बनाए हैं। ये सेवाओं (जन्म, जाति, आय और निवास प्रमाणपत्र, राशन कार्ड, लाइसेंस, कनेक्शन, ज़मीन का नामांतरण) को हर एक की समय-सीमा के साथ अधिसूचित करते हैं। पदनामित अधिकारी बिना उचित कारण समय चूके तो आप पहली अपील, फिर दूसरी अपील करते हैं, और कई राज्यों में अपीलीय प्राधिकारी अधिकारी पर जुर्माना लगाकर सेवा देने का आदेश दे सकता है।
  • राज्य के शिकायत पोर्टल और CM हेल्पलाइन। ज़्यादातर राज्य ऑनलाइन पोर्टल और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन चलाते हैं जो शिकायत दर्ज करके नंबर देते हैं और अपने-आप ऊपर भेजते हैं।

क़दम दर क़दम: अटकी सेवा कैसे निकलवाएँ

  1. सही तरीक़े से आवेदन करें और सबूत रखें। पावती, रसीद या आवेदन संख्या लें। दफ़्तर देने से मना करे तो आवेदन पावती सहित पंजीकृत डाक से भेजें।
  2. प्रभारी अधिकारी को लिखें। आवेदन संख्या और तारीख़ के हवाले से छोटा-सा पत्र, जिसमें देरी का कारण और संभावित तारीख़ पूछी हो। दफ़्तर की मुहर वाली कॉपी रखें, या डाक या ईमेल से भेजें।
  3. ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। केंद्रीय मामला: pgportal.gov.in या UMANG ऐप पर पंजीकरण करें, मंत्रालय या विभाग चुनें, समस्या कुछ साफ़ पंक्तियों में लिखें (क्या आवेदन किया, कब, संख्या, तब से क्या हुआ) और दस्तावेज़ लगाएँ। राज्य का मामला: राज्य पोर्टल या CM हेल्पलाइन। पंजीकरण संख्या नोट करें।
  4. ट्रैक करें। आपको दिखेगा कि शिकायत किस अधिकारी को सौंपी गई और कोई अंतरिम जवाब आया या नहीं। 21 दिन बिना कार्रवाई के बीत जाएँ, या जवाब रटा-रटाया हो, तो शिकायत बंद होने के बाद अपील का विकल्प इस्तेमाल करें।
  5. सेवा का अधिकार अधिनियम इस्तेमाल करें, अगर आपके राज्य में है और आपकी सेवा अधिसूचित है। समय-सीमा बीतने पर पावती लगाकर पदनामित अपीलीय अधिकारी के पास पहली अपील करें।
  6. RTI लगाएँ धारा 6, RTI Act के तहत, जिसमें अपने आवेदन की वर्तमान स्थिति, फ़ाइल की दैनिक प्रगति, उसे सँभालने वाले अधिकारियों के नाम और पद, और देरी के कारण पूछें। जानकारी सामान्यतः 30 दिन में देनी होती है (धारा 7), और जीवन या स्वतंत्रता का सवाल हो तो 48 घंटे में।
  7. आख़िरी क़दम अदालत। हर रास्ता नाकाम हो और देरी से गंभीर नुक़सान हो रहा हो, तो अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट में रिट याचिका प्राधिकरण को अपना क़ानूनी कर्तव्य निभाने का निर्देश दिला सकती है (परमादेश या mandamus की रिट, जिसका मतलब है "हम आदेश देते हैं")। अदालतें उम्मीद करती हैं कि आपने पहले दूसरे उपाय आज़माए हों।
सुझाव

शिकायत ऐसे लिखें कि वरिष्ठ अधिकारी दो मिनट में कार्रवाई कर सके: एक मुद्दा, आवेदन संख्या, तारीख़ें, दफ़्तर, आप क्या चाहते हैं। पावती लगाएँ। एक शिकायत में इतिहास, ग़ुस्सा और कई माँगें न भरें।

जब देरी के पीछे बड़ी समस्या हो

  • रिश्वत की माँग। न दें। राज्य भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो या सतर्कता विभाग को बताएँ; ट्रैप की व्यवस्था हो सकती है। CPGRAMS भ्रष्टाचार की शिकायतें नहीं देखता, वे सतर्कता चैनलों से जाती हैं।
  • CPGRAMS में "शिकायत" नहीं। RTI के मामले, अदालत में लंबित मामले, सरकारी कर्मचारियों के सेवा मामले और सिर्फ़ सुझाव मानक जवाब के साथ बंद कर दिए जाते हैं। सही मंच चुनें: RTI अपील, अदालत, या सेवा अधिकरण।
  • बैंक, टेलीकॉम, बीमा, बिजली। पहले कंपनी का अपना शिकायत प्रकोष्ठ, फिर नियामक का लोकपाल: RBI लोकपाल (cms.rbi.org.in), बीमा के लिए IRDAI का बीमा भरोसा, बिजली के लिए आपके राज्य का उपभोक्ता मंच। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 मार्गदर्शन कर सकती है।
  • बुज़ुर्ग। एल्डर लाइन 14567 पेंशन, दस्तावेज़ों और कल्याण योजनाओं में मदद करती है।
उदाहरण

जालंधर में केंद्रीय PSU से सेवानिवृत्त 68 साल के हरभजन ने मार्च में पेंशन संशोधन का आवेदन किया। जुलाई तक कुछ नहीं हुआ, और दफ़्तर ने कहा फ़ाइल "अकाउंट्स में" है। वे आवेदन संख्या के हवाले से पेंशन अधिकारी को लिखते हैं, फिर pgportal.gov.in पर संबंधित मंत्रालय के तहत शिकायत दर्ज करते हैं, पावती और अपना पत्र लगाकर। 19वें दिन अंतरिम जवाब आता है कि एक सेवा प्रमाणपत्र का इंतज़ार है। वे उसी दिन अपलोड करते हैं। 34वें दिन संशोधित पेंशन आदेश के साथ शिकायत बंद होती है। जवाब टालमटोल वाला होता तो वे एक अपील करते और साथ-साथ फ़ाइल की गति के लिए RTI लगाते।

