शिक्षा का अधिकार: 6 से 14 साल के हर बच्चे के लिए मुफ़्त स्कूल
अनुच्छेद 21A और RTE अधिनियम 2009: स्कूलों को क्या देना होगा, वे क्या नहीं कर सकते, निजी स्कूलों में 25% कोटा, और बच्चे को मना किए जाने पर शिकायत कहाँ करें।
संक्षेप में
- 6 से 14 साल के हर बच्चे को पड़ोस के स्कूल में मुफ़्त प्रारंभिक शिक्षा (कक्षा 1 से 8) का मौलिक अधिकार है (अनुच्छेद 21A; धारा 3, RTE अधिनियम)।
- कोई स्कूल डोनेशन नहीं माँग सकता, दाख़िले के लिए टेस्ट या इंटरव्यू नहीं ले सकता, जन्म प्रमाणपत्र न होने पर मना नहीं कर सकता, देर से दाख़िला नहीं रोक सकता, कक्षा 8 से पहले नहीं निकाल सकता, और शारीरिक दंड नहीं दे सकता।
- निजी ग़ैर-सहायता-प्राप्त स्कूलों को प्रवेश कक्षा में कम से कम 25% सीटें कमज़ोर और वंचित वर्ग के बच्चों को मुफ़्त देनी होंगी (धारा 12(1)(c)); अपने राज्य की सालाना ऑनलाइन लॉटरी से आवेदन करें।
- शिकायत इस क्रम में करें: प्रधानाध्यापक और विद्यालय प्रबंधन समिति; स्थानीय प्राधिकरण को लिखित शिकायत (तीन महीने में फ़ैसला); राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग; 1098; 15100 पर क़ानूनी सहायता।
शिक्षा हर दूसरे अवसर का दरवाज़ा खोलती है: अच्छी नौकरी, समझदारी से वोट, अपने अधिकारों की जानकारी। भारत में 6 से 14 साल के बच्चों के लिए यह कोई एहसान नहीं जो सरकार चाहे तो करे। यह मौलिक अधिकार है। आप माता-पिता, अभिभावक, शिक्षक या पड़ोसी हों, यह गाइड बताती है कि क़ानून क्या वादा करता है और स्कूल उसे तोड़े तो क्या करें।
क़ानून क्या कहता है
86वें संशोधन, 2002 से जोड़ा गया अनुच्छेद 21A कहता है कि राज्य छह से चौदह साल के सभी बच्चों को, क़ानून से तय तरीक़े से, मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा देगा। वह क़ानून है बच्चों का मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act), जो 1 अप्रैल 2010 से लागू है।
धारा 3, RTE अधिनियम के तहत 6 से 14 साल के हर बच्चे को प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने तक पड़ोस के स्कूल में मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार है। "मुफ़्त" का मतलब है कोई फ़ीस, शुल्क या ख़र्च नहीं जो बच्चे को कक्षा 8 पूरी करने से रोके। "अनिवार्य" का मतलब है कि हर बच्चे का दाख़िला, उपस्थिति और पढ़ाई पूरी करवाने का कर्तव्य सरकार पर है, बच्चे पर नहीं।
केंद्रीय RTE नियम, 2010 के तहत (ज़्यादातर राज्यों के नियम भी ऐसे ही हैं) "पड़ोस" का स्कूल कक्षा 1 से 5 के लिए 1 किमी और कक्षा 6 से 8 के लिए 3 किमी पैदल दूरी के भीतर होना चाहिए। न हो तो सरकार को स्कूल देना होगा या मुफ़्त परिवहन का इंतज़ाम करना होगा।
स्कूल क्या नहीं कर सकते
- कोई कैपिटेशन फ़ीस नहीं, कोई स्क्रीनिंग नहीं (धारा 13)। दाख़िले के लिए डोनेशन या अतिरिक्त भुगतान नहीं, और बच्चे या माता-पिता का टेस्ट या इंटरव्यू नहीं। कैपिटेशन फ़ीस लेने वाले स्कूल पर रक़म के दस गुना तक जुर्माना; स्क्रीनिंग पर पहली बार 25,000 रुपये और हर अगली बार 50,000 रुपये तक जुर्माना।
- उम्र के प्रमाण की कमी पर इनकार नहीं (धारा 14)। जन्म प्रमाणपत्र न हो तो RTE नियम अस्पताल या ANM रजिस्टर, आँगनवाड़ी रिकॉर्ड, या सिर्फ़ माता-पिता की उम्र की घोषणा मानते हैं।
- देर से दाख़िले से इनकार नहीं (धारा 15)। सामान्य दाख़िला अवधि के बाद भी बच्चे का दाख़िला हो सकता है।
- प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने से पहले निष्कासन नहीं (धारा 16)।
- शारीरिक दंड या मानसिक उत्पीड़न नहीं (धारा 17)। ऐसा करने वाले शिक्षक पर सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई।
जो बच्चा कभी स्कूल नहीं गया या बीच में छोड़ गया, उसे उम्र के अनुसार कक्षा में दाख़िला और बराबरी पर लाने के लिए विशेष प्रशिक्षण देना होगा (धारा 4)।
परीक्षा और रोकना
अधिनियम में मूल रूप से किसी बच्चे को रोकने पर रोक थी। धारा 16 में 2019 के संशोधन से कक्षा 5 और 8 में नियमित परीक्षा हो सकती है। फ़ेल होने वाले बच्चे को अतिरिक्त पढ़ाई और दो महीने के भीतर दोबारा परीक्षा मिलनी चाहिए। दोबारा फ़ेल होने पर ही समुचित सरकार स्कूल को बच्चे को रोकने की इजाज़त दे सकती है।
यह लागू है या नहीं, इस पर निर्भर है कि आपका बच्चा कहाँ पढ़ता है। दिसंबर 2024 में केंद्र सरकार ने अपने नियम बदले ताकि उसके स्कूल, जैसे केंद्रीय विद्यालय और जवाहर नवोदय विद्यालय, दोबारा परीक्षा में फ़ेल होने पर कक्षा 5 और 8 में बच्चों को रोक सकें। कई राज्यों ने ऐसे ही नियम अपनाए हैं; कुछ में अब भी न रोकने की नीति है। स्कूल से अपने राज्य का नियम पूछें।
निजी स्कूलों में 25% कोटा
धारा 12(1)(c) के तहत हर निजी ग़ैर-सहायता-प्राप्त स्कूल को प्रवेश कक्षा (स्कूल के हिसाब से नर्सरी या कक्षा 1) में कम से कम 25 प्रतिशत सीटें पड़ोस के कमज़ोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए रखनी होंगी और उन्हें कक्षा 8 तक मुफ़्त पढ़ाना होगा। सरकार स्कूल को प्रतिपूर्ति करती है। सुप्रीम कोर्ट ने Society for Unaided Private Schools of Rajasthan v. Union of India (2012) में इसे सही ठहराया।
Pramati Educational and Cultural Trust v. Union of India (2014) में कोर्ट ने कहा कि अधिनियम अल्पसंख्यक स्कूलों पर लागू नहीं होता। 2025 में दो जजों की पीठ ने इस पर संदेह जताया और इसे बड़ी पीठ को भेजा; अक्टूबर 2026 तक, जब तक वह पीठ फ़ैसला न करे, 2014 का फ़ैसला लागू है।
"कमज़ोर" या "वंचित" कौन है (आम तौर पर आय-सीमा, SC/ST, OBC, अनाथ, दिव्यांग बच्चे, और कुछ राज्यों में HIV-प्रभावित या प्रवासी बच्चे) हर राज्य तय करता है। ज़्यादातर राज्य साल में एक बार ऑनलाइन आवेदन और लॉटरी चलाते हैं, आम तौर पर जनवरी से अप्रैल के बीच। विंडो छूट जाए तो आम तौर पर एक साल इंतज़ार करना पड़ता है।
क़दम दर क़दम: स्कूल मना करे या बच्चे से दुर्व्यवहार हो तो
- इनकार लिखित में माँगें। ज़्यादातर ग़ैर-क़ानूनी इनकार ज़ुबानी होते हैं। प्रधानाध्यापक से विनम्रता से कारण काग़ज़ पर देने को कहें, या ख़ुद एक छोटा पत्र भेजें और प्रति रखें।
- विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) में उठाएँ (धारा 21)। हर सरकारी और सहायता-प्राप्त स्कूल में यह होनी चाहिए, जिसके तीन-चौथाई सदस्य माता-पिता होते हैं। यह स्कूल की निगरानी करती है और प्रधानाध्यापक पर दबाव डाल सकती है।
- स्थानीय प्राधिकरण को शिकायत करें (धारा 32): खंड शिक्षा अधिकारी या नगर शिक्षा अधिकारी को लिखित में। प्राधिकरण को दोनों पक्ष सुनकर तीन महीने में फ़ैसला करना होगा। इनकार, बच्चे की उम्र का प्रमाण और अपना पते का प्रमाण संलग्न करें।
- राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग में अपील करें (धारा 31–32) अगर स्थानीय प्राधिकरण कार्रवाई न करे या आप फ़ैसले से असहमत हों। राष्ट्रीय आयोग (ncpcr.gov.in) भी शिकायतें लेता है।
- हेल्पलाइन इस्तेमाल करें। बच्चा स्कूल से बाहर और काम कर रहा हो, या पीटा या प्रताड़ित किया गया हो, तो 1098 पर कॉल करें। रिकॉर्ड के लिए pgportal.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
- मुफ़्त क़ानूनी सहायता लें। 15100 पर कॉल करें या ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण जाएँ। बच्चे और उनके माता-पिता पात्र हैं। अधिकारी फिर भी कार्रवाई न करें, तो क़ानूनी सहायता का वकील अनुच्छेद 21A लागू करवाने के लिए अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर कर सकता है।
सलमा की 7 साल की बेटी रुक़साना को लखनऊ के एक निजी स्कूल में 25% कोटे से दाख़िला मिला। अगस्त में स्कूल सलमा से कहता है कि किताबों और "स्मार्ट क्लास फ़ीस" के 4,000 रुपये दें वरना रुक़साना को दोपहर के सेक्शन में भेज दिया जाएगा। सलमा माँग लिखित में माँगती हैं; स्कूल मना करता है। वह आवंटन पत्र की प्रति, तारीख़ और स्टाफ़ के नाम के साथ बेसिक शिक्षा अधिकारी को लिखती हैं, और वही शिकायत राज्य के शिकायत पोर्टल पर दर्ज करती हैं। अधिकारी स्कूल को नोटिस जारी करते हैं। स्कूल माँग वापस लेता है और रुक़साना अपनी कक्षा में रहती है। सलमा अधिकारी का आदेश सँभालकर रखती हैं, कहीं अगले साल माँग दोहराई जाए।
ये तैयार रखें
- बच्चे की उम्र का प्रमाण: जन्म प्रमाणपत्र, या अस्पताल, आँगनवाड़ी या माता-पिता की घोषणा।
- पड़ोस के लिए पते का प्रमाण: आधार, राशन कार्ड, वोटर आईडी, किराया अनुबंध या बिजली बिल।
- 25% कोटे के लिए: आय प्रमाणपत्र या जाति या विकलांगता प्रमाणपत्र, और ऑनलाइन आवेदन या आवंटन पत्र।
- स्कूल को भेजे और स्कूल से मिले हर पत्र की प्रति, माँगे गए किसी भी भुगतान की रसीद, और नाम व तारीख़ें।
RTE अधिनियम निजी स्कूलों की सामान्य (ग़ैर-कोटा) छात्रों से ली जाने वाली फ़ीस को नियंत्रित नहीं करता। फ़ीस बढ़ोतरी अलग राज्य फ़ीस-नियमन क़ानूनों और समितियों से नियंत्रित होती है, जहाँ वे हैं। शिकायत राज्य फ़ीस नियामक समिति या शिक्षा विभाग में करें, RTE अधिनियम के तहत नहीं।
कहाँ जाएँ
- स्कूल में: प्रधानाध्यापक, फिर विद्यालय प्रबंधन समिति।
- स्थानीय प्राधिकरण: खंड शिक्षा अधिकारी या नगर शिक्षा अधिकारी, फिर ज़िला शिक्षा अधिकारी (धारा 32, तीन महीने में फ़ैसला)।
- आयोग: राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग; राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, ncpcr.gov.in।
- हेल्पलाइन: बच्चे 1098; आपातकाल 112; क़ानूनी सहायता 15100।
- अदालत: क़ानूनी सहायता (nalsa.gov.in) के ज़रिए अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट में रिट याचिका।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या स्कूल जन्म प्रमाणपत्र या आधार न होने पर मेरे बच्चे का दाख़िला मना कर सकता है?
नहीं। RTE अधिनियम की धारा 14 उम्र के प्रमाण की कमी पर दाख़िले से इनकार रोकती है, और RTE नियम अस्पताल या ANM रजिस्टर, आँगनवाड़ी रिकॉर्ड या माता-पिता की उम्र की घोषणा मानते हैं। आधार को दाख़िले या मिड-डे मील की शर्त नहीं बनाया जा सकता। इनकार लिखित में माँगें और खंड शिक्षा अधिकारी को शिकायत करें।
निजी स्कूल में 25% RTE कोटे के लिए आवेदन कैसे करें?
हर राज्य साल में एक बार, आम तौर पर जनवरी से अप्रैल के बीच, अपने शिक्षा विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन और लॉटरी चलाता है। आप अपने पड़ोस के स्कूल चुनते हैं, उम्र, पते और आय या श्रेणी के प्रमाण अपलोड करते हैं, और आवंटन का इंतज़ार करते हैं। कोटे में दाख़िला कक्षा 8 तक मुफ़्त है, जहाँ राज्य देता है वहाँ किताबें और यूनिफ़ॉर्म भी। विंडो छूटने पर आम तौर पर अगले साल तक इंतज़ार करना पड़ता है।
क्या मेरे बच्चे को कक्षा 5 या 8 में फ़ेल करके रोका जा सकता है?
सिर्फ़ तब जब आपके राज्य या स्कूल की संबंधित सरकार ने 2019 का संशोधन अपनाया हो, और वह भी दो महीने के भीतर दोबारा परीक्षा और अतिरिक्त पढ़ाई के बाद ही। केंद्र सरकार के स्कूलों ने इसे दिसंबर 2024 में अपनाया; कुछ राज्यों ने अपनाया है, कुछ में न रोकने की नीति है। किसी भी हाल में कोई बच्चा कक्षा 8 पूरी करने से पहले निकाला नहीं जा सकता।
क्या स्कूल में शारीरिक दंड ग़ैर-क़ानूनी है?
हाँ। RTE अधिनियम की धारा 17 हर स्कूल में शारीरिक दंड और मानसिक उत्पीड़न पर रोक लगाती है, और शिक्षक पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होती है। गंभीर चोट किशोर न्याय अधिनियम, 2015 और भारतीय न्याय संहिता के तहत अपराध भी हो सकती है। मेडिकल रिपोर्ट लें, प्रधानाध्यापक और खंड शिक्षा अधिकारी को लिखित शिकायत करें, और 1098 पर कॉल करें।
यह लेख जागरूकता के लिए सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। अपनी स्थिति के लिए किसी वकील से सलाह लें या मुफ़्त क़ानूनी सहायता के लिए 15100 पर कॉल करें।