रेरा (RERA): बिल्डर देर करे या धोखा दे तो आपके अधिकार
धारा 18 में ब्याज सहित रिफ़ंड या हर महीने देरी का ब्याज, 5 साल तक ख़राबियों की मुफ़्त मरम्मत, और धारा 31 में रेरा शिकायत कैसे करें।
संक्षेप में
- कोई भी भुगतान करने से पहले राज्य के रेरा पोर्टल पर प्रोजेक्ट खोजें और उसका पंजीकरण नंबर और वादा की गई पूर्णता तारीख़ नोट करें।
- पंजीकृत बिक्री अनुबंध (agreement for sale) से पहले 10% से ज़्यादा न दें धारा 13 RERA।
- क़ब्ज़ा देर से मिले तो आप चुनें: ब्याज सहित पूरा रिफ़ंड और मुआवज़ा, या इंतज़ार करते हुए हर महीने की देरी का ब्याज धारा 18(1) RERA।
- क़ब्ज़े के 5 साल के भीतर बताई गई संरचनात्मक ख़राबी 30 दिन में मुफ़्त ठीक करनी होगी धारा 14(3) RERA।
- राज्य रेरा प्राधिकरण में ऑनलाइन शिकायत करें धारा 31 RERA; मुआवज़ा उसका न्यायनिर्णायक अधिकारी तय करता है धारा 71 RERA।
आपने फ़्लैट बुक किया, क़ीमत का बड़ा हिस्सा चुका दिया, और क़ब्ज़े की तारीख़ निकल गई। या चाबी मिल गई और दीवारों में दरारें आ रही हैं। यह लेख बताता है कि भू-संपदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 यानी रेरा आपको क्या देता है, और उसका इस्तेमाल ठीक-ठीक कैसे करें।
रेरा किन पर लागू है
रेरा आवासीय और व्यावसायिक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट पर लागू है। बिल्डर (जिसे "प्रमोटर" कहा जाता है) को विज्ञापन, मार्केटिंग या बिक्री से पहले राज्य के भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण में प्रोजेक्ट पंजीकृत कराना होता है, सिवाय तब जब ज़मीन 500 वर्ग मीटर या कम हो या प्रोजेक्ट में आठ या कम अपार्टमेंट हों धारा 3 RERA। राज्य यह सीमा और कम कर सकते हैं। अधिनियम लागू होते समय जिन चालू प्रोजेक्ट को पूर्णता प्रमाणपत्र नहीं मिला था, उन्हें भी पंजीकरण कराना था। रियल एस्टेट एजेंटों का पंजीकरण भी ज़रूरी है।
हर राज्य और केंद्रशासित प्रदेश का अपना रेरा प्राधिकरण, नियम, शुल्क और ऑनलाइन पोर्टल है। देरी पर ब्याज की दर जैसी बातें राज्य के हिसाब से अलग होती हैं।
आपकी मुख्य सुरक्षाएँ
- पूरी जानकारी। मंज़ूरियाँ, लेआउट प्लान, बिल्डर का पिछला रिकॉर्ड और पूर्णता तारीख़ रेरा वेबसाइट पर होनी चाहिए।
- कारपेट एरिया। फ़्लैट कारपेट एरिया, यानी दीवारों के अंदर इस्तेमाल लायक़ फ़र्श, पर बिकने चाहिए, बढ़ा-चढ़ाकर बताए "सुपर एरिया" पर नहीं।
- अलग बैंक खाता। ख़रीदारों से ली गई रकम का 70% अलग खाते में रखना और सिर्फ़ उसी प्रोजेक्ट की ज़मीन और निर्माण पर ख़र्च करना होता है धारा 4 RERA।
- एडवांस की सीमा। पंजीकृत बिक्री अनुबंध किए बिना बिल्डर क़ीमत का 10% से ज़्यादा एडवांस या आवेदन शुल्क नहीं ले सकता धारा 13 RERA।
- सहमति बिना बदलाव नहीं। मंज़ूर नक़्शे और विशेषताएँ आपकी सहमति के बिना नहीं बदली जा सकतीं। इमारत में बड़े बदलाव के लिए दो-तिहाई ख़रीदारों की सहमति चाहिए धारा 14 RERA।
- संरचनात्मक ख़राबी। क़ब्ज़े के पाँच साल के भीतर संरचनात्मक ख़राबी या घटिया कारीगरी दिखे, तो बिल्डर को 30 दिन में मुफ़्त ठीक करनी होगी। न करे तो आप मुआवज़े के हक़दार हैं धारा 14(3) RERA।
- सोसायटी और दस्तावेज़। बिल्डर को ख़रीदारों की एसोसिएशन बनाने में मदद करनी होगी और साझा जगहें व दस्तावेज़ सौंपने होंगे धारा 11 और 17 RERA। आपको प्रोजेक्ट की प्रगति और मंज़ूरियों की जानकारी पाने का हक़ है धारा 19 RERA।
अगर क़ब्ज़े में देरी हो
अगर बिल्डर अनुबंध में लिखी तारीख़ तक क़ब्ज़ा नहीं देता, तो धारा 18(1) RERA आपको विकल्प देती है:
- प्रोजेक्ट से निकलें: जमा की गई पूरी रकम, राज्य के नियमों में तय दर से ब्याज और मुआवज़े सहित वापस लें; या
- बने रहें: प्रोजेक्ट में बने रहें और क़ब्ज़ा मिलने तक हर महीने की देरी का ब्याज पाएँ।
न्यूटेक प्रमोटर्स एंड डेवलपर्स बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2021) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देरी पर ख़रीदार का ब्याज सहित रिफ़ंड का अधिकार बिना शर्त है। यह बिल्डर के बताए कारणों, जैसे अनपेक्षित घटनाओं या अदालती रोक, पर निर्भर नहीं करता, बशर्ते देरी ख़रीदार की ग़लती से न हुई हो।
फ़ैसला करने से पहले देखें कि प्रोजेक्ट असल में कहाँ खड़ा है। लगभग तैयार हो तो बने रहकर देरी का ब्याज लेना ठीक हो सकता है। सालों से काम रुका हो, तो रिफ़ंड का आदेश आम तौर पर ज़्यादा सुरक्षित है।
क़दम दर क़दम: रेरा शिकायत
- दस्तावेज़ जुटाएँ (नीचे सूची देखें) और भुगतान की सरल तालिका बनाएँ: तारीख़, रकम, रसीद नंबर।
- लिखित नोटिस भेजें। ईमेल और रजिस्टर्ड डाक से बिल्डर को समस्या, तय तारीख़ और अपनी माँग (ब्याज सहित रिफ़ंड, देरी का ब्याज, या मरम्मत) लिखें। जवाब के लिए समय दें, जैसे 15 दिन।
- ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। अधिनियम के किसी भी उल्लंघन पर बिल्डर या एजेंट के ख़िलाफ़ राज्य रेरा पोर्टल पर शिकायत करें धारा 31 RERA। प्रोजेक्ट पंजीकरण नंबर भरें, दस्तावेज़ लगाएँ और शुल्क दें (राज्य के हिसाब से, आम तौर पर मामूली)। कुछ राज्यों में मुआवज़े के दावे का अलग फ़ॉर्म है।
- सुनवाई में शामिल हों, जो अक्सर ऑनलाइन होती है। प्राधिकरण रिफ़ंड, ब्याज, निर्माण पूरा करने या मरम्मत का आदेश दे सकता है। मुआवज़े के दावे न्यायनिर्णायक अधिकारी (adjudicating officer) तय करता है धारा 71 RERA।
- वसूली। बिल्डर भुगतान न करे तो अमल (execution) की अर्ज़ी दें। प्राधिकरण ज़िला प्रशासन के ज़रिए भू-राजस्व के बकाये की तरह रकम वसूल सकता है।
- ज़रूरत हो तो अपील। कोई भी पक्ष राज्य के भू-संपदा अपीलीय न्यायाधिकरण में आम तौर पर 60 दिन में अपील कर सकता है। अपील करने वाले बिल्डर को पहले आदेशित रकम का एक हिस्सा जमा करना होता है।
दूसरे रास्ते
आप रेरा की जगह उपभोक्ता आयोग (Consumer Commission) भी जा सकते हैं; सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दोनों वैकल्पिक उपाय हैं और आप चुन सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि घर ख़रीदार वित्तीय लेनदार (financial creditor) हैं और कुछ शर्तों के साथ, जैसे न्यूनतम संख्या में ख़रीदारों का साथ आना, डिफ़ॉल्ट करने वाले बिल्डर के ख़िलाफ़ दिवाला (insolvency) कार्यवाही शुरू कर सकते हैं। कौन-सा रास्ता ठीक है, यह प्रोजेक्ट और बिल्डर की आर्थिक हालत पर निर्भर है, इसलिए सलाह लें।
अर्जुन ने 2021 में नोएडा के एक प्रोजेक्ट में ₹62 लाख का 2BHK बुक किया, क़ब्ज़ा दिसंबर 2024 तक मिलना था। 2025 के बीच तक टावर आधे बने थे और बिल्डर बस "नई समय-सीमा" भेजता रहा। अर्जुन ने यूपी रेरा पोर्टल पर प्रोजेक्ट का पेज देखा, पाया कि पंजीकरण की अवधि ख़त्म हो चुकी है, और धारा 18(1) में रिफ़ंड माँगते हुए धारा 31 में शिकायत की। उन्होंने अनुबंध, रसीदें और बिल्डर के ईमेल लगाए। प्राधिकरण ने हर भुगतान की तारीख़ से ब्याज सहित पूरा रिफ़ंड देने का आदेश दिया।
ये तैयार रखें
- बुकिंग फ़ॉर्म, आवंटन पत्र और पंजीकृत बिक्री अनुबंध।
- सभी भुगतान रसीदें और बैंक स्टेटमेंट, होम लोन वितरण के पत्र समेत।
- प्रोजेक्ट का रेरा पंजीकरण नंबर और उसके रेरा पेज का स्क्रीनशॉट।
- ब्रोशर और विज्ञापन (ये भी बिल्डर के वादे का हिस्सा हो सकते हैं)।
- बिल्डर के ईमेल, पत्र और माँग नोटिस, और आपका भेजा नोटिस।
- ख़राबी के मामले में: तारीख़ वाली फ़ोटो और वीडियो, और बिल्डर को दी गई लिखित शिकायत।
बिल्डर अक्सर थोड़ी छूट या नई तारीख़ के बदले "समझौते" पर दस्तख़त करवाते हैं, जिसमें आप ब्याज का दावा छोड़ देते हैं। ऐसे काग़ज़ ध्यान से पढ़ें। बिना रसीद नक़द कभी न दें, और ऐसे प्रोजेक्ट में बुकिंग न करें जिसका पंजीकरण होना चाहिए पर हुआ नहीं।
कहाँ जाएँ
- पहले: बिल्डर को ईमेल और रजिस्टर्ड डाक से लिखित नोटिस।
- फिर: राज्य रेरा प्राधिकरण का ऑनलाइन पोर्टल ("[आपका राज्य] RERA" खोजें; आधिकारिक साइट gov.in या nic.in पर ख़त्म होती है)।
- अपील: राज्य भू-संपदा अपीलीय न्यायाधिकरण।
- विकल्प: ज़िला, राज्य या राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग। मार्गदर्शन के लिए 1915 या consumerhelpline.gov.in।
- मुफ़्त क़ानूनी मदद: 15100 या ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण (nalsa.gov.in)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बिल्डर क़ब्ज़े में देर करे तो क्या रिफ़ंड मिल सकता है?
हाँ। धारा 18(1) RERA के तहत तय तारीख़ तक क़ब्ज़ा न मिलने पर आप प्रोजेक्ट से निकलकर पूरी रकम, राज्य नियमों की दर से ब्याज और मुआवज़े सहित वापस ले सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने न्यूटेक प्रमोटर्स (2021) में कहा कि यह अधिकार बिल्डर के देरी के कारणों पर निर्भर नहीं।
क्या प्रोजेक्ट में बने रहकर भी देरी का मुआवज़ा मिलेगा?
हाँ। अगर आप प्रोजेक्ट नहीं छोड़ते, तो धारा 18(1) RERA के तहत बिल्डर को क़ब्ज़ा देने तक हर महीने की देरी का ब्याज देना होगा। प्रोजेक्ट लगभग तैयार हो तो कई ख़रीदार यही चुनते हैं।
रेरा में शिकायत कैसे करें?
धारा 31 के तहत राज्य रेरा पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत करें, प्रोजेक्ट पंजीकरण नंबर, अनुबंध, रसीदें और पत्राचार लगाएँ, और राज्य का शुल्क दें। सुनवाई अक्सर ऑनलाइन होती है। मुआवज़े के दावे धारा 71 में न्यायनिर्णायक अधिकारी के पास जाते हैं।
क़ब्ज़े के बाद दरारें या सीलन आए तो क्या करें?
क़ब्ज़े के पाँच साल के भीतर संरचनात्मक ख़राबी या घटिया कारीगरी की सूचना दें, तो धारा 14(3) RERA के तहत बिल्डर को 30 दिन में मुफ़्त ठीक करना होगा। फ़ोटो के साथ लिखित में बताएँ; बिल्डर न करे तो मरम्मत या मुआवज़े के लिए रेरा में शिकायत करें।
रेरा जाएँ या उपभोक्ता आयोग?
दोनों रास्ते खुले हैं, और सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आप चुन सकते हैं। पंजीकृत प्रोजेक्ट में देरी और रिफ़ंड के मामलों में रेरा विशेषज्ञ और आम तौर पर तेज़ है। सेवा में कमी या अपंजीकृत प्रोजेक्ट के मामलों में उपभोक्ता आयोग ठीक हो सकता है। बड़े दावों में सलाह लें।
यह लेख जागरूकता के लिए सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। अपनी स्थिति के लिए किसी वकील से सलाह लें या मुफ़्त क़ानूनी सहायता के लिए 15100 पर कॉल करें।