ये तैयार रखें

  • पावती संख्या और तारीख़ के साथ आवेदन की कॉपी
  • दिए गए शुल्क की रसीद; भेजे गए पत्रों की डाक रसीदें
  • दफ़्तर की मुहर वाले रिमाइंडर पत्र या ईमेल के समय
  • शिकायत पंजीकरण संख्या और हर स्थिति अपडेट के स्क्रीनशॉट
  • सेवा का अधिकार अपील के लिए: आपकी सेवा की अधिसूचित समय-सीमा (विभाग के नागरिक चार्टर या वेबसाइट पर छपी)
सावधान

विभाग अक्सर ऐसा जवाब भेजकर, जिसमें कुछ समझाया ही न गया हो, शिकायत को "निपटाया" दिखा देते हैं, और सिस्टम उसे हल मान लेता है। फ़ीडबैक कॉल में इसे स्वीकार न करें। कहें कि आप संतुष्ट नहीं हैं, समय-सीमा के भीतर अपील करें, और 21 दिन के नियम और कारण सहित अंतरिम जवाब की ज़रूरत का हवाला दें।

कहाँ जाएँ

  • पहले दफ़्तर ख़ुद, फिर उसका शिकायत या नोडल अधिकारी (नाम विभाग की वेबसाइट और नागरिक चार्टर पर हैं)
  • केंद्रीय सेवाएँ: pgportal.gov.in (CPGRAMS), फिर उसकी अपील
  • राज्य की सेवाएँ: राज्य शिकायत पोर्टल, CM हेल्पलाइन, और राज्य सेवा का अधिकार अधिनियम के तहत अपीलीय अधिकारी
  • फ़ाइल की स्थिति: विभाग के लोक सूचना अधिकारी को RTI आवेदन (केंद्रीय विभागों के लिए rtionline.gov.in)
  • उपभोक्ता 1915; वरिष्ठ नागरिक 14567; रिट याचिका के लिए मुफ़्त क़ानूनी सहायता 15100 (NALSA)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

CPGRAMS की शिकायत में कितना समय लगता है?

DARPG के अगस्त 2024 के दिशानिर्देशों के तहत मंत्रालयों और विभागों को शिकायतें 21 दिन में निपटानी हैं। सचमुच ज़्यादा समय चाहिए तो कारण और संभावित तारीख़ के साथ अंतरिम जवाब देना होगा। प्राथमिकता वाली शिकायतें कुछ दिनों में देखनी होती हैं। निपटारे के बाद आपको फ़ीडबैक कॉल आती है और आप एक अपील कर सकते हैं, जो 30 दिन में तय होनी चाहिए।

क्या राज्य सरकार के दफ़्तर की शिकायत CPGRAMS पर कर सकते हैं?

कर सकते हैं, और CPGRAMS उसे राज्य की शिकायत व्यवस्था को भेज देता है, पर वहाँ आगे की कार्रवाई राज्य पर निर्भर है। राज्य की सेवाओं के लिए आमतौर पर सीधे राज्य का अपना पोर्टल या CM हेल्पलाइन तेज़ है, और राज्य सेवा का अधिकार अधिनियम का सहारा लेना बेहतर, जिसमें समय-सीमाएँ और अधिकारी पर जुर्माना है।

सेवा का अधिकार अधिनियम में देरी करने वाले अधिकारी का क्या होता है?

पदनामित अधिकारी बिना पर्याप्त कारण अधिसूचित समय-सीमा चूके तो अपीलीय प्राधिकारी सेवा देने का निर्देश दे सकता है और ज़्यादातर राज्यों के क़ानूनों में अधिकारी पर जुर्माना लगा सकता है, जो अक्सर वेतन से वसूला जाता है, और कभी-कभी आपको मुआवज़ा भी। सटीक रक़म और प्रक्रिया राज्य के हिसाब से अलग है, इसलिए अपने राज्य का अधिनियम और विभाग का नागरिक चार्टर देखें।

क्या RTI शिकायत से बेहतर है?

दोनों अलग काम करते हैं। शिकायत विभाग से कार्रवाई माँगती है; RTI उसे यह बताने को मजबूर करता है कि आपकी फ़ाइल का क्या हुआ, किसने सँभाली और क्यों अटकी है। दोनों साथ करना अच्छा रहता है: RTI से अक्सर छूटा दस्तावेज़ या फ़ाइल दबाए बैठा अधिकारी सामने आता है, और शिकायत वरिष्ठ अधिकारी को उसे निपटाने की वजह देती है।

अदालत कब जाएँ?

जब सेवा आपका साफ़ क़ानूनी हक़ हो, आवेदन और फ़ॉलो-अप का सबूत आपके पास हो, और दूसरे रास्ते नाकाम हो चुके हों या आपके नुक़सान के मुक़ाबले बहुत धीमे हों। अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट की रिट प्राधिकरण को तय समय में फ़ैसला करने का आदेश दे सकती है। वकील का ख़र्च न उठा सकें तो ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण (15100) से मुफ़्त क़ानूनी सहायता मिलती है।

यह लेख जागरूकता के लिए सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। अपनी स्थिति के लिए किसी वकील से सलाह लें या मुफ़्त क़ानूनी सहायता के लिए 15100 पर कॉल करें।

